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जब उसके पति ने उसे प्यार सीखाने के लिए छोड़ा

कभी कभी हमें बहुत ही कठिन निर्णय लेने पड़ते है. वो निर्णय ज़रूरी होते हैं अपने साथी को प्यार और आत्म प्यार सीखने के लिए…
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नवंबर की वो बहुत सुहानी सुबह थी. उस मौसम में योग काफी प्रचलित हो रहा था. मेरी दोस्त, जो एक लाइसेंस योग टीचर है, ऐसी क्लास समुद्र के किनारे लेती है. तो उस दिन, क्लास ख़त्म होने के बाद मैं पास के ही रेस्तोरां में अपना नाश्ता करने पहुंच गयी. मुझे वो योगा और समुद्र की लहरों का मेल बहुत पसंद था. समुद्र की लहरों की आवाज़ मुझसे इसलिए पसंद है क्योंकि मुझे लगता है की जैसे समुद्र मुझे कह रहा हो, “सब ठीक है! कैसी भी परिस्तिथि हो, अंत सब अच्छा ही होगा. और अगर सब अच्छा नहीं हो रहा तो ये अंत नहीं है.”

जब दोस्त ने दिखाया की प्यार सच में झुकता नहीं

मज़ेदार बात ये है की मेरी इस दोस्त ने बहुत बार मेरे सामने इस बात का प्रमाण दिया है की अंत में सब भला ही होता है.

मेरी इस मित्र को अपना नुक्सान करने की आदत है. एक योग टीचर और आत्म-चोट करने वाली एक ही इंसान हो, यह सुनकर थोड़ा अजीब लगता है. तो आपको सुनाती हूँ उस लड़की की कहानी जो स्वम को चोट पहुचानेवाली असुरक्षित लड़की से एक बेबाक योग टीचर कैसे बनी.

माया (नाम बदला गया है) ने जैसे ही यौवन में कदम रखा, वो एक मानसिक स्तिथि का शिकार होने लगी. मगर उसकी मानसिक स्तिथि का अंदाजा किसी को भी नहीं था. यहाँ तक की उसकी माँ बाप भी इस बात से बिलकुल बेखबर थे की वो सेल्फ-हार्म अर्थात आत्म-चोट की बीमारी से ग्रसित थी. प्यार पाना हो या किसी का अटेंशन, वो खुद को चोट पहुंचाती। अगर उसे लगता की उसके आसपास की स्तिथि बिगड़ रही है, वो खुद को उसका दोषी मानती और आत्म-चोट पहुंचाती. कहीं हल्का सा जले का निशाँ, कहीं कोई खरोंच , कही छोटा सा कट –जब कोई पूछता तो माया ऐसे ही टाल देती. बहुत संवेदनशील होने के कारण वो सभी चीज़ें बहुत गहराई से महसूस करती थी और आहत हो जाती थी. माया बड़ी तो ज़रूर हो गयी मगर वो इस अवस्था से निकल नहीं पायी.

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