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जब दुल्हन को आखिरी फेरे लेते मोच आ गई

रिया को मोच आ गई थी. आप कहेंगे, इसमें क्या बड़ी बात है. खैर बड़ी बात तो नहीं होती मगर मुश्किल ये थी की उस समय वो अपनी शादी के फेरे ले रही थी.
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चार साल तक डेट करने के बाद रिया और विक्की की आखिर शादी हो ही रही थी. दोनों ही के परिवार इस रिश्ते के खिलाफ थे और बहुत मुश्किल से अब दोनों पक्ष माने थे. दोनों ने हर कोशिश कर ली थी उन्हें मनाने की मगर कुछ भी काम नहीं कर रहा था. फिर आखिरकार दोनों ने साथ भाग जाने की धमकी दी. परिवार वाले अब क्या करते, मान गए.

दोनों ही तरफ से इतना विद्रोह रहा था की विक्की और रिया को लगता था की शादी के लिए हाँ करने के बाद भी वो एक दुसरे से दुर्व्यवहार ही करेंगे मगर वो कितने गलत थे. रिया के परिवार वालों ने विक्की को खुले दिल से अपने घर का हिस्सा मान लिया. वो जब भी उनके घर जाता, वो उसकी जी भर कर खातिर करते थे. विक्की के माता पिता रिया को वो सारा प्यार और सम्मान दे रहे थे जो एक होने वाली बहु को मिलता है. ऐसा लग रहा था की जैसे सब ने ही अपनी गाडी बिलकुल यू-टर्न में घुमा ली हो.
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रिया तो वैसे भी पूरी रोमांटिक थी.

अब जब शुरुवाती विद्रोह ख़त्म हो चूका था, उसे पूरी उम्मीद थी की अब उनकी शादी एक बहुत ही यादगार और सुन्दर अनुभव होगा.

सब कुछ बिलकुल वैसे ही हो रहा था. दोनों परिवार न सिर्फ खुश थे बल्कि बहुत उत्साहित भी थे. शादी की तैयारियां बहुत ही ज़ोर शोर से चल रही थी और उसके तो पैर ज़मीन पर भी नहीं पड़ रहे थे.

शादी का दिन आ गया. फूलों से सजा मंडप तो आसमान का एक खूबसूरत टुकड़ा ही लग रहा था. विक्की सफ़ेद रंग की शेरवानी में बहुत ही हैंडसम लग रहा था और रिया चाह कर भी उस के ऊपर से अपनी नज़रें नहीं हटा पा रही थी. पंडित मिल कर एक सुर में मन्त्रों का उच्चारण कर रहे थे और वो पूरा वातावरण जैसे देवलोक का था. सब कुछ बिलकुल परफेक्ट था.

जैसे ही रीती रिवाज़ खत्म हुए, समय फेरों का हुआ. पहले छह फेरों में रिया को दूल्हे के पीछे चलना था और सातवें फेरे में विक्की को दुल्हन के पीछे. ये इस बात का प्रतीक था की पति और पत्नी दोनों ही एक दुसरे के पीछे चलने को तत्पर होंगे अगर परिस्तिथि की वही आवश्यकता हो तो.

सब कुछ बिलकुल सही था और रिया अपने सपनो की सी दुनिया में आखिरी फेरे के लिए बढ़ी. तभी उसका पैर उसी के भारी भरकम लहंगे पर पड़ा और उसकी एड़ी बुरी तरह से मुड़ गई. दर्द इतना तीव्र था की रिया से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. उसके माता पिता परेशां होने लगे. ये अपशगुन था. कम से कम फेरे तो पूरे होने चहिये थे. रिया भी बुरी तरह से डर गई. वो विवाह अग्नि के चारो तरफ लंगड़ाते हुए अपना फेरा नहीं लेना चाहती थी.

वो इतनी लापरवाह कैसे हो सकती थी? उसे अपने ऊपर गुस्सा और शर्म आ रही थी और अपनी हालत देख कर वो खुद रोने लगी.

तभी विक्की ने पंडित के कानों में कुछ कहा. पंडित ने कुछ देर सोचा और फिर उन्होंने विक्की को देखकर हामी भर दी. विक्की ने रिया के माता पिता को तसल्ली देने वाली नज़रों से देखा और रिया के कान में धीरे से कहा, “ज़ोर से पकड़ना बेबी”.

इससे पहले की रिया को कुछ समझ आता, विक्की ने से अपनी बाहों में उठा लिया था. वो एक मिनट को तो बिलकुल चौंक गई. फिर विक्की जब उसे गोद में उठाये उन दोनों का आखिरी फेरा पूरा कर रहा था तो वो बस चुपचाप उसे प्यार से देखती रही.

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इस बीच आसपास से फुसफुसाने की आवाज़ें आने लगी थीं. “कितना रोमांटिक है ये पल”.”कितनी सुन्दर फोटो आएँगी इस मौके की.”

रिया की ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं था. आज तक किसी भी दुल्हन के इतने रोमांटिक फेरे नहीं हुए होंगे, उसने सोचा और मन ही मन अपने पैर की मोच को धन्यवाद दिया.
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