जब मैंने मेरे लिव इन बॉयफ्रैंड को किसी और के साथ देखा

(जैसा स्त्रोतोपमा मुखर्जी को बताया गया)

ओपन रिलेशनशिप अपनी चुनौतियों के साथ आते हैं। नियम बहुत कठिन नहीं होते हैं और हर जोड़े के लिए भिन्न होते हैं। इसके अलावा, रिश्ते के समीकरण कई कारणों से बदलते रहते हैं और संशोधित होते रहते हैं। रिश्ते और उसमें शामिल लोगों की उम्र और परिपक्वता, संतुलन को बनाए रखने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जो घटना मैं यहां बताने जा रही हूँ, मेरे अनुसार, उनके संबंध में बहुत जल्दी घटित हुई। तितीर और इंद्र अपने निश्चित प्रयोगात्मक लिव इन रिलेशनशिप के तीसरे वर्ष में थे।

मैं एक विद्यार्थी थी और इंद्र फ्रीलांसर के तौर पर काम कर रहा था। हमने उसके घरवालों के साथ रहना शुरू कर दिया था और हमारा बेडरूम हमारी दुनिया थी। हमारा बेडरूम ना केवल सोने और सेक्स करने की जगह थी बल्कि इकलौती ऐसी जगह थी जहां हम अपने असली रूप में रह सकते थे। वहां हम अपने टर्नटेबल रिकॉर्ड प्लेयर पर संगीत सुन सकते थे, अपबीट संगीत पर नाच सकते थे, ज़रूरत पड़ने पर शराब पी सकते थे और समय-समय पर रोल प्ले भी कर सकते थे।

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मैं एक विद्यार्थी थी और इंद्र फ्रीलांसर

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अपने माता-पिता का घर छोड़ने के बाद, मैंने उस कमरे में अपनी दुनिया बसा ली थी जो मैंने सिर्फ और सिर्फ इंद्र के साथ बांटी थी। मैंने पर्दे बदल दिए थे, फर्नीचर की जगह बदल दी थी, गहरे रंग के स्टीकरों को अपनी संपत्ति बनाने के लिए उसमें ग्लो डाल दिया था। मेरे लिए, वह एक सुरक्षित आश्रय था, एक अराजक दुनिया में एक शरण, एक स्थिर घर। लेकिन मैं भूल गई थी कि परिवर्तन ही एकमात्र स्थिरता है।

घटना वाला दिन

मुझे वह दिन स्पष्ट रूप से याद है। सुबह मेरी क्लासेस थी। जब मैं उठी और बाहर जाने के लिए तैयार होने लगी तब इंद्र सो ही रहा था। मैं इंद्र को देख कर मुस्कुराई और इंद्र नींद में मुस्कुराया। वह अब भी ऐसा करता है। जब मैं बाहर जाने के लिए तैयार हो गई, मैं बिस्तर पर चढ़ गई। मुझे मेरा गुडबाय किस चाहिए था, एक रिवाज़ जो हमने तब विकसित किया जब हम साथ में रहने लगे। उसने अपनी आँखें खोली और नींद में मुझे किस दी। मैंने उसकी सांसो से आ रही बदबू की शिकायत की, मैं बस संकोची हो रही थी।

“तुम वापस कब लौटोगी?’’ उसने पूछा।

“जल्द ही, लंच के तुरंत बाद,’’ मैंने कहा।

मैंने क्लासेस मौज मस्ती में बिता दी। हमें उस रात दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाना था और मैं उसके ही बारे में सोचती रही। क्लास के बाद, मैं अपने दोस्तों के साथ कुछ खाने चली गई। मैं फटाफट वहां से भाग कर घर जाना चाहती थी, जो मैंने बाद में किया। मैंने घर जाने के लिए सबसे नज़दीकी रास्ता चुना, मैं फिल्म से पहले इंद्र के साथ थोड़ा अच्छा समय बिताना चाहती थी।

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बेडरूम का दरवाज़ा बंद था

लेकिन जब मैं घर पहुँची, मैंने देखा कि बेडरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था। यह असामान्य था। जब मैं अंदर होती थी तो आमतौर पर दरवाज़ा बंद कर देती थी लेकिन इंद्र ने ऐसा कभी नहीं किया था। दरवाज़े की दरार से मैंने उन्हें देखा। मेरा बॉयफ्रैंड और वह लड़की एक अंतरंग स्थिति में थे। मैं वहीं पर जड़वत् रह गई। क्या यह सच में मेरा कमरा, मेरा बिस्तर हो सकता है? मैं वहां चुप्पी में खड़ी रही और उनके बदनों को एक दूसरे के करीब आते देखती रही। दो जिस्मों के लयबद्ध तरीके से साथ में हिलने में एक सौंदर्य है जो पज़ेसिवनेस और स्वार्थी विचारों से परे है। मैं अपनी नज़रें नहीं हटा सकी। जब मैं वहां खड़ी थी और कुछ निश्चय करने में असमर्थ थी तो मैंने इसे कुछ मिनट तक ऐसे ही चलने दिया। मेरे दिमाग में एक ही सवाल गूंज रहा था, ‘‘तुम वापस कब लौटोगी?’’

Woman at door
बेडरूम का दरवाज़ा बंद था

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अचानक, मुझे जलन होने लगी। आज तक मैं समझ नहीं सकी की मुझे जलन इंद्र को बांटने के लिए हो रही थी या उस कमरे को बांटने के लिए जो मेरी दुनिया था। लेकिन मैं जानती थी कि अगर मैंने इसे ऐसे ही चलने दिया और अपने शिखर पर पहुँचने दिया तो मैं इसे बरदाश्त नहीं कर पाउंगी। इसलिए मैंने थोड़ा शोर किया। मैंने ऐसा जताया कि मैं बस अभी आई हूँ। मैंने उसका नाम पुकारा और पूछा कि वह कहां है।

उसने दरवाज़ा खोलने में थोड़ा समय लिया। उसने, ऐसा दिखाया कि उसने मेरी आवाज़ पहली बार में सुनी ही नहीं। वह मुझसे बात करने के लिए कमरे से बाहर आ गया, मुझे लगता है उस लड़की को समय देने के लिए ताकि वह कपड़े पहन सके। फिर उसने कुछ सामान्य सी बात की जैसे, ‘‘तुम्हारी क्लासेस कैसी थी,’’ या ‘‘तुमने लंच में क्या खाया?’’ या ऐसा ही कुछ, मुझे ठीक से याद नहीं। मैंने बस उसे देखा और कहा, ‘‘मैंने देख लिया” और फिर जब मैंने उसे स्पष्ट रूप से शर्मिंदा देखा तो मुस्कुराई।

हम सभी सभ्य थे

मैंने तर्कसंगत काम किया। मैं कमरे में गई और उस लड़की से सामान्य बातें करने लगी। वह मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी। इसलिए मैंने उसे चाय दी और हम तीनों ने अजीब सी चुप्पी में वह चाय पी। मैंने एक टेक्सी मंगा दी जो उसे घर छोड़ आए। इस सब के दौरान, जो भी हुआ था वह मेरे दिमाग में घूम रहा था। मुझे यह समझने में थोड़ा समय, थोड़े दिन लग गए कि मुझे इससे कोई समस्या नहीं है। लेकिन मैं मानती हूँ कि उन्हें अपनी आँखों से देख कर, खास तौर से मेरे कमरे में, एक मिनट के लिए मेरा विश्वास डगमगा गया था।

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