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जब मैं 19 वर्षों बाद उससे दुबारा मिला

जब वे पहले एक दूसरे को जानते थे तब बात करने की हिम्मत नहीं हुई। 19 वर्षों बाद दुबारा मिल कर उनकी प्रतिक्रिया कैसी रही?
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एक विवाहित पुरूष के लिए अपने किशोरावस्था के प्यार को प्रकट करने के लिए थोड़े साहस की आवश्यकता होती है। जब मैं उससे दुबारा मिलने और उसी प्यार को मेरे दिल में उलझन पैदा करने के बारे में बात करूंगा तो नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी। कुछ लोग एक सुखी विवाहित पुरूष द्वारा ‘विनाशकारी रहस्यों का कक्ष’ खोलने को जोखिमपूर्ण कह सकते हैं।

मैं ठीक वही करने जा रहा हूँ।

मैं गलत या सही हो सकता हूँ। आप अपनी इच्छा अनुसार मुझपर अपनी राय बना सकते हैं। समाज तय नहीं कर सकता कि मुझे किससे प्यार करना चाहिए या किस तरह जीना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का जीवन का अपना तरीका होता है और समाज उसका जीवन स्वयं नहीं जी सकता है।

मैं यह अपने दिल से उस रहस्य का बोझ हल्का करने के लिए लिख रहा हूँ।
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मैं एक रिश्तेदार के विवाह के दौरान फिर से उससे मिला। यह 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद था। उन्नीस! मैं आपको यह भी बता सकता हूँ कि हम कितने दिन जुदा रहे थे। ऐसा नहीं है कि मैं गिन रहा था। लेकिन, किसी तरह मेरी आंतरिक घड़ी यह जानती थी।

वह कुछ महिलाओं के साथ बातचीत कर रही थी। मैंने उसके बालों में कुछ सफेदी, उसकी आंखों के नीचे कुछ अंधेरा और उसके आकर्षण को लुप्त होते देखा। उसके घने और लंबे बाल एक पतले गुच्छे जितने सिमट गए थे। फिर भी, वह सुंदर थी। कम से कम मेरे लिए।

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मैं हर पल की खुश्बू को सांसों में भरते हुए उसकी सुंदरता का आनंद लेते हुए वहीं खड़ा रहा। उसने अपना सिर घुमाया और सीधे मेरी तरफ देखा, जैसे कि एक अनदेखी रस्सी ने उसे खींच लिया हो। पहचान या प्रेम की एक चमक, उसकी आंखों से गुज़री। वह मेरी ओर चली आई।

हम एक दूसरे के जीवन में देखते हुए, चुप खड़े रहे।

“यह मेरी भतीजी की शादी है,” उसने कहा, हमारे बीच चुप्पी की अदृश्य दीवार को तोड़ते हुए।

“मैं दूल्हे का दूर का रिश्तेदार हूँ। मैंने घूंट भरते हुए कहा। मैं उसी किशोर में बदल गया था जो उसका हाथ मांगने में डरा करता था। मैं जानता था कि इसी डर ने हमे हमेशा के लिए अलग कर दिया था। ‘‘तुम कैसी हो?’’

“ठीक।” वह चुप हो गई और उसने अपनी शादी की अंगूठी को घुमाया।

उसकी आंखो में कुछ था और मैं जानता था कि वह क्या था। उसकी भी वही भावनाएं थीं जो मेरी थीं। तब, या अब, हममें से कोई भी इतना साहसी नहीं था कि अपना दिल खोल कर रख दे।

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‘मैंने एक लंबे समय के बाद अपने क्रश को देखा’ Image Source

“हम अमेरिका में हैं,’’ उसने कहा।

“मैं यहां हूँ।”

ऐसा पहली बार हुआ था कि हम इतने करीब खड़े थे। उसके करीब जाने की मुझे कभी हिम्मत नहीं हुई। मैं कई अन्य किशोरों की तरह उसकी सुंदरता की दूर से ही सराहना करता था।

हमनें अपने कॉलेज, दोस्तों, अपने जीवन और जिस भी बारे में हम बात कर सकते थे, उत्साहपूर्वक बात की। मुझे एक पल के लिए भी बोरियत महसूस नहीं हुई। मैंने अपनी आत्मा से दर्द को समाप्त होते महसूस किया।

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“तुम्हारा फोन नंबर?’’ मैंने पूछा, क्योंकि वह जाने वाली थी।

“हुं” वह सोच में पड़ गई।

“जाने दो,’’ मैंने कहा, आपने हाथ को लहराते हुए। “ये पल काफी हैं।” मैं नहीं जानता कि मुझे यह वाक्य कहने का साहस कैसे मिला। हम दोनों का अपना जीवन है, जो इस संबंध जितना ही कीमती है। हम एक संबंध की कीमत पर दूसरा नहीं पा सकते।

“कई पल।” उसकी आांखे झलक पड़ी। वह घूमी, और अपनी आंखों को पोंछे बिना चली गई।

मैं शायद उसे दुबारा देख सकता हूँ या बात कर सकता हूँ या नहीं भी। लेकिन ये पल जीवनभर संजोने के लिए पर्याप्त रहेंगे।

ये पल जीवन हैं। है या नहीं?
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    1 Comment

    1. सच्चे प्यार को भुला पाना आसान नहीं होता! अच्छी कहानी!

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