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जब उसने एक वैश्या से शादी का फैसला लिया

कहते है न प्यार अँधा होता है. वो अंधे के साथ साथ बहुत ताकतवर भी होता है और सहनशील भी...
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(पहचान छुपाने के लिए नाम बदले गए हैं)

“मैं एक वैश्या हूँ,” उसने पथराई आँखों से कहा.

“मुझे मालूम है,” रोहित ने उसे गौर से देखते हुए जवाब दिया.

धनु उससे आँखें नहीं मिला रही थी. धनु की उम्र २० के आसपास होगी और वो आंध्र प्रदेश की थी.

रोहित और धनु गोवा के बैना बीच पर २००४ में मिले थे. बैना बीच वैश्यावृति के लिए काफी बदनाम था और रोहित उसका एक क्लाइंट था जब वो पहली बार मिले थे. रोहित उम्र में उससे छोटा था और किसी से भी शारीरिक सम्बन्ध बनाने का ये उसका पहला मौका था. उनकी उस पहली मुलाकात में तो रोहित को एक फेलियर जैसा महसूस हो रहा था क्योंकि उसे न अपन पुरुषत्व की समझ थी न कोई जानकारी.

वो इतना आहात हो गया था की एक हफ्ते बाद खुद को साबित करने वो फिर उसके पास पहुंच गया.

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उसे प्यार हो गया

जब रोहित उसके पास दोबारा गया, तो उसे पूरी उम्मीद थी की धनु उसकी पहली मुलाकात के बारे में उसका मज़ाक ज़रूर उड़ाएगी. मगर उसने उस दिन का कोई ज़िक्र तक नहीं किया. बल्कि वो दोनों ही अपनी मातृभाषा तेलगु में बातें करने लगे और उस दिन उसने अपने बाकी सारे क्लाइंट को मन कर दिया. वो दिन उसके उस एक क्लाइंट के लिए ही था.

रोहित को वो पसंद करने लगी थी शायद.

दोनों उस पूरे महीने बार बार मिलते रहे. दोनों के बीच एक गहरा मगर खामोश रिश्ते के बीज पड़ने शुरू हो गए थे. उस इलाके की लड़कियों को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी. मगर वो चुपके से उसे बाइक कर बैठा कर बाहर ले गया. उसने उसे पूरा गोवा दिखाया. दोनों ने साथ साथ तेलगु फिल्में देखि, समुद्र के किनारे मजोरदा बीच पर हाथ में हाथ डाल कर खूब घूमे और फिर जापानी बाग़ में वो एक दुसरे में लीन हो गए.

जब थोड़े दिनों के लिए उसे कुछ दिन एक दुसरे स्टेशन के लिए जाना पड़ा, तब रोहित को एहसास हुआ की वो शायद उससे प्यार करने लगा था. वापस आते ही सबसे पहले वो उससे मिलने पंहुचा. पेमेंट करने के बाद जब वो उसके पास बैठा तो उसने अपने दिल की बात कह दी, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुमसे शादी करना चाहता हूँ.”

वैश्याएं शादी नहीं करतीं

उसके इस इज़हार से धनु बिलकुल शांत हो गई. उसने कुछ नहीं कहा.

“मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ,” उसने कहा. “तुम जब कहोगी, हम तब शादी कर लेंगे.”

उसने एक नाउम्मीदगी भरी नज़र से उसे देखा और मुस्कुराई. उसकी आँखें भावहीन थी, और उसकी शक्ल से जैसे सारा खून ही सूख गया था. उसने सिसकियों के बीच बड़ी मुश्किल से बस इतना कहा, “नहीं.. नहीं… मैं शादी नहीं कर सकती.”

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“ऐसा तुमसे किसने कहा?”

“मैं एक वैशया हूँ और हमारी शादी नहीं होती,” बड़ी मुश्किल से उसने अपने नज़रें ऊपर उठाई और आँखों में आँखें डाल कर कहा.

“हम शादी नहीं कर सकते.”

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अब तक उसका गुस्सा सातवे आसमान तक पहुंच चूका था. उसने आनन् फानन अपनी कमीज शुरू की.

“तुम जा रहे हो?” धनु ने धीरे से पुछा.

“तुम अब भी एक बच्चे हो,” उसने रोहित के कंधे पर पीछे से हाथ रखा. “एक दिन तुम समझ जाओगे की मैं गलत नहीं कह रही हूँ.”

“मैं कोई बच्चा नहीं हूँ. इतना बड़ा और समझदार तो हूँ ही की अपनी ज़िन्दगी के फैसले ले सकूँ। अगर तुम मेरे साथ चलने को तैयार हो तो अभी मेरे साथ चलो,” उसने गुस्से में कांपती आवाज़ में कहा.

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“एक दिन तुम मेरा ये फैसला समझोगे और शायद मुझे धन्यवाद भी दो की मैंने तुम्हे रिजेक्ट कर दिया,” उसने कहा.

रोहित चुपचाप कमरे से बाहर निकल गया.

हाँ या ना?

रोहित ने अपने कुछ खास दोस्तों को अपनी शादी के फैसले की बात बताई. सभी ने रोहित को कहा की वो एक गलती करने जा रहा है और उसे उसके बारे में भूल जाना चाहिए. “दुनिया में ऐसी लाखों लड़कियां है, तुम किस किस को बचाओगे?” उन्होंने तर्क दिया.

“बाकियों का तो पता नहीं, मगर मैं एक को तो ज़रूर बचा सकता हूँ,” रोहित ने उन्हें कहा तो ज़रूर मगर आवाज़ में अब वो ज़ोर नहीं दिख रहा था. कहीं न कहीं उसका मन दोस्तों की सलाह पर गौर कर रहा था. मन का एक हिस्सा उससे कह भी रहा था, “कोशिश करोगे तो तुम उसे भूल भी सकते हों.”

इसी बीच उसे एक महीने के लिए जहाज़ पर जाना था. शांत समुद्र, उफनती लहरों और असीमित समुद्र में उसने अपनी स्तिथि को और अच्छे से समझा। एक महीने बाद जब वो वापस आया तो प्रकृति के साथ बिताये उस एक महीने ने उसके मन के सारे प्रश्नों का हल दे दिया था.

वो उससे शादी करेगा.

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शायद देर हो गई थी

रोहित मेरा बहुत अच्छा दोस्त रहा है. समुद्र से वापस आकर वो बिना हमें अपना फैसला बताये उससे मिलने चला गया. ये बात और है की जब वो वहां पंहुचा तो सिर्फ खाली ज़मीन ही मिली उसके स्वागत में. कुछ दिनों पहले ही गोवा को ऐसे वैश्यावृति या रेड लाइट इलाकों की “सफाई” की गई थी और उन्हें वहां से हटा दिया गया था. कोई भी वहां रहने वालों का पता ठिकाना नहीं जानता था. जानता भी कैसे, उन लोगों का कोई नाम या शक्ल थोड़े ही थी, समाज के लिए.

हताश रोहित बहुत भारी मन से वापस घर चला गया.

उस दिन से रोहित ने खुद को शराब के नशे में झोंक दिया. अगले महीने उसका ट्रांसफर विज़ाग कर दिया गया. वर्ष २०१४ में मैं रोहित से फिर से मिला. हालांकि अब उसकी शादी हो चुकी थी और उसके दो बच्चे भी थे, वो अब भी धनु को याद करता था. हमें जैसे ही थोड़ा समय अकेले बैठने का मिला, उसने तुरंत उसकी बातें शुरू कर दी. मुझे उसकी आँखों में दर्द साफ़ दिख रहा था मगर वो बार बार अपने बेवकूफाना चुटकुलों से उन्हें छुपाने का भरकस प्रयास कर रहा था.

उस दिन रोहित को देख कर मुझे एहसास हुआ की कभी कभी प्यार इतना गहरा होता है की समय की गहरी से गहरी मार भी उसे गिराने में असमर्थ होती है.

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