ये करें जब साथी सबके बीच आपकी आलोचना शुरू कर दे

आपकी ज़िन्दगी में कभी तो वो मोड़ आएगा जब आपका साथी सबके सामने आपमें त्रुटियां निकालेगा और आपकी आलोचना करेगा. इस आलोचना को कैसे लें, ये एक बहुत ही पिछड़ा मामला होता है और आप अपनी आलोचना कैसे सँभालते हो, ये हुनर आप जितनी जल्दी सीख लें, आपके लिए ये उतना ही अच्छा रहेगा. आलोचना सुनना इतना सरल नहीं होता है और ये सब इसी बात पर निर्भर करता है की आप अपनी आलोचना को लेकर क्या प्रतिक्रिया दिखते हो. अक्सर हम आलोचना स्वीकारने में मुश्किल महसूस करते हैं क्योंकि वो हमारे व्यक्तित्व की सारे खामियां हमारे सामने ला खड़ा करता है. और अगर ये आलोचना आपके जीवन साथी कर रहे हों, तो फिर सहजता से सब कुछ सुन लेना और भी मुश्किल हो जाता है.

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जब आपका साथी सबके बीच आपकी आलोचना करे

१. सीमाएं निश्चित करें. ये बहुत ज़रूरी है की आप और आपके साथी के बीच खुल कर बातचीत हो. आप दोनों एक दुसरे को बताएं और वादा करें की आप दूसरों के सामने आपसी आलोचनाओं से दूर ही रहेंगे. ऐसा समझौता तब ही हो सकता है जब दोनों ही, यानी शिकायत करने और जिसकी आलोचना हो रही है, इस बात को समझे और इस वायदे का मान रखें.

जब आपका साथी सबके बीच आपकी आलोचना करे
ऐसे मौकों पर तुरंत प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं है

२. ऐसे मौकों पर तुरंत प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं है. अगर आपका साथी आपकी आलोचना कर रहा है तो उस समय ज़रूरी है की शांत रहे और संयम बनाये रखें.

३. सबसे ज़रूरी तो ये है की जब भी आप दोनों किसी सामाजिक ग्रुप में जाते हो या आपके घर मेहमान आते हैं, आप अपनी निजी समस्याओं को उनसे अलग ही रखें. सबके बीच अपनी शिकायतों का पुलिंदा खोल कर आप किसी का भी भला नहीं कर रहे और न ही किसी मुश्किल का हल ही ढूंढ रहे हो.

शांत रहे और संयम रखें

४. जब आप ऐसी परिस्तिथि में खुद को फंसा पाएं, तो कोशिश करें की आप कोई प्रतिक्रिया न दें. हो सके तो उस आलोचना को ध्यान से सुने, बाद में उस पर विचार करें और देखें की क्या आप अपने अंदर इससे कोई सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. तुरंत की शान्ति के लिए सलाह है की उस माहौल से कुछ देर के लिए अलग हो जाएं और एक गिलास पानी पी कर खुद को ठंडा करने की कोशिश करें.

शांत रहे और संयम रखें
जब आप ऐसी परिस्तिथि में खुद को फंसा पाएं, तो कोशिश करें की आप कोई प्रतिक्रिया न दें

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५. आप भी उस पल को अपने अंदर और मत पनपने दो. जितनी जल्दी हो सके, उसे अपने मन और सिस्टम से निकाल बाहर करो.

६. अपने साथी को अपनी मनोदशा बताएं. आप चाहें तो सभी बातों की एक लिस्ट बना लें. क्या वो आपको बहुत टोकते हैं? क्या उनका लहज़ा दुःख देने वाला होता है? क्या वो आपको बुरी तरह से बोलते हैं? आपके मन में जो भी है, वो अपने साथी को खुलकर बताएं और आपकी आपत्ति का कारण भी ज़रूर समझाएं.

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विश्वास दिलाएं की आपको उनकी चिंता है

७. एक दुसरे के बीच सांकेतिक भाषा का प्रयोग करें. जब भी आपका साथी सीमा का उलंघन करने लगे तो उसे संकेत दे कर आगाह कर दें.

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८. अगर कभी आपको लगे की आपको भी जवाब देना है किसी आलोचना का, तो अपनी बोली, लहज़े, और शब्दों का प्रयोग ध्यान से करें.

९. एक दुसरे के बीच इस बात को अच्छी तरह समझ और समझा लें की आप दोनों में से कोई भी कभी किसी से तुलना नहीं करेगा. अधिकतर रिश्तों में कड़वाहट इन्ही तुलनाओं के कारण ही होती है.

“आलोचना तो कोई भी मुर्ख कर सकता है मगर बहुत ठहराव और सहनशक्ति ही किसी व्यक्ति को समझदार और माफ़ करने वाला बनाती है.” डेल कार्नेगी

हर आलोचना नकारात्मक हो, ये ज़रूरी नहीं है. अपने अहम् को अपने बेहतरी के रास्ते में ना आने दें. आपको ये समझना होगा की कौन सी बात आपको बेहतर बना सकती है और कौन सी बात सिर्फ आपकी खिल्ली उड़ाने के लिए है. किस बात को कितनी अहमियत देनी है, ये समझ आपके लिए बहुत ज़रूरी है.

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