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जब बच्चों के नन्हें हाथ एक शादी को बांधे रखते हैं

अपने ससुराल वालों द्वारा किए गए दुर्व्यव्हार के बाद वह कुछ कठोर करने के लिए प्रेरित हो गई थी, और फिर एक दिन, उसने बदलाव किया। 5 दशकों बाद लीला रामस्वामी इस तरह के विवाह में प्यार की प्रकृति के बारे में याद करती हैं।
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मैंने पांच दशक पहले शादी की थी और यह वह समय था जब रोमांटिक प्यार से अपेक्षा की जाती थी कि वह शादी से पहले होने की बजाए शादी के बाद हो। मैं एक पालन पोषण वाले और प्यार भरे माहौल में पली बढ़ी थी। मुझे उदार शिक्षा प्राप्त हुई थी और बहुत कम उम्र में, मैंने साहित्य में हॉनर्स की डिग्री हासिल कर ली थी। हालांकि, जब शादी की बात निकली तो परंपरा ने बाज़ी मार ली। मेरे लिए चुना गया दूल्हा भी मेरे जैसे विषयों में ही शिक्षित था और हम एक दूसरे के लिए उपयुक्त लग रहे थे। एक सरप्राइज़ मेरा इंतज़ार कर रहा था हालांकि वह सुखद नहीं था।

मेरे ससुराल वाले रूढ़िवादी थे। मेरी शिक्षा और डिग्री सिर्फ शादी के निमंत्रण पत्र को सजाने के लिए थे। मेरे पति अपने माता-पिता की इच्छाओं को सर्वोपरी रखते थे और उनकी सभी सनकों को पूरा करते थे। मेरी सास एक पज़ेसिव और विरोधाभासी महिला थी और मुझे ‘काबू में रखने’ और मुझे अपमानित करने का कोई भी मौका गंवाती नहीं थी। मैं एक कोल्हू का बैल बन गई थी, मेरी प्रतिभा और उम्मीद पूरी तरह से कुचल दी गई थीं। मेरे पति, अपने माता-पिता की एकमात्र संतान, हालांकि स्वभाव से मूर्ख नहीं थे लेकिन पूरी तरह से अपने माता-पिता के अधीन थे। मेरे माता-पिता जिन्हें धीरे-धीरे मेरी स्थिति के बारे में पता चला, उन्होंने मुझे धैर्य रखने और एडजेस्ट करने की सलाह दी। घर से बहुत दूर होने और खुद के पैसे ना होने के कारण मेरे पास उनकी सलाह मानने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।

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समय बीता और मेरी बेटी पैदा हुई। वह एक सुंदर बच्ची थी और मुझे हर तरह से परफेक्ट लग रही थी। मुझे लगा कि उसकी उपस्थिति मेरे जीवन में एक बड़ा परिवर्तन लाएगी, लेकिन मैं गलत थी। मेरे ससुराल वालों ने उस पर एकाधिकार प्राप्त कर लिया, और उससे संबंधित हर मामले में वे खुद ही निर्णय लेते थे। मैं भी बिमार हो गई और उसपर पर्याप्त ध्यान देने में असमर्थ हो गई। यह मेरे धैर्य का अंत था। एक दिन, उसे अपनी बाहों में उठा कर मैं छत पर चली गई। मैंने फैसला किया कि मेरे कूदने से मेरे हर दुख का अंत हो जाएगा। मैं हिम्मत जुटा कर किनारे पर खड़ी हो गई और मेरी बेटी ने टेक्सी को देखकर कहा, ‘‘टेस्की टेस्की’। वह बस कुछ शब्द बोलने ही लगी थी। उसके शब्दों ने मुझे निस्तब्ध कर दिया। मेरे विचार पूरी तरह पलट गए। मुझे उस के साथ ऐसी क्रूरता करने का क्या अधिकार था? मेरे स्वार्थ और कायरता की वजह से एक सुंदर जीवन नष्ट हो जाएगा।

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दिल में एक नया दृढ़ संकल्प लिए मैं वापस लौट गई। मैं लडूंगी, बुरी स्थिति को सुधारूंगी और खुद के लिए नया जीवन बनाउंगी। ताने और बुरा व्यवहार जारी रहा लेकिन मैंने एक नए धैर्य के साथ उनका सामना किया। एक और बेटी का जन्म हो गया और अब मेरे पास जीने और प्यार करने की दो वजहें थीं। उन्होंने उस प्यार को बराबर माप में वापस लौटा कर मेरे जीवन को सार्थक बना दिया।

इन वर्षों ने मुझे सिखाया है कि प्यार के कई चेहरे और अनगिनत पहलू हैं। मेरे पति और मैंने इन वर्षों में कई बार सुखी समय भी साझा किया है। मेरी बेटियां अच्छी और परिपक्व इंसान है जो अपने-अपने तरीके से समाज की सेवा कर रही हैं।

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फिर रोमांटिक प्यार क्या है? फिडलर ऑन द रूफ फिल्म में, तेव्यी छत पर जाता है और अपनी पत्नी गोल्डे से बार-बार पूछता है, ‘‘क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?’’ और वह उत्तर देती है, ‘‘25 वर्षों से मैंने तुम्हारे कपड़े धोए हैं, तुम्हारे लिए खाना पकाया है, तुम्हारा घर साफ किया है, तुम्हारे बच्चों को जन्म दिया है और तुम्हारी गायों को दुहा है। अगर यह प्यार नहीं है तो प्यार क्या है?’’ इसकी तुलना एक युवा पुरूष द्वारा अपनी प्रेमिका को लिखे गए प्रेमपत्र से कीजिए। ‘‘मैं तुम्हें तन-मन से प्यार करता हूँ। मैं तुम्हारे साथ रहने के लिए सबसे बड़ा पहाड़ चढ़ जाउंगा, गहरे समंदर में डुबकी लगा लूंगा और यहां तक की जलती आग पर भी चल जाउंगा।” पोस्ट स्क्रिप्ट के रूप में, वह यह भी जोड़ता है, ‘‘डार्लिंग, अगर आज शाम को बारिश हो रही होगी, तो शायद मैं तुमसे मिलने नहीं आ सकूंगा।”

अब हम ऐसे युग में हैं जहां अरेंज मैरिज कम होती जा रही हैं और उन्हें घिसा पिटा समझा जाता है। हालांकि कई प्रेम विवाहों का परिणाम भी दिल का टूटना और विभाजन होता है। संवेदनशील व्यक्ति पूछ सकते हैं, ‘‘प्यार कहां है या फिर क्या है?’’ जवाब शायद मनोवैज्ञानिक और लेखक, एरिच फ्रॉम ने इंगित किया है, ‘‘प्यार में कोई गिरता नहीं है। वास्तव में, प्यार का अर्थ सिर्फ डटे रहना है।”

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