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जब उसने वैश्या बनने से इनकार कर दिया तो उसके ससुराल वालों ने उसे जला दिया

अपने शरीर को पैसों के लिए बेचने से इनकार करने पर ससुराल वालों द्वारा जला कर मार दी गई महिला का हालिया मामला टाला जा सकता था अगर उसे उपलब्ध कानूनों से अवगत करवाया गया होता तो।
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उसकी अरेंज मैरिज कैसे एक दुःस्वप्न में बदल गई

छह महीने पहले, सुतापा बिस्वास (बदला हुआ नाम) को पश्चिमी मिदनापुर के एक गांव पोरल्डा में उसका पति गोद में उठाकर घर के भीतर लाया था। जब वह अरेंज मैरिज में गिरी के साथ फेरे लेने के लिए सहमत हुई थी, तब अपनी आंखों में सपने लिए, सुतापा ने एक खुशहाल जीवन की उम्मीद की थी। पहले दो महीनों में, जीवन उसके लिए अपने सपने जैसा बिल्कुल नहीं था, और उसकी सास ने दूसरे पुरूषों के साथ सोने के लिए उसपर दबाव डालना शुरू कर दिया। इस सुझाव से चकित होकर, उसने समझौता करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह अंततः शरीर के व्यापार में शामिल हो गई। और ज़्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह था कि उसका पति पूरे प्रकरण में एक मूक दर्शक बना हुआ था।

जब रिश्ता घातक हो गया

सुतापा अपने शरीर को बेचने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए अपने ससुराल वालों के साथ उसके निरंतर झगड़े होने लगे, लेकिन उनमें से एक झगड़े ने घातक मोड़ ले लिया जब उसकी सास ने उसपर केरोसीन डाल कर आग लगा दी। जब वे उसे जलता हुआ देख रहे थे, उसकी चीखों की वजह से पड़ोसी उसे बचाने के लिए आ गए। हालांकि, जब तक उसे सबसे नज़दीकी अस्पताल, मिदनापुर अस्पताल ले जाया गया, वह अपनी चोटों के कारण मृत्यु को प्राप्त हो चुकी थी। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, सुतापा 80 प्रतिशत जल चुकी थी।

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स्थानीय लोग जानते थे कि परिवार नियमित रूप से इस तरह के झगड़े करता था, लेकिन उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वे अपनी सास द्वारा संचालित सेक्स रैकेट का हिस्सा बनने से इन्कार करने के लिए सुतापा को जला देंगे।

यह देखते हुए कि भारत का सामाजिक बंधन एक प्रमुख परिवर्तन से गुज़र रहा है, जहां कई बार मूल्यों की तुलना में धन अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है, महिलाओं को और ज़्यादा सचेत हो जाना चाहिए। वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं और बच्चों को समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग के रूप में पहचाना जाता है।

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अपराध नए नहीं हैं

पत्नी की स्वैपिंग, अपनी पत्नी को किसी दूसरे पुरूष के साथ संबंध बनाने पर मजबूर करना कोई नई चीज़ नहीं है। यह अतीत में हुआ है और ऐसा होना जारी रहेगा। लेकिन महिलाओं के तौर पर, हमें अपने अधिकारों को समझने, उनका प्रयोग करने और पीड़ित बने बगैर मुश्किल परिस्थितियों को संभालने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित होने की आवश्यकता है।

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हमारे देश की सबसे बड़ी कमियों में से एक है कि महिलाओं के बीच कानूनी अधिकार और मानवाधिकार जागरूकता अभी भी बहुत खराब स्थिति में है। विवाहित महिलाएं अभी भी यह महसूस करती हैं कि वे अपने ससुराल वालों की निजी संपत्ति से ज़्यादा कुछ नहीं हैं और इसलिए अक्सर वे उन पूर्वाग्रहों को स्वीकार कर लेती हैं और उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है।

महिलाओं के माइंड सेट को बदलें

कोलकाता स्थित मनोवैज्ञानिक पारोमिता मित्रा भौमिक कहती हैं, ‘‘बचपन से ही अपने पतियों और बुजु़र्गों के प्रति आज्ञाकारी होने की शिक्षा मिलने के कारण, ज़्यादातर महिलाएं इस तरह की स्थिति में खुद को पाने पर आवाज़ उठाने में असफल होती हैं। अक्सर, दैनिक आधार पर अब्यूस किए जाने पर भी परिणामों के डर से उन्हें चुप रहना पड़ता है, जब तक की चीज़ें उनके हाथ से बाहर नहीं निकल जातीं।”

ऐसी स्थिति का सामना किए जाने पर, जब किसी को वैश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधि में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा हो, उस मामले में, महिला को उस व्यक्ति से मदद मांगनी चाहिए थी जिसपर उसे शुरू से ही भरोसा हो, या अपने माता-पिता से परामर्श करके अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ एफआईआर लिखवाने के लिए किसी महिला संगठन या अपने दोस्तों की मदद मांगनी चाहिए थी। आज भी, कई महिलाओं को अपने पति या ससुराल वालों द्वारा वेश्यावृत्ति करने के लिए मजबूर किया जाता है।

हालांकि, इस तरह की स्थिति में महिला को ज़रूरत है कि वह अपने आत्मविश्वास को दुबारा कायम करे और उत्पीड़कों के आगे हारे नहीं। सबसे पहली चीज़ जो करने की ज़रूरत है वह है अपने माता-पिता और दोस्तों का विश्वास दुबारा हासिल करना। उन्हें सबकुछ बताएं; अपने पति या ससुराल वालों द्वारा शोषित किए जाने के लिए शर्मिंदा ना हों। क्योंकि यह उनकी सामूहिक शर्म की बात है आपकी नहीं। एक ऐसा पुरूष जो सही बात के लिए आवाज़ नहीं उठा सकता या मूक दर्शक बनकर अपनी पत्नी को वित्तीय लाभ के लिए अन्य पुरूषों के साथ सोने पर मजबूर होता हुआ देखता है, वह इस योग्य नहीं है कि उसके साथ आप अपना पूरा जीवन बिताएं।

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पीड़ितों की मदद के लिए कानून हैं

अगर कभी आपको ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो बहादुर बनें, मना करें और घर छोड़ कर जाने का साहस करें या सिर्फ अपने माता-पिता को कॉल करके अपने ससुराल वालों के गंदे खेल का खुलासा करें। अगर आप डरा हुआ महसूस करते हैं, तो चिल्लाएं, हंगामा खड़ा करें, अपने घर से भाग जाएं और अपने पड़ोसियों को बताएं कि आपको किस चीज़ का सामना करना पड़ा है। जब आपके आसपास लोग आ जाएं, तो आपके माता-पिता या दोस्तों को कॉल करके उनसे कहें कि वे वहां आएं और सामुहिक रूप से पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाएं और न्याय पाने में आपकी सहायता करने के लिए एक एनजीओ से संपर्क करें।

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भारतीय न्यायिक प्रणाली में वेश्यावृत्ति में मजबूर महिलाओं की रक्षा करने के लिए एक नहीं बल्कि तीन कानून हैं। सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्राफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट (1956), प्रिवेन्शन ऑफ इम्मोरल ट्राफिक एक्ट (1956) एवं इम्मोरल ट्राफिक (प्रिवेन्शन) एक्ट (1956) कानूनी रूप से वैश्यावृत्ति से लड़ने के लिए लगभग मजबूत प्रणाली प्रदान करते हैं। कट्टर अपराधियों द्वारा आयोजित संगठित सेक्स रैकेट के विपरीत, परिवार द्वारा संचालित मजबूरन सेक्स रैकेट के मामलों में महिलाओं के पुनर्वासित होने की संभावना ज़्यादा है। सिर्फ इतना करने की ज़रूरत है कि जिस महिला को अधीन बनाया जा रहा है या मजबूर किया जा रहा है, वह आवाज़ उठाए या ऐसे व्यक्ति को बताए जो उसे एनजीओ, पुलिस या कानूनी सहायता सेवा प्रदाता से संपर्क करने में मदद करे।

देश की महिलाओं की मदद के लिए भूमि का कानून तैयार किया गया है। आपको सिर्फ अपने आप में विश्वास रखना है और न्याय पाने की इच्छा रखना है। याद रखिए हिम्मत-ए-मर्दा, मदद-ए-खुदा। इसलिए, पीड़ित के लिए अपने आत्मविश्वास को बढ़ावा देना और ‘असहाय मनोविज्ञान’ से बाहर आना महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

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