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जब हमने एक गोल्ड डिगर को अपने घर की बहु के लिए चुना

एक मित्र बताती है की कैसे उसके भाई ने एक गोल्ड डिगर से शादी की और उनका घर इस कदम से पूर्णतया तहस नहस हो गया.
gold digger woman

(जैसा एनी सैम को बताया गया)

गोल्ड डिगर किसे कहते हैं?

गोल्ड डिगर वो महिला होती है जो किसी पुरुष से सम्बन्ध सिर्फ उससे धन और उपहार लेने के लिए ही बनाती है.

ऐसा कहा जाता है की विप्रो के संस्थापक और सीईओ अज़ीम प्रेमजी के पीछे कई ऐसी महिलएं पड़ी थी जिनकी नज़र उनके करोड़ों पर थी. वो शादीशुदा नहीं थे और व्यवसाइक दुनिया में इसलिए कई महिलाओं का वो निशाना थे. एक बड़ी मशहूर कहानी है की ऐसी ही नकचढ़ी महिला को सबक सिखाने के लिए उसे समोसे के दूकान पर ले गए और दस रुपये की समोसा चाट खरीदी. कहना न होगा, वो महिला किसी सात सितारा होटल में आलिशान खाने की उम्मीद कर रही थीं.

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ये बात और है की हर कोई अज़ीम प्रेमजी जैसे दूरदर्शी नहीं होते और इन गोल्ड डिग्गेर्स को पहचानना हर किसी के बस की बात नहीं. मेरा भाई की भी किस्मत इस मामले में अच्छी नहीं निकली. यूँ तो हमारे पास अच्छी खासी काफी प्रॉपर्टी और रबर के एस्टेट थे और लड़की के संपन्न होने जैसी हमारी कोई शर्त नहीं थी. जोमिनी एक गरीब परिवार से थी और जब हम उससे मिलने गए तो उसकी झोपडी से छोटे से घर में चार बहुत ही प्यारी सी लड़कियां थीं और वो सब उस एक पलंग पर ही सोती थी. जब मेरा भाई थोड़ा झिझक रहा था तब उनके पिता ने कहा की वो जिसे चाहे उसे अपने जीवन साथी के लिए चुन सकता है. उनकी चार बेटियां थीं और दहेज़ देने के लिए कोई पूंजी नहीं थी.

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उसे सम्पति पर अधिकार चाहिए था

शादी तय हुई और फिर जल्दी ही भाई को एक जीवनसंगिनी मिल गई. मगर वो शुरू से ही ऐसे बर्ताव करती थी मानो हमने उसके साथ कुछ बहुत ही गलत किया हो. वो दुखी रहती थी और किसी भी पारिवारिक मिलन में शरीक नहीं होती थी. जल्दी जल्दी उसने दो बेटों को जन्म दिया और जल्दी ही जायदाद में हिस्सा लेने के फ़िराक़ में लगती नज़र आई. मेरे पिता पूरी तरह से अब बिस्तर पर ही थे और अब उसकी हर पल ये कोशिश रहती थी की वो कैसे मेरी माँ को नीचा दिखाए और उन्हें धराशाई करे.

बातें छोटे विषयों से शुरू हुई. वो अक्सर ये शिकायत करने लगी की उसे अपनी सहेलियों के सामने बहुत शर्मिंदगी लगती है क्योंकि मेरा भाई कोई नौकरी नहीं करता है. अजीब बात थी इन सारी शिकायतों में वो ये बिलकुल भूल गई थी की वो कैसी पृष्टभूमि से आई है. अब दुसरे शिकार मेरी माँ थी. वो अब ये बात जताने में लग गई की कैसे मेरी माँ एक बहुत ही क्रूर सास हैं और उसे लगातार प्रताड़ित करती हैं. जो लोग माँ को जानते थे, वो इस झूठ को अच्छे से समझ गए थे. यहाँ तक की उसके बच्चे भी समझ रहे थी की उनकी माँ सबसे झूठ बोल रही थी मगर वो कुछ कह नहीं पाते थे.

उसके खुराफाती हथकंडे

एक बार उसने मेरी माँ और भाई के ऊपर शारीरिक प्रताड़ना का इलज़ाम लगाया और उन्हें लोकल थाने तक ले गई. मेरा भाई उससे वैसे ही कतराता था और इस घटना के बाद तो वो उससे और भी डरने लगा. मेरी माँ इस हादसे से इतनी शर्मिंदा थीं की वो अब बस पूजा पाठ में लग गई और भगवान से शान्ति की प्रार्थना करने लगीं. जोमिनी वक़्त बेवक़्त रोज़ एक नया नाटक शुरू कर देती–कभी मैं उसका निशाना होती और कभी माँ. कभी माँ के ऊपर वो उसके रुपये चुराने का इलज़ाम लगाती या कभी इससे भी बुरा कुछ कह देती.

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उसका एक ही मकसद था. मेरे पिता की मृत्यु के बाद अब वो मेरी माँ को घर से निकालना चाहती थी. उसके और हमारी सम्पति के बीच में उसे माँ ही एक काँटा लगती थीं. मेरी माँ भी मगर उतनी ही ज़िद्दी थी और मेरे लाख मिन्नतों के बाद भी मेरे साथ बैंगलोर आने के लिए नहीं मानी.

वो कई छोटी छोटी खुराफातें करती थी ताकि हमारा परिवार दुखी हो जाए. एक बार बहुत महँगी चाइना के टुकड़े कर उसे हमारे एस्टेट में बिखेर दिया. एक दिन उसने माँ के चश्मे चूल्हे में फेंक दिए. हद तो तब हुई जब एक बार मेरे उपहार दिए हुए छोटे छोटे पौधों पर अगले ही दिन उसने उबलता पानी डाल दिया.

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इन सब के बीच मेरा भाई पूरी ईमानदारी से अपनी डिप्रेशन की दवाइयां खाता तो ये सब कुछ मात्र मूक दर्शक की तरह देखता रहता. इस साल के १४ फरवरी को मेरी माँ चल बसी.. अब जोमिनी (बंगाली में इसका अर्थ है शैतान) ही सारी रियासत की मालकिन है और सारी बागडोर उसके हांथों में ही है.

एक दिन उसने खुद ये बात क़ुबूल की की उसने मेरे भाई से शादी सिर्फ उसकी जायदाद के लिए ही की थी. इस बात का अंदेशा तो दुनिया को काफी पहले से था, बस अब यकीन हो गया.

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