जब मेरी पत्नी को पता चला कि मैंने दूसरी औरत के साथ रात गुज़ारी है

नहीं, यह राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में नहीं है। ना ही यह मज़ाकिया या व्यंग्यात्मक है। नीचे दी गई सामग्री काफी गंभीर है, उतनी ही गंभीर जैसे राजा विक्रम पर सवार बेताल हर दिन भिन्न कहानियां सुना रहा हो और अंतिम दुस्वप्न अपरिवर्तित रहे। मैं सोचता हूँ कि राजा विक्रम ने क्या व्यवहार किया होता अगर उनकी पत्नी उन्हें निरंतर उनके अतीत की डरावनी घटना की याद दिलाती रहती। आप जानते हैं, वह बोझ उठा रहे थे! उन्हें यह पता ही होगा।

मेरी कहानी में सबसे ज़्यादा पीड़ा मुझे इस बात की होती है कि मुझे बगैर कोई गलती किए सजा मिली। हाँ, मैं अपनी पत्नी की जानकारी के बगैर एक स्त्री से मिला। हाँ, मैंने एक ही कमरे में उस स्त्री के साथ रात बिताई और हाँ, मैंने ये गलती की कि अपने बातूनी, विश्वासपात्र ड्राइवर से कहा कि उस स्त्री को एयरपोर्ट छोड़ आए। और नहीं, आपको निराश करने के लिए बता दूं कि एक स्त्री के साथ एक ही कमरे में रात बिताने का अर्थ हर बार शारीरिक अनुग्रह नहीं होता है, हालांकि मैं स्वीकार करता हूँ कि मेरा इरादा ऐसा ही था। वह स्त्री निश्चित नहीं थी और मैं, भले ही जिस भी स्थिति में हूँ, मैं हमेशा से एक सज्ज्न रहा हूँ।

एक स्त्री के साथ एक ही कमरे में रात बिताने का अर्थ हर बार शारीरिक अनुग्रह नहीं होता है
मैं अपनी पत्नी की जानकारी के बगैर एक स्त्री से मिला।

स्त्रियों की अलौकिक शक्ति के साथ मेरी पत्नी ने कोलकाता में मेरे घर से 36 घंटे की मेरी अनुपस्थिति की कहानी जान ली थी। जमशेदपुर एक अच्छा बहाना था। तब वहां मेरी यात्राएं बारंबार होती थीं।

मेरी कहानी आसानी से मान ली जाती अगर मैं अपना वृतांत और अधिक आत्मविश्वास के साथ बताता और एक अनुभवी व्यभिचारी की तरह अपनी टोन को काबू में रखता। मुझसे गलती यह हो गई कि जब मैं जमशेदपुर स्टेशन पर जल्दबाज़ी में शताब्दी एक्सप्रेस पकड़ने की कहानी का विवरण सुना रहा था तो मैंने अपनी पत्नी की आंखों में नहीं देखा।

वह जल्द ही समझ गई कि लेट हो चुकी ट्रेन और रात में सहकारी टेक्सी की अनुपलब्धता के कारण मेरा स्टेशन के पास रूकने की कहानियों का कोई अर्थ नहीं बन रहा था।

वह कुछ हफ्तों बाद कार्यालय के ड्राइवर से मिली। यह उसकी नियमित चिकित्सा जांच के समय थी। उनकी वापसी की यात्रा के दौरान उन्होंने मुझे कार्यालय से गाड़ी में बैठा लिया। घर तक 5 मील की यात्रा में मेरी पत्नी ने मुझसे एक शब्द भी नहीं कहा।

उसे उस स्त्री का हर विवरण मिल चुका था। ड्राइवर को यह लगता था कि वह स्त्री मेरी रिश्तेदार थी और मेरी पत्नी ने अपनी कथित प्रतिद्वंदी के हर शारीरिक और सूक्ष्म विवरण पाने के लिए इसी संकेत का उपयोग किया था।

और फिर भरोसेमंद पत्नी की दुखभरी कहानी शुरू हो गई। यह लगभग उन अनगिनत टीवी धारावाहिकों की पटकथा जैसी थी जो वह देखा करती थी। बेशक उसके अविरल आंसूओं ने पूरी तरह उसका सहयोग किया। मैंने कुछ अर्धसत्य के साथ अपना बचाव करने की कोशिश की, लेकिन यह बदतर हो गया। इससे बेहतर मुझे चुप होना लगा।

लेकिन मेरा अपराधबोध मेरे साथ रहा।

उनकी वापसी की यात्रा के दौरान उन्होंने मुझे कार्यालय से गाड़ी में बैठा लिया।
घर तक की यात्रा में मेरी पत्नी ने मुझसे एक शब्द भी नहीं कहा।

हर बात मनवाने के लिए, चाहे उसे उसके गृहनगर छोड़ने की बात हो, या मेरे बेटे के लिए एक नया और महंगा खिलौना खरीदने की बात हो, वह हर बार इस घटना का ज़िक्र छेड़ देती थी।

भावपूर्ण आंसू उसके गुस्से को मज़बूत कर देते थे और मेरे अपराधबोध के स्तर को बढ़ा देते थे।

उसने अनुमान लगाया कि मुझे वह स्त्री इंटरनेट के माध्यम से मिली थी। इसलिए उसने अपने प्राइम टाइम के टीवी धारावाहिक देखना बंद कर दिए। वह किताब पढ़ते हुए या क्रोशिया करते हुए किसी ना किसी बहाने से उसी कमरे में बैठी रहती थी जहां हमारा प्रबल कम्प्यूटर रखा हुआ था। मैं उसकी एक्स रे जैसी आँखों को अपने शरीर के भीतर से गुज़रता हुआ महसूस कर सकता था और वह मॉनिटर पर निगरानी करती रहती थी। मेरी सर्च और रीसर्च ज़्यादा शैक्षिक और व्यावसायिक होती गई। और उसकी इसी निगरानी के कारण, ऊर्जा बचत उपायों पर मेरे कुछ लेख पर्यावरण और वहनीयता पत्रिकाओं में प्रकाशित भी किए गए।

मैं उसकी एक्स रे जैसी आँखों को अपने शरीर के भीतर से गुज़रता हुआ महसूस कर सकता था
वह मॉनिटर पर निगरानी करती रहती थी

क्या मुझे उस स्त्री के साथ मुलाकात करने का पछतावा है? रत्ती भर भी नहीं। उस गुप्त रात के रोमांच में ऐसी सामग्री है जो एक सक्षम लेखक की लेखनी द्वारा एक अच्छा साहित्य उत्पन्न कर सकती है। भिन्न महाद्विपों से दो लोगों की असंगतता, इंटरनेट के पर्दे में सबकुछ ठीक-ठाक होना, एक भौतिक मुलाकात में बिल्कुल हैरान करने वाला था – भिन्न पसंद, भिन्न संवेदनशीलता -व्यवहारिक रूप से एक अलग ब्रहमांड। सीमा रेखा के इतनी करीब होने का तनाव, और फिर भी उसे पार ना करने की दुविधा, प्रतिबद्धता और उत्तेजना का धर्मयुद्ध, लगभग भेदक और शुद्ध करने वाला था।

क्या मैं अपनी पत्नी को कभी समझा पाउंगा कि अगर यह वासना का निष्फल नाटक नहीं होता, तो मैं अपनी अन्यथा बहते हुए जीवन में उसके जैसे ठोस लंगर की सराहना कभी नहीं कर पाता? मैं नहीं करूंगा। जब से उसे पता चला है कि मैं उसके नियंत्रण में हूँ तबसे उसने मेरी जासूसी करना बंद कर दिया है।

(जैसा तपन मजूमदार को बताया गया)

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