जानिए कि पुरूष और स्त्रियां सेक्स को कितनी अलग तरह से देखते हैं

Anney Sam
man kissing on neck

प्रकृति ने पुरूषों और स्त्रियों को अलग अलग बनाया है। इसके बावजूद, यौन अंतरों को जाना जा सकता है और समझा जा सकता है जिससे तारतम्य बनाया जा सकता है।

पुरूष और स्त्रियां अलग होते हैं भले ही हम दोनों होमो सेपियंस कैडर से संबंधित हैं। आप इसे सभी जीवित प्राणियों में देख सकते हैं विशेष रूप से मैमल्स में। स्त्रियों में आंतरिक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक अंतर होते हैं जिन्हें हमें स्वीकार करने की और तदनुसार अपना व्यवहार सेट करने की आवश्यकता होती है। आखिरकार बुनियादी व्हाई क्रोमोज़ोम्स नर प्रजाती से संबंधित होते हैं और यही अंतर नर लिंग को गढ़ता है।

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यद्यपि हम प्रत्येक लिंग में आकार, ताकत और ध्यान देने योग्य यौन घटकों जैसे कई सुस्पष्ट अंतरों की सराहना कर सकते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिक अंतरों पर हमने चर्चा नहीं की है और ना ही उन्हें समझा है। इससे घनिष्ट संबंधों और बेडरूम में भी संघर्ष और भ्रम उत्पन्न हो सकता है।

फेमिनिस्ट लोग चिल्ला-चिल्ला कर लिंगों के बीच समानता के बारे में कह सकते हैं और मैं सहमत हूँ कि काम के वातावरण में उन्हें बराबरी का वेतन दिया जाना चाहिए। हालांकि हमारे बुज़ुर्ग और अब न्यूरो वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक भी बताते हैं कि अंतर स्पष्ट हैं और एक बुद्धिमान समाज के निर्माण के लिए यही सही होगा कि हम उन पर ध्यान दें।

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पुरूषों और स्त्रियों का दिमाग एक दूसरे से भिन्न कैसे होता है

न्यूरोलॉजी और व्यवहार के यूसी इरविन प्रोफेसर डॉ लैरी कैहिल कहते हैं, ‘‘तंत्रिका विज्ञान साहित्य से पता चलता है कि मानव मस्तिष्क, तंत्रिका संरचनाओं में अलग-अलग शारीरिक अंतरों और क्रियात्मक अंतरों के साथ एक सेक्स टाइप्ड अंग है, तंत्रिका विज्ञान पत्रिका के उस पहले इशू में जो नर्वस सिस्टम कार्य पर लिंग के अंतर के प्रभाव पर पूरी तरह समर्पित है।”

इन ‘‘स्वाभाविक अंतरों” से संबंधित कुछ उदाहरण अक्सर विभिन्न प्राइमेट्स जैसे रीसस बंदरों पर अध्ययन से आते हैं। एक अध्ययन ने नर और मादा बंदरों को गर्ली (प्लश) और बॉइश (पहियों वाले) खिलौने प्रस्तुत किए और देखा कि हर बंदर ने किस तरह का खिलौना पसंद किया। इस टीम ने पाया कि नर रीसस बंदरों ने स्वाभाविक रूप से पहियों वाले खिलौने को पसंद किया, जबकि मादाओं ने मुख्य रूप से प्लश खिलौनो के साथ खेला। उन्होंने यह तर्क दिया कि यह संकेत है कि लड़के और लड़कियां विभिन्न प्रकार के व्यवहार और ऊर्जा व्यय के विभिन्न स्तरों के साथ विभिन्न शारीरिक गतिविधियों को पसंद कर सकते हैं।

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इसके अलावा, अन्य अध्ययन से पता चलता है कि बहुत कम उम्र में ही लिंगों के व्यक्तित्व में भिन्नता आने लगती है। उदाहरण के लिए, 2013 में प्रकाशित हुए एक अध्ययन ने तीन वर्ष की उम्र के जुड़वाओं के 357 जोड़ों के स्वभाव की रेटिंग को देखा। लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक सक्रिय रेट किया गया था जबकि लड़कियों को शर्मिली रेट किया गया था क्योंकि उनके व्यवहार पर उनका नियंत्रण था। ये निष्कर्ष हमें विकासवादी मनोवैज्ञानिकों की बात समझाते हैं कि आज के हमारे मनोवैज्ञानिक गुण हमारे पूर्वजों द्वारा अनुभव की गई सरवाइवल मांगों को दर्शाते हैं और साथ ही, ये मांगें पुरूषों और स्त्रियों के लिए भिन्न थीं। उदाहरण के लिए, अधिक नर्चरिंग व्यक्तित्व वाली स्त्रियों में एक कमज़ोर संतान को पालने की अधिक संभावना होती है, जबकि साहसी व्यक्तित्व वाले पुरूष, साथी के लिए प्रतिस्पर्धा में ज़्यादा सफल होते हैं। परिणाम स्वरूप, ये लक्षण लगातार कई पीढ़ियों तक पारित किए गए होंगे।”

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पुरूषों और स्त्रियों में यौन व्यवहार की गतिशीलता

प्रत्येक जोड़े को खुद पता लगाना चाहिए कि उनका साथी यौन रूप से उनसे किस तरह अलग है। यहां कुछ अंतर है जिनके साथ आप इत्तेफाक रख सकते हैं:

1. पुरूष दृश्य रूप से टर्न ऑन होते हैं और उन्हें वह चाहिए होता है जो वे देखते हैं। यही वह कारक है जिससे अधिकांश फैशन उद्योग अपना मुनाफा कमाता है। स्त्रियां पुरूषों को आकर्षित करने और लुभाने के लिए तैयार होती हैं। स्त्रियां स्वभाव में कान और नाक से संबंधित होती हैं, पुरूष की गंध और आवाज़ के द्वारा वे टर्न ऑन और टर्न ऑफ हो जाती हैं।


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2. स्त्रियों की घर बसाने की प्रवृत्ति भी पुरूषों की तुलना में मज़बूत होती है। पुरूष एक साथी को पाकर ही खुश हो जाते हैं। स्त्रियां अधिक सतर्क होती हैं और उन्हें सहजता से ऐसे पुरूष की आवश्यकता होती है जो उनकी संतान की देखभाल करेगा। तो आप देख सकते हैं कि स्त्रियां बड़ी उम्र के, समृद्ध और ज़्यादा स्टेबल पुरूषों को पसंद करती हैं और इसलिए उन्हें गोल्ड डिगर्स भी कहा जाता है।

3. पुरूष सेक्स की क्रिया में अधिक ऊर्जावान और आक्रामक होते हैं और सिर्फ चरम तक पहुंचने के प्रयास पर केंद्रित होते हैं। स्त्रियों को संपर्क की भावना की आवश्यकता होती है; एक स्पार्क, देखभाल की भावना, और ये पुरूषों की तुलना में ज़्यादा एब्स्ट्रैक्ट हैं। यहीं पर पुरूष उलझन में पड़ जाता है कि अपनी प्रेमिका के लिए उसे क्या करना है। पुरूषों को प्यार के बिना भी सेक्स करने में काफी सहजता होती है, लेकिन स्त्री को पूरी प्रक्रिया का उत्साह महसूस करने की आवश्यकता होती है- यह उसके ओर्गेज़्म और उसकी भावना के साथ भी जुड़ा है।


4. पुरूष टकरावों को अलग तरह से देखते हैं – वे इस बारे में बात करने की बजाए उससे बचना पसंद करते हैं। स्त्रियां लंबे समय तक उसके बारे में बात करती रहती है! कभी-कभी संचार ही कूंजी होता है – स्त्री की रोमांटिक फंतासियां और पुरूष की त्वरित ज़रूरतों को सिंक करने के लिए एक साझा मंच मिलना चाहिए।

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5. पुरूषों को यह समझने की ज़रूरत है कि सेक्स के दौरान अपने कम्फर्ट ज़ोन तक पहुंचने के लिए स्त्रियों को थोड़ा समय चाहिए होता है। फिर उसे इंतज़ार करने के लिए अपने आप को प्रशिक्षित करना चाहिए और क्लाइमेक्स में पहुंचने के लिए अपनी पत्नी की भी मदद करनी चाहिए। स्त्रियों यहां एक उपाय हैः एक पुरूष को पीठ सहलाए जाने से सुकून और सुरक्षा प्राप्त होती है – क्योंकि उसे अपनी माँ द्वारा प्राप्त यह पहला स्पर्श था!

यौन व्यवहारों में अंतर को समझा जाना चाहिए और स्वीकार किया जाना चाहिए, ना कि उनको चुनौती दी जानी चाहिए या मुकाबला किया जाना चाहिए। जब पुरूष और स्त्रियां एक दूसरे के अंतर को स्वीकार करते हैं और बिस्तर में उन्हें समायोजित करते हैं तो तारतम्य उत्पन्न होता है।

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