पुनर्विवाह कर के आये पति का स्वागत पहली पत्नी ने कुछ ऐसे किया

हम उसे नानी कहा करते थे। वह एक खूबसूरत खासी स्त्री थी। मैं एक उच्च विद्यालय में काम करने के दौरान, शिलांग, मेघालय में उससे मिली थी। एक मातृवंशीय समाज को देखने का यह मेरा पहला अवसर था। मैं एक अलग कोण से जोड़ों के संबंध को देख रही थी। एक पितृसत्तात्मक समाज की स्त्री होने के नाते, मेरे लिए उनके विचार, भावनाएं और व्यवहार को समझना आसान नहीं था। लेकिन मैं कोशिश कर रही थी।

मैं नानी से एक स्थानीय बाज़ार में नियमित रूप से मिला करती थी जहां वह सूखी मछली और सब्जियां बेचती थी। उसकी उज्जवल मुस्कान और कड़ी मेहनत की प्रवृत्ति ने मुझे उसका प्रशंसक बना दिया। हमने बात करना शुरू की और जल्द ही हम दोस्त बन गए। भिन्न पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, अपने व्यक्तिगत विचार, योजनाएं और दुःख साझा करना, हमारे लिए अजीब बात नहीं थी। वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर थी। कई बार मैंने उसकी दयालुता अनुभव की – जब एक निर्धन लड़के को स्कूल की फीस की ज़रूरत थी या एक अविवाहित मां को अपने बच्चे के साथ आवास की आवश्यकता थी। उसने मुझे गहराई से छूआ और प्रेरित किया था। और एक दिन, अचानक, उसने मेरे सामने अपने जीवन के दर्दनाक पृष्ठों को खोला।

उसने मुझे गहराई से छूआ और प्रेरित किया था
उसने मेरे सामने अपने जीवन के दर्दनाक पृष्ठों को खोला

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सुबह से ही भारी बारिश हो रही थी। हवा शाम होते-होते और भयंकर हो गई थी। हम चिमनी के पास बैठे खुद को गर्म कर रहे थे। उसने पास के जंगल से एकत्र किए शकरकंद को निकालने के बाद ‘खौ’ (बांस से बनी एक प्रकार की टोकरी जो खासी/गोरो लोग अपनी पीठ पर रखते हैं) को लकड़ी के फर्श पर रख दिया। फिर उसने अपने छोटे से बैग, जिसे वह हमेशा कंधे पर लटका कर रखती है, से कोवाई (सुपारी) के कुछ टुकड़े और सुपारी की दो पत्तियां निकालीं। उसने सुपारी के पत्ते के साथ कोवाई का एक टुकड़ा मुझे दिया। मैं उसके मूड का अनुमान लगा सकती थी। लेकिन मुझे उसे उसके मन मुताबिक समय देना उचित लगा। अचानक उसने चुप्पी तोड़ी और बोली, ‘‘मेरा पति आज आ गया है। वह आज यहां रहेगा।” “फिर तुम यहां पर क्यों हो?” मैंने पूछा। उसका पति एक आसामी है। वह महीने में केवल एक बार आसाम से उसके पास आता था। मैं जानती थी। उसके बच्चे हमेशा उनके पिता के आने के बारे में उत्साहित रहते थे। लेकिन हर बार अपने पति के आने पर उसका चेहरा पीला पड़ जाता था, मैंने देखा था।

“क्या मुझे ऐसे पुरूष के साथ सोना चाहिए जिसने तीन बच्चों का बाप बनने के बाद स्वयं के समुदाय की एक लड़की से विवाह करने का निर्णय किया?” नानी ने कहा।

मैं चकित रह गई! मुझे यह पता नहीं था। मैं उसके पति से कई बार मिली थी, जो मेरे लिए विशुद्ध रूप से एक सज्जन था। पेशे से एक ईंजीनियर, और शिष्ठ व्यक्ति, उसने दोबारा शादी की, अपनी पत्नी और बच्चों को अंधेरे में रखते हुए और स्वयं के समाज/ समुदाय को प्रोत्साहित किया कि उस पर ‘रखैल’ का ठप्पा लगा दे।

नानी उसे प्यार करती थी। वह पुर्नविवाह नहीं कर सकती थी, हालांकि खासी समाज में यह सामान्य बात थी। वह टूट चुकी थी। लेकिन नानी उसे सा उसके परिवार को कोई हानी नहीं पँहुचाती। कभी-कभी वह ज़ोर से रोने के लिए जंगल में चली जाती, क्योंकि वह अपने बच्चों के सामने ऐसा नहीं कर सकती थी। वह गहरे जंगल में घंटो तक बैठी रहती थी, जहां से वह आकाश ना देख सके। उसे आकाश से डर लगता था। “मेघालय का आकाश हमेशा बादलों से घिरा रहता है। बारिश की संभावना हमेशा रहती है, मेरे जीवन की तरह,” उसने कहा।

लेकिन नानी ने कहा कि उसने बदला ले लिया।

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मैं अब भी उलझन में हूँ कि उसने स्वयं से बदला लिया या उससे, जिससे वह अब भी प्यार करती है।

उसने अपने पति के आने के ठीक पहले उसे अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए आमंत्रित किया।
मैं अब भी उलझन में हूँ कि उसने स्वयं से बदला लिया या उससे

उसने मुझे बताया कि पुनर्विवाह के बाद जब वह उसके साथ रात बिताने के लिए पहली बार घर आया था। मोहल्ले का एक खासी पुरूष उसके प्यार में पागल था। उसने अपने पति के आने के ठीक पहले उसे अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए आमंत्रित किया। केवल एक बार के लिए। उसके पति ने अस्त व्यस्त बिस्तर और उस लड़के को देखा जो उसके पति के आने पर लौट गया।

“अब हम बराबर स्तर के हैं। चलो एक-दूसरे को फिर से प्यार करें।” उसने अपने पति से कहा। वह अपने चेहरे को दोनों हाथों से ढंक कर कुर्सी पर बैठ गया। उसका पूरा शरीर कांप रहा था। और नानी ज़मीन पर लेटी थी, स्थिर, बगैर प्राण के शरीर की तरह। जब पास के चर्च की घंटी ने 12 बजने का संकेत दिया, उसने कहा, ‘‘मैं तुम्हें और हमारे बच्चों को हमेशा प्यार करूंगा।”

नानी का पति उसे अब भी महीने में एक बार मिलने आता है। नानी उससे कुछ नहीं मांगती लेकिन वह आर्थिक रूप से उनका सहयोग कर रहा है। उसकी दूसरी शादी से उसकी एक बेटी है। उसकी दूसरी पत्नी नानी के बारे में नहीं जानती।

नानी कहती है, ‘‘हम एक दूसरे का हाथ थाम कर सोते हैं। लेकिन यह मेरे आकाश से बादल नहीं हटा सकता।”

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