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जब मेरे शरीर ने मुझे धोखा दिया, तो निकिता ने मुझे छोड़ कर मुझे बचा लिया

डॉ दीपक बिंद्रा बोनोबोलॉजी के ‘यू गॉट माइ बैक’ प्रतियोगिता के लिए अपनी प्रविष्टि में उस लड़की के बारे में लिखते हैं जिससे उन्होंने प्यार किया था, और यह भी कि उनके शरीर के अंगों के विफल हो जाने के बाद वह उन्हें छोड़ कर क्यों चली गई
Gift in Hand

शुक्रिया निकिता…

हमें प्यार हुए पांच साल हो चुके हैं और मुड़ कर देखने पर अहसास होता है कि, यह सिर्फ प्यार नहीं था, यह बहुत ज़्यादा प्यार था। लेकिन चीज़ें हमेशा एक जैसी नहीं रहती हैं। लोग कहते हैं बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज़ है। जब वह अच्छे के लिए होता है तो बदलाव अच्छा है। हमारा संबंध भी बदल गया, लेकिन अच्छे के लिए नहीं, बल्कि बदतर के लिए।

यह तब शुरू हुआ जब मुझे मेरे किडनी फेलियर के बारे में पता चला। उस दिन के बाद से निकिता ने मुझे फोन करना बंद कर दिया। उसने मुझसे मिलने तक की ज़हमत नहीं उठाई। मैंने उससे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसका फोन नहीं लगा। वॉट्स एैप मैसेज भी नहीं जा रहे थे; शायद उसने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया था। मैं सोचता था कि मुझसे क्या भूल हो गई।

जीवित रहने की मेरी आशा पहले ही मरने की कगार पर थी क्योंकि मुझे कोई डोनर नहीं मिल रहा था। इस तरह के तूफान के बीच में आपके प्रेमी द्वारा आपको अकेला छोड़ कर जाने से ज़्यादा बुरा क्या हो सकता है? मैंने सपने में भी यह नहीं सोचा था। वह कहा करती थी कि वह बस खुश रहना चाहती थी और इसके लिए वह कुछ भी कर सकती थी। शायद उसने सही किया, क्योंकि शायद वह एक बिमार व्यक्ति के साथ खुश नहीं हो सकती थी।

मैं अपनी ज़िंदगी के अंतिम दिन गिन रहा था कि अचानक और अप्रत्याशित रूप से, मुझे एक डोनर मिल गया। ट्रान्सप्लांट निर्धारित कर दिया गया था। मैंने यह खुशखबरी देने के लिए निकिता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह मेरे साथ थी ही नहीं। वह जिसने मेरी हर खुशी और दुख बांटने के लिए मेरे हर अच्छे बुरे समय में मेरे साथ रहने का वादा किया था, उसने मुझे ठीक उस समय छोड़ने का फैसला किया जब मुझे उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी। उसने मुझे इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि वह मेरे साथ खुश नहीं रह सकती थी। भगवान करे उसे वह खुशी कभी ना मिले जिसके लिए उसने मुझे छोड़ा।

man in hospital
(representative image) Image Source

मुझे तीन महीने तक बेडरेस्ट करने की सलाह दी गई थी लेकिन उसके प्रति मेरे प्यार (जो अब नफरत और गुस्से में बदल चुका था) की वजह से मैं एक ही हफ्ते में बिस्तर से बाहर आ गया। मैं उससे आखरी बार मिलना चाहता था, उससे उसके विश्वासघात का कारण पूछने के लिए और उसे यह दिखाने के लिए कि मैं उसके बिना खुशी से रह सकता हूँ।

मैं उसके घर पहुंचा और यह देखकर हैरान रह गया कि वह बिस्तर पर थी! उसकी माँ ने मुझे वजह बताई। मैं दंग रह गया था। मेरी सर्जरी के लिए किडनी उसी ने दान की थी। मेरा जीवन बचाने के लिए वह अपने पूरे परिवार से लड़ ली थी। इस तथ्य के बावजूद की उसके स्वास्थ्य ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, उसने मेरा जीवन बचाने के लिए खुद के जीवन को जोखिम में डाल दिया था। उसने हमारे परिवारों को भी यह कसम दी कि जबतक मैं पूरी तरह स्वस्थ ना हो जाउं, कोई भी मुझे यह बात ना बताए।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

जब मैंने उससे वजह पूछी तो उसने मुस्कुरा कर कहा, ‘‘याद है? मैंने तुमसे कहा था…मैं अपनी खुशी के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ और तुम ही मुझे खुश करते हो। इसलिए तुम्हारे लिए जो भी थोड़ा बहुत मैं कर सकती थी, मैंने किया।”

उसके जवाब ने मेरी आँखों में आँसू भर दिए। मैं मूर्ख था कि उसके इरादों और मेरे प्रति उसके प्यार पर मैंने शक किया। उसका प्यार….कितना शुद्ध, इतना सच्चा। उसके बारे में मैंने जो कुछ भी सोचा उसके लिए मैं खुद को माफ नहीं कर सकता। लेकिन मैं उसे बेहद प्यार और खुशी दे सकता हूँ…जन्म जन्मांतर तक। मैं उसे दुनिया का सबसे अच्छा जीवन दूंगा।

भगवान हमारे अंतहीन प्यार को आर्शीवाद दें….

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