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जब उसकी माँ का हस्तक्षेप कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया

उसकी सास उनके जीवन के हर पहलू में हस्तक्षेप करती थी लेकिन जब उन्होंने उनके यौन जीवन के बारे में बात करना शुरू कर दिया, तो वह सहन नहीं कर पाया
Mother in law with daughter

“अमन, दूसरा बच्चा तुम्हारी वैवाहिक जीवन की हर वर्तमान समस्या को हल कर देगा। रात में अपना समय मत बर्बाद करो और अगर स्वरूप गर्भधारण नहीं करती है, तो तुम्हें समाधान के लिए गायनोकोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।” यह हमारे विवाहित जीवन में आखरी झठका था। मैं उस दिन डायनिंग टेबल से चला गया और मैंने अपनी पत्नी स्वरूप को कहा कि मैं अब कभी भी उसकी माँ के साथ खाना नहीं खाउंगा।

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शुरूआत में यह ठीक था

“हमारी शादी में मेरी सास की बहुत बड़ी भूमिका थी; बल्कि मेरी पत्नी पर उनका बहुत बड़ा प्रभाव था। शादी के बाद शुरूआत में जब मेरी पत्नी अपनी माँ से व्यंजन और घरेलू उपचार के बारे में पूछती थी, तो यह सब सीमा के भीतर था और मुझे इससे कोई समस्या नहीं थी। स्वरूप सिर्फ अपनी माँ की विधि से ही व्यंजन पकाती थी और उसकी माँ ही हमारा हर दिन का मैन्यू तय करती थी। कुछ महीने बीतने के बाद, हस्तक्षेप रसोई से बढ़कर हमारे ड्राइंग रूम तक आ पहुंचा। फिर स्वरूप की हर बातचीत इसी बात के साथ शुरू होती थी कि ‘मम्मी ने ये कहा, मम्मी ने कहा कि यह ऐसे किया जाता है, मम्मी चाहती है कि हम वहां चले जाएं।’ मुझे वास्तव में मेरे लिविंग रूप में मेरी सास की उपस्थिति महसूस होने लगी।”
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“स्वरूप की गर्भावस्था के दौरान, उसकी माँ हमारे साथ रहने आ गई, उन्होंने हमारे बेडरूम में प्रवेश कर लिया और तब से ही वह हमारे विवाह में दूसरी महिला हैं। अपनी बेटी और पोती की देखभाल से शुरू करते हुए उसकी माँ हमारी हर बातचीत का हिस्सा बन गई। मैं वास्तव में बिन बुलाए हस्तक्षेप से परेशान हो चुका था। जब भी मैं स्वरूप के सामने यह विषय उठाता था, तो वह कहती थी कि मेरी माँ भी हस्तक्षेप करती है और डॉमिनेटिंग है। हालांकि मेरी माँ अमेरिका में रहती है और भारत आने पर भी यदा-कदा ही हमारे साथ रहती है।”

हम कभी अकेले नहीं थे

“उसकी माँ सभी फिल्मों और डिनर के लिए हमारे साथ आने लगी। मानवीय आधार पर शुरूआत में मुझे इससे कोई समस्या नहीं थी; और फिर यह उस स्थिति तक आ पहुंचा जब स्वरूप अपनी माँ को हर समय अपने साथ रखना चाहती थी। और उसकी माँ भी यह सुनिश्चित कर रही थी कि वह हर समय उपस्थित रहे। उन्होंने हमारी रसोई, किराने और प्रोविज़न का प्रभार ले लिया। वह आकर मुझसे सीधा हमारे मासिक खर्च के बारे में पूछती थी और हिसाब रखती थी। यहां तक की नौकरानियों को भी दो मालकिनों का हुकुम बजाने में दिक्कत थी। कई नौकरानियां चली गईं, और आखिर में यह निश्चित किया गया कि सिर्फ उसकी माँ ही निर्देश देंगी। स्वरूप एक आलसी पत्नी और माँ बन गई क्योंकि उसकी माँ ही पूरा घर प्रब्रंधित कर रही थी।”

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स्वरूप एक आलसी पत्नी और माँ बन गई क्योंकि उसकी माँ ही पूरा घर प्रबंधित कर रही थी

“हमारे अपार्टमेंट में कोई कपल टुगेदरनेस नहीं थी और मेरे घर पर मेरी स्वयं की कोई स्पेस नहीं थी। हमारी शादी की सालगिरह पर जब मैंने एक याट में कैंडल लाइट डिनर बुक किया था, मैंने देखा कि उसकी माँ भी हमारे साथ आने के लिए तैयार हुई थी। फिर मुझे वेन्यू को एक रेस्त्रां में बदलना पड़ा।”

“जब हमारी बेटी छह महीने की हुई, तब मैंने सोचा कि मेरी सास घर वापस लौट जाएगी। लेकिन वह रूकी रहीं। उसके बाद मैंने नोटिस किया की उसकी माँ हमारी हर निजी बातचीत में भी हस्तक्षेप करती थी। जब भी मैं लिविंग रूम या डायनिंग रूम में स्वरूप से बात करता था, उसकी माँ के भी कुछ सुझाव होते थे और वह भी हमारी बात में जुड़ जाती थी। मैंने कई बार यह विषय स्वरूप के सामने उठाया, लेकिन उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगी। निजता बनाए रखने के लिए मैंने घर पर चर्चा करना बंद कर दिया और ऑफिस से वॉट्स एैप पर स्वरूप से बात करना शुरू कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे उसके रिप्लाए आने लगे, मम्मी की राय यह है, मम्मी का यह कहना है, मैं मम्मी से पूछती हूँ।”

वह बहुत आगे बढ़ गईं

“एक दिन मैंने स्वरूप से पूछा कि अगर मेरी माँ इतना हस्तक्षेप कर रही होती तो क्या तुमने बरदाश्त किया होता। तो उसने जवाब दिया कि भारतीय परिवारों में माता-पिता की सलाह और सहयोग एक आर्शिवाद के समान होता है। अंत में मैं चुप हो गया और तभी उसकी माँ आई और उन्होंने हमारी प्रजनन क्षमता की जांच के लिए गायनोकोलॉजिस्ट के पास जाने की सलाह दे डाली। मुझे पता नहीं कि मेरी पत्नी ने अपनी माँ से हमारे निजी जीवन के बारे में क्या बात की, लेकिन उनके दिमाग में यह बात आई कैसे कि वह सीधे मेरे पास आए और दूसरे बच्चे के बारे में मुझसे बात करे? मैंने अपनी पत्नी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि उसकी माँ घर वापस लौट जाए क्योंकि मुझे मेरे ही घर में घुटन महसूस होती है।”

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सिर्फ एक बहू की कहानी ही दुखभरी नहीं होती

भारत में नियमित सास-बहू गाथा सुनना आम है और उनमें से अधिकांश एक बहू की तरफ से होती है जिसकी सास हस्तक्षेप करती है। इस रिश्ते के टूटने और इसे सुधारने के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। यह किस्सा एक दामाद के बारे में है जिसे अपनी सास से परेशानी है और वह उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करती है। यह तब और मुश्किल हो जाता है जब सिर्फ एक साथी इसका भार महसूस करता है और दूसरा साथी हस्तक्षेप से खुश होता है। कई बार पीड़ित साथी अनजान साथी को यह बताने में असमर्थ होता है।

शुरूआत में जोड़े का सहयोग करने के लिए माता-पिता की भगीदारी सहन करने योग्य है, लेकिन पूर्ण हस्तक्षेप सहन योग्य नहीं है। दोनों पक्षों के माता-पिता को आवश्यकता अनुसार बच्चों की शादी का हिस्सा होना चाहिए। नए जोड़े को अपने वैवाहिक जीवन को अपनी इच्छा अनुसार बढ़ाने के लिए अपना स्पेस होना चाहिए। किसी भी माता-पिता को आवश्यकता से ज़्यादा आगे नहीं बढ़ना चाहिए, भले ही वह किसी भी पक्ष के हों।

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भागीदारी परवाह है, जबकि हस्तक्षेप नियंत्रण है।

भागीदारी परवाह है, जबकि हस्तक्षेप नियंत्रण है। एक जोड़े के जीवन में ससुराल वालों की भागीदारी वांछनीय है, लेकिन जब यह अपनी सीमा पार कर के हस्तक्षेप बन जाती है, तो एक सीमा बनाए रखना ज़रूरी है। याद रखिए कि यह संघर्ष प्यार पर आधारित है। लेकिन जब आपके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है और आपको अपमानित किया जा रहा है, तो रेखा खींच दीजिए।

सीमा कैसे बनाएं

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1. स्थिति पर अधिक तर्कसंगत नज़रिये से देखें भवनात्मक नज़रिये से नहीं।
2. बड़ों की राय ज़रूर लें लेकिन वैवाहिक निर्णय जोड़े द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
3. बड़ों को उचित सम्मान देकर पार्याप्त रूप से उनकी खुशामद करें, ताकि उन्हें सम्मान बनाए रखने के लिए सीमा पार करने की ज़रूरत  महसूस ना हो।
4. ससुराल वालों के हमले का सामना करने के लिए साझेदारी पर्याप्त रूप से मजबूत होनी चाहिए।
5. जब माता-पिता हस्तक्षेप करे तो साथी से चर्चा करें, लेकिन उस व्यक्ति के व्यवहार के बारे में ही बात करें।
6. चरित्र आकलन के साथ व्यक्तिगत ना बने।
7. व्यक्तिगत रूप से दोषारोपण किए बगैर सास/ससुर के सामने स्थिति को रखें।
8. ससुराल वालों के साथ झगड़ा ना करें। बस अपनी बात रखें।
9. प्रत्येक घटना को संबोधित करें। ना उत्तेजित करें और ना स्वयं उत्तेजित हो।
10. दृढ रहो और उस संबंध का दिखावा मत करो जो है ही नहीं।
11. आलोचना को गंभीरता से लो लेकिन व्यक्तिगत रूप से नहीं।
12. अगर हस्तक्षेप विषाक्त हो जाए तो आपको थोड़े समय के लिए उनसे दूरी बनानी होगी।
हस्तक्षेप माता-पिता के दोनों पक्षों से आ सकता है, लेकिन भले ही किसी भी पक्ष ने सीमा पार की हो, यह विवाह की पवित्रता पर हमला है और यह विवाह के लिए लीव एंड क्लीव आदेश का उल्लंघन करता है। माता पिता का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन इससे शादी का सद्भाव खत्म नहीं होना चाहिए।
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