जब उस बच्ची ने मुझे तलाक के बारे में समझाया

Children deal with difficult situations easily. This child taught me something about divorce

मैं सोनू को अपनी बाल्टी और फावड़ा ले कर बालू के ढेर में खेलते हुए देखती हूँ. मैं उसकी तरफ कदम बढ़ाती हूँ फिर कुछ सोच कर रुक जाती हूँ.

पिछले काफी दिनों से पार्क में सभी माओं और आयाओं के बीच बस सोनू के माता पिता के बीच हुए गंदे तलाक की ही बातें हो रही थी. किसने क्या कहा, किसने गुलदस्ता फेंका, किसने पहले वकील से सलाह ली वगैरह वगैरह. आस पास की महिलाओं को हर बात की तह तक जाना था और मुझे आशंका थी की इनमे से कुछ बातें तो उनकी मनगढंत भी थी.

जब सोनू को, इन सारी बातों से परे, मुस्कुराते हुए अपने रेत का घरोंदा बनाते देखती हूँ, तो मेरा मन टूट जाता है.

ये भी पढ़े: मैं अपने पिता की देखभाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकती क्योंकि मैं शादीशुदा हूँ?

सोनू साढ़े चार साल की बच्ची है और मैंने आज तक उससे ज़्यादा खुशमिज़ाज़ बच्ची नहीं देखि है. मैं पहली बार उससे छह महीने पहले मिली थी जब मैं भी अपने बेटे को पार्क में लाने लगी थी. वो उन बच्चों में से है जो मानो हर जगह को ही अपना बना लेते है और अपने दोस्ताना रवैये से हर किसी का मन मोह लेते हैं.

girl playing

“आंटी” सोनू ने मुझे जब देखा तो हाथ हिलाते हुए भागती हुई मेरे पास आ गई. वो मुझे अपने घरोंदा दिखाना चाहती है. वो रेत का घरोंदा टेढ़ामेढ़ा सा है, एक तरफ बिलकुल झुका हुआ, और वो कभी भी टूट सकता है, मगर अभी तो वो शान से खड़ा है. शायद कोई जादू ही है जिसने अब तक उसे गिरने नहीं दिया. बिलकुल सोनू जैसे. सोनू के ठीक पीछे उसकी आया बैठी है, अकेले और शांत। आज वो बाकी आयाओं के साथ नहीं बैठी है. वो करीब चालीस वर्षीया है और वो भी हमेशा मुस्कुराती हुई ही दिखती है. आज वो अपनी सहेलियों के साथ क्यों नहीं बैठी है? इन अफवाहों के कारण?

ये भी पढ़े: हम दम्पति तो नहीं है, मगर माता पिता अब भी हैं

मैंने हमेशा सोनू को पार्क में आया के साथ ही आते हुए देखा है और हमेशा आशा की थी की जब कभी सोनू के माता पिता से मिलूंगी, उनसे ज़रूर कहूंगी की उन्होंने अपनी बच्ची को बहुत अच्छी परवरिश दी है. मगर ये सब सुन कर तो मुझे अब उन से मिलने के आसार कम ही लगते हैं.

आज सोनू रोज़ से कहीं ज़्यादा खुश दिख रही है. उसके पास मुझे बताने को एक बहुत ही अच्छी खबर है, वो मुझे कहती है. उसके डैड ने एक नया घर लिए है. मैं उसे शुभकामनाएं देती हूँ और पूछती हूँ की क्या वो भी वहां जा रही है.

“बस शनिवार और रविवार को मैं डैड के नए घर में जाऊँगी. बाकी के दिन मैं और मम्मा पुराने वाले घर में रहेंगे,” वो मुझे खुश हो कर बताती है.

वो अपने डैड के घर के बारे में बहुत ही उत्साहित है. उस घर में डैड के जिम के लिए बहुत जगह है और वहां उसका अपना एक कमरा है जिसकी थीम राजकुमारी एल्सा है. मम्मा के लिए कोई रूम नहीं है, वो मुझे फुसफुसा कर कहती है क्योंकि आजकल वो शैतान हो गई हैं और अपनी “बाहर वाली आवाज़” घर में इस्तेमाल करती हैं.

divorced parents

ये भी पढ़े: आपका शोषण करने वाला पति कभी नहीं बदलेगा

मैं चुपचाप सब सुनती हूँ.

वो ख़ुशी से कूदती फांदती मुझे बताती है की थोड़ी ही देर में एक बड़ा सा ट्रक आने वाला है. उसके मम्मा और डैड ने उसे बताया है की वो कितनी खुशकिस्मत है की उसके दो दो घर होंगे और दोनों घरों में अलग अलग खिलोने. अब उसके डैड उसके साथ रोज़ खाना नहीं खायेगे और उसे स्कूल छोड़ने भी नहीं जायेंगे मगर इसका मतलब ये नहीं की अब वो सोनू के दोस्त नहीं है, ऐसा उसकी मम्मा ने उसे बताया है.

ये तो बिलकुल सही बात है, मैं भी उससे कहती हूँ.

फिर वो बताने लगती है की शुरू शुरू में वो थोड़ी उदास थी क्योंकि अब डैड रात को उसे कहानी सुनाने के लिए नहीं रहेंगे. “मगर फिर डैड ने मुझे एक सीक्रेट बताया. उन्हें जादू आता है तो रोज़ रात को जादू से मम्मा के फ़ोन में मेरे लिए कहानी भेज देंगे और उसे हमेशा की तरह हर रात को उनकी कहानी सुनने को मिलेगी.”

“ये तो बहुत ही शानदार बात है,” मैं भी अपनी आवाज़ में कुछ उत्साह भर कर उससे कहती हूँ.

“हैं न? मगर आप किसी को मत बताना की मैंने आपको ये सब बताया है. ठीक है न? उसने अपनी बड़ी बड़ी भूरी आँखें मुझ पर टिका कर मुझसे कहा. मैं उसे वायदा करती हूँ की मैं ये सब किसी को नहीं कहूँगी. मैं उसे किसी तरह से तसल्ली देना चाहती हूँ मगर मेरे पास कुछ भी कहने को शब्द ही नहीं हैं.

“घर चलने का समय हो गया सोनू,” आया की आवाज़ आती है. सोनू उसकी तरफ भागती है. मैं आया को देखकर हाथ हिलाती हूँ. वो हलके से मुस्कुराती है मानो आज दुनिया भर का बोझ उस अकेले के कन्धों पर ही हो.

“कल मिलेंगे आंटी,” सोनू अपनी चिड़िया सी आवाज़ में मुझे ज़ोर से कहती है और आया का हाँथ पकड़ जाने लगती है. मुझे अब भी उसकी आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही है.

ये भी पढ़े: खोए हुए प्यार की निशानियों से कैसे निपटें

“मुझे डैड को वो पेपर वाला प्लेन दिखाना है जो मैंने बनाया था. वो अभी घर पर होंगे?

आया ना में सर हिला देती है.

“कल?”

आया अब चुप है.

“परसों? उसके अगले दिन?” वो आखिरी बात मैंने सोनू के मुँह से सुनी।

girl walking with nanny

ये भी पढ़े: क्यों मुझे क्लोज़र नहीं मिला?

फिर धीरे धीरे वो छोटी सी बच्ची मेरी नज़रों से ओझल होने लगी.

आज उसे किसी के सांत्वना की ज़रुरत नहीं है. अक्सर ऐसे मौकों पर जब हम बड़े हर तरफ से हार कर अकेले एक खाई से में गिर जाते हैं, सोनू के पास अभी अपनी नासमझी और मासूमियत है जो उसे बचा रही है और उसकी ज़िन्दगी को जोड़ कर रख रही है. तभी तो अपने मम्मा और डैड के तलाक जैसी बात भी उसे परेशां नहीं उत्साहित कर रही है. मगर कल क्या होगा? या परसों? या फिर उसके बाद वाले दिन?

मुझे फिर सोनू का मुस्कुराता, चमकता चेहरा याद आने लगता है. उम्मीद करती हूँ की परसों के बाद वाले दिन भी वो ऐसी ही होगी.

तलाक मेरी मर्ज़ी नहीं, मजबूरी थी

२० साल लगे, मगर आखिर मैंने उसे ब्लॉक कर ही दिया

जब मैंने पति और उसकी प्रेमिका को मेरे बैडरूम में देखा

Spread the love

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.