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जब आप विवाह में सुखी हों और किसी और से प्यार हो जाए

जब आप अपने काम पर किसी के साथ बहुत ज़्यादा समय के लिए निकट रहें, तो कभी-कभी एक सुखी विवाह में भी विश्वास बनाए रखना मुश्किल हो जाता है
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(पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

शीला मेरी 40 लोगों की टीम में एक ग्राफिक डिज़ाइनर थी, जिसने त्रिवेंन्द्रम के उसके कॉलेज के सहपाठी से विवाह किया था। वह सुंदर, आधुनिक और मित्रवत थी और उसका पति विपरीत था – सहकर्मी समूह के अनुसार एक अंतर्मुखी और काफी बदसूरत। वह एक अन्य कंपनी में आर्किटेक्ट के रूप में काम करता था लेकिन टैकपार्क परिसर में ही। वे प्यार में थे।

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तरूण भी मेरी टीम में था, एक प्यारा सा दूसरी पीढ़ी का मारवाड़ी लड़का -वह भी शीला के प्यार में डूबा था। उसने कभी बोलने की हिम्मत नहीं की क्योंकि वह जानता था कि उसका मारवाड़ी परिवार कभी अपने समुदाय के बाहर विवाह के लिए सहमत नहीं होगा। शीला उसकी भावनाओं को जानती थी, हालांकि उसने कभी भी शब्दों में कुछ व्यक्त नहीं किया था। इसके अलावा, वह किसी और के साथ विवाह में सुखी थी।

पांच वर्ष बीत गए। तरूण और शीला दोनों ने काम पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और दोनों को पदोन्नत कर दिया गया और धीरे-धीरे तरूण के प्रति उसके मन में भावनाएं विकसित होने लगीं। वह उसके प्रति लगभग कुत्ते की तरह वफादार था, वह हमेशा जानता था कि उसे क्या चाहिए और उसे खुश करने के लिए सब कुछ करने को तैयार रहता था, चाहे कैंटीन में एक त्वरित लंच हो या नाश्ता, उसे घर छोड़ना हो, या परिसर के बुर्ज पर कुछ मिनट तक बादलों को देखना हो।

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एक दिन वह सलाह के लिए मेरे पास आई। वह इतना दोषी महसूस कर रही थी कि तरूण के लिए उसकी भावनाएं पूरी तरह से प्यार में विकसित हो रही थी। उसे लगा यह उसके पति के प्रति अन्याय था जिससे विवाह करके वह इतनी सुखी थी। उसका पति और वह अपने पिता की संपत्ति में घर बनाने की योजना बना रहे थे जिसका वह वारिस था। उसने मुझे पूछा कि मेरे अनुसार उसे क्या करना चाहिए, क्योंकि वह विवाह में सुखी थी लेकिन लगातार तरूण के बारे में सोचती रहती थी।

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देखिए, हाल ही में मुझे पता चला कि लगभग आठ साल बाद, वह अपनी भावनाओं के वशीभूत हो गई और अब वह तरूण के साथ विवाह में सुखी है, अपने पति से शांतिपूर्ण तलाक लेने के बाद, जिसके साथ वह बहुत सुखी थी।

मैं किसी और से प्यार करता हूँ लेकिन मैं अपने विवाह में भी सुखी हूँ….

शांतनु मेरा बॉस था; वह अपना परिवार कोलकाता में छोड़ आया था केवल बैंगलोर में यह नौकरी करने के लिए। वह कोलकाता में अपनी प्यारी पत्नी और बेटी को छोड़ आया था केवल अपना कैरियर आगे बढ़ाने के लिए, और बेशक पैसा भी बहुत अच्छा था। वह अत्यधिक आकर्षक था और अपने अधिनस्थ कर्मचारियों को संभालने का उसका तरीका बहुत मृदु था।

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क्योंकि वह यहां अकेला था, कई युवा लड़कियों में उनका ध्यान आकर्षित करने की स्पर्धा थी; जिसमें से कईयों ने अपने कैरियर में आगे बढ़ने के लिए इसे एक तरीके के रूप में इस्तेमाल किया। भले ही वे जानती थीं कि उसकी एक पत्नी थी जिसके साथ वह सुखी था। इससे वे रूकी नहीं।

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मैं उससे 15 वर्ष बड़ी थी और काम और जीवन का अनुभव था और वह मेरे साथ अपने विचार साझा करने में सहज महसूस करता था। हम बरीस्ता के फूड कोर्ट में बैठे अपने अगले मार्केटिंग अभियान पर चर्चा कर रहे थे जब उसने तपाक से पूछा, ‘‘ऐनै, मुझे क्या करना चाहिए? मुझे अपर्णा से प्यार हो गया है जो हमारी कंपनी की कानूनी सलाहकार है।”

इसलिए मैंने उससे पूछा कि वह इस विषय में क्या करने वाला है। वह दुखी दिख रहा था और उसने कहा कि हालांकि वह अपनी पत्नी से शादी करके खुश था, इस स्त्री के प्रति वह अविश्वसनीय रूप से आकर्षित हो रहा था। ‘‘मुझे लग रहा है कि भावनात्मक रूप से मैं अपनी पत्नी को धोखा देने लगा हूँ,’’ उसने कहा।

“मुझे लग रहा है कि भावनात्मक रूप से मैं अपनी पत्नी को धोखा देने लगा हूँ,’’ उसने कहा।

और मैं सुनती रही।

भावनाओं से लड़ना

उसने कहा कि उसे उसकी शिष्टता और उसका नम्र आत्मविश्वास पसंद है। और यद्यपि अभी तक कोई शारीरिक अपराध नहीं हुआ था, उसे लगा यह निश्चित रूप से होगा क्योंकि उसके बारे में निरंतर सोचने से वह खुद को रोक नहीं सकता था। वे लोग रात में बातें किया करते थे और वह पूरी तरह उसके मौलिक विचारों पर मोहित था।

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जब आप एक ही जगह पर 10 से 12 घंटों के लिए काम कर रहे होते हैं, तो किसी और के प्रति ये भावनाएं होना मुमकिन हैं। इसलिए मैंने उसे कहा कि दूर से ही उसकी सराहना करे और दोस्ती को सैद्धांतिक रखे। आखिरकार, एक सुखी विवाहित पुरूष के रूप में उसकी स्थिति कलंकित नहीं करनी चाहिए। छह महीने बाद उसने मुझे बताया कि उसने इन भावनाओं को परिवर्तित कर दिया और उसे दूर से ही प्यार करने का फैसला किया। वे अब भी अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैं जानती हूँ कभी-कभी एक व्यक्ति के जीवन में प्यार आ जाता है, भले ही वह विवाह में सुखी हो। क्योंकि, प्यार में कोई नियम नहीं होते।

वे पीछे हट गए

अपनी तरफ से, अपर्णा एक विवाहित पुरूष के लिए उसकी भावनाओं के आगे झुकी नहीं। उसने शांतनु को बताया ज़रूर कि उसके प्रति उसकी भावनाएं गहरी थीं और हंसते हुए यह घोषित कर दिया कि वह उसे बख्श देगी क्योंकि वह किसी दुर्भावनापूर्ण ब्रेकअप का कारण नहीं बनना चाहती। ‘‘आखिरकार,’’ ‘‘तुम किसी और के साथ विवाह करके सुखी हो।”

शांतनु फिर से कोलकाता में है, फिर से अपनी प्यारी पत्नी के साथ -उसका सुखी शादीशुदा जीवन बरकरार है। मुझे लगता है कि वह कभी-कभी अपर्णा को याद करता होगा और सोचता होगा कि क्या कुछ हो सकता था। मुझे लगता है विवाह में सुखी होना और साथ ही किसी और से प्रेम करना, सामना करने के लिए एक जटिल और पेचीदा स्थिति है और अपने साथी के अलावा किसी और के प्रति प्यार का एक मजबूत ज्वार है।

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