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जब आपके उन पलों में आपका बच्चा अचानक कमरे में आ जाये

जब आप और आपके साथी कुछ अंतरंग पल साथ बिता रहे है मगर तभी अचानक आपके कमरे का दरवाज़ा खुले और सामने आपका बच्चा खड़ा हो तो आप क्या करेंगे?
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आपने इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी.. मगर आज ये हो गया. आपके और आपके साथी के अन्तरंगी क्षणों में आपके बच्चे ने दरवाज़ा खोला और आप दोनों को देख लिया! शर्मनाक? बिलकुल शर्मनाक है ये! मगर अब जब ऐसा कुछ हो गया है, तो कोई फायदा नहीं खुद को या अपने साथी को दोष देने का. हाँ, अगर आप दोनों में से कोई दरवाज़े की चिटकिनी लगा देता, तो बहुत अच्छा होता.. मगर चूँकि वैसा हुआ नहीं तो अब उसके बारे में बात करने का कोई फायदा भी नहीं. अब ज़रूरी है इस “शर्मनाक” परिस्तिथि से खुद को और बच्चे को कैसे निकला जाए.

तो यहाँ हम आपको कुछ सुझाव दे रहे हैं जो ऐसी स्तिथि में आपके और आपके बच्चे के लिए हितकर होगें.

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स्वीकार करिये

सबसे पहले तो आपके और आपके साथी को ये मानना होगा की ये घटना सच में हो गई है और इसे आपदोनो को एक टीम की तरह मिल कर इससे निबटना होगा. एक दुसरे को दोषी ठहरा कर (जैसे तुमने दरवाज़ा क्यों नहीं बंद किया? तुम्हे इस समय ये सब करने की क्या सूझी थी? तुम्हे चेक करना चाहिए था की बच्चे सो गए की नहीं… वगैरह वगैरह) कुछ भी हासिल नहीं होने वाला।

कबूल करिये

अब अगर आपका बच्चा बहुत छोटा है तो शायद वो घबरा जाए और रोने लगे या वहां से भाग जाए. शायद उसे लगे की आप दोनों लड़ रहे हो या एक दुसरे को तकलीफ दे रहे हो. ऐसी स्तिथि में अपनी नन्ही सी जान को अपने पास बुलाइये (मगर पहले जल्दी से कपडे पहन लें) और उसे थोड़ा सुकून दें. उसे समझाएं की किसी को कोई तकलीफ नहीं पहुंची है.

उसे समझाइये की वो मम्मा पापा का स्पेशल पल था और दोनों बिलकुल ठीक हैं.

बात करिये

बातचीत कर के किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है. आपके बच्चे कितने भी छोटे हों, आप उनसे बातें करके उन्हें समझाएं. हाँ, क्या बोलना है इस बात पर बहुत ध्यान दीजियेगा. अगर आपका बच्चा ५-६ साल का है, तो शायद वो आपदोनो को ऐसी अवस्था में देख कर बहुत उत्सुक हो जायेगा. उसके मन में बहुत सारे प्रश्न होंगे. हो सकता है की वो खिलखिला कर हंसने लगे और शायद इस बात की चर्चा भी सबसे करने को व्याकुल हो. ऐसा कुछ भी होने से पहले ज़रूरी है की आप अपने बच्चे से बात करें और उसकी समझ और उम्र के मुताबिक उसे चीज़ें समझाएं.

आसान शब्दों में बातें करें

कुछ बच्चे ऐसी घटना के बाद इस बारे में कुछ भी बात नहीं करना चाहते हैं. आपको इस समय बहुत सहनशीलता से कदम उठाने होंगे और उसे प्यार से समझाना होगा की जो उसने देखा वो बड़ों के प्यार करने का तरीका है. अगर आपका बच्चा अभी भी उत्सुक है, तो शायद वक़्त आ गया है जब आप उससे “वो” बातें कर लें. हो सकता है की आप खुद अभी ऐसी बात के लिए तैयार नहीं हो मगर कभी कभी कोई चारा नहीं रहता है. आपको बहुत ही बारीकी में सेक्स के बारे में बात नहीं करनी, बस थोड़ी सी जानकारी देनी है. याद रखिये, जब सही समय होगा तो आपके बच्चे बहुत कुछ खुद ही जान जायेंगे.

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नज़रअंदाज़ करना समस्या का हल नहीं

अगर आप ये सोच रहे हैं की इस घटना को नज़रअंदाज़ करना किसी तरह का भी हल है, तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं. वो पूरी छवि आपके बच्चे के मन पर अंकित हो गई है. अगर आपका बच्चा किशोरावस्था में है, तो ये सब और ज़्यादा शर्मसार लग सकता है. अगर वो इस नाज़ुक उम्र में है, तो शायद इस बात से वो बहुत घृणित महसूस कर रहे होंगे और शायद कोई बात न करना चाहें. अगर बात ऐसी लग रही है तो उन्हें थोड़ा समय दीजिये. एक दो दिन दिन बाद आप पहल करें और कुछ भी और समझाने से पहले उस दिन के लिए माफ़ी मांगे. जी हाँ, “सॉरी” ऐसे मौको पर बहुत अच्छा काम करती है.

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शांत रहे

हम जानते हैं की ये सीख देना जितना आसान है, उस पर अमल करना उतना ही कठिन. मगर आप अपना संयम न खोये. अगर आपके बच्चे को समय चाहिए, तो कुछ भी बोलने से पहले उसे थोड़ा समय दें. मगर इस दौरान बिलकुल सामान्य व्यवहार रखें और अपना आत्म विश्वास न डगमगाने दें. सेक्स को एक निषेध या वर्जित विषय न बनने दें क्योंकि ऐसा कर के आप बच्चे के भविष्य के लिए बहुत नकारात्मक भ्रम पैदा कर रहे हैं.

कुछ नियम बनाने के लिए अच्छा समय

जो होना था, वो तो हो चुका है. अब इस मौके का फायदा उठाइये और कुछ नियम लागू करने के लिए ये अच्छा समय है. मगर याद रहे की जो नियम आप बच्चे के लिए बना रहे हैं, वो घर के बड़ों के लिए भी है. ऐसा ही एक ज़रूरी रूल है, “किसी के कमरे में आने से पहले दरवाज़ा खटखटानाज़रूरी है”.

जो बीत गई सो बात गई

जितनी जल्दी हो सके घर के वातावरण को सामान्य करने की कोशिश करें. न तो इस बारे में ज़्यादा बात करने की ज़रुरत है और न बार बार माफ़ी मांगने की ज़रुरत है. विश्वास कीजिये, आपसे कहीं ज़्यादा आपका बच्चा इस स्तिथि से जल्दी से जल्दी निकलना चाहता है. कोशिश करें की सब कुछ सामान्य हो जाये और आप और आपके बच्चे नार्मल दिनचर्या में वापस आएं.

सेक्स के लिए सकारात्मक रहे

वो पल जब आपका बच्चा कमरे में आया था और उसने आपदोनो को आपत्तिजनक हालत में देखा था, उस पल की याद मात्र आपको सेक्स से दूर कर सकती है. मगर याद रखिये की हम सब इंसान हैं और गलतियां इंसान से ही होती हैं. इस घटना को आप अपने और अपने साथी के बीच के रिश्ते को बदलने न दें. इसे भूल जाएँ और बस आगे से और सावधान रहे.

खुद को याद दिलाएं की आपके बच्चे इस घटना से प्रताड़ित नहीं हुए हैं और ये भी की बस ये एक बुरी याद है जो धीरे धीरे बहुत पीछे छूट जाएगी.

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