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जोड़ों के बीच बिना शर्त प्यार की कहानियाँ

यहां कुछ कहानियाँ हैं जो आपके दिल को संवेदना से भर देंगी
couple in deep love

जोड़ों के बीच प्यार और संवेदना के अपनत्व भरे प्रयास आज की व्यक्तिगत दुनिया में दुर्लभ हो गए हैं। हालांकि आज भी कुछ गिने-चुने जोड़े हैं जो एक दूसरे से बिना शर्त प्यार करते हैं। ऐसी दुर्लभ कहानियाँ या तो आपके चेहरे पर आँसू लाती है या सुखद मुस्कान लाती हैं। यहां ऐसी कुछ कहानियाँ हैं जो आपके दिल को संवेदना से भर देंगी।

1. उसने उसे अपना पूरा वेतन दे दिया

शेरिनाज़ और ईशान का विवाह 6 साल पहले हुआ था। पिछले साल, अचानक ईशान की नौकरी चली गई क्योंकि उसकी कंपनी कर्मचारियों में कटौती कर रही थी। किसी तरह वह शेरिनाज़ को इस भयानक खबर के बारे में बताने का साहस इकट्ठा करने में कामयाब रहा। पहले तो शेरिनाज़ को लगा कि यह मज़ाक था लेकिन जल्द ही उसे अहसास हुआ कि ईशान तनाव में था और गंभीर था। ईशान उस दिन पूरी तरह से असहाय होकर घर लौटा था।

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वह चार महीनों तक बेरोज़गार था। शेरिनाज़ ने तय किया कि वह उसे अपना पूरा वेतन दे देगी। वह उसे इस तरह आर्थिक रूप से पीड़ा झेलते नहीं देख सकती थी। हर महीने, 4 महीनों तक, जब तक कि ईशान को नौकरी नहीं मिली, वह अपना पूरा वेतन ईशान के खाते में ट्रान्सफर कर देती थी। उसने खुद के लिए बिल्कुल पैसे नहीं रखे। उसने शॉपिंग, सोशलाइज़िंग और अपनी इच्छाओं और ज़रूरतों पर पैसा खर्च करना बंद कर दिया। ईशान को बेहतर महसूस करवाने के लिए और उस अवधि के दौरान दोनों को भावनात्मक और वित्तीय रूप से सहयोग देने के लिए उसने पूरी तरह से अपनी वित्तीय आज़ादी छोड़ दी।

woman giving man money
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2. जब उसे पता चला वह इचआईवी पॉज़िटिव था

अजय और वीणा डेटिंग कर रहे थे और कुछ हफ्ते बाद, उन्होंने इचआईवी टेस्ट करवाने का फैसला लिया। अफसोस की बात है, अजय इचआईवी पॉज़िटिव था। वे दोनों बिखर चुके थे और डरे हुए थे। अजय ने वीणा को कहा कि उसे छोड़ दे और किसी और को ढूंढ ले। जब तक वह भावनात्मक रूप से उसके साथ लिप्त हो चुकी थी और उसके बिना जीवन जीने की बात स्वीकार नहीं कर सकती थी। उसने ज़ोर दिया कि वह पहले की ही तरह रहेगी जैसे कि सबकुछ सामान्य हो। वे साथ में कई डॉक्टरों के पास गए और जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि यह एक ऐसी बिमारी है जिसे लगातार दवा के साथ प्रबंधित किया जा सकता है।

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वीणा ने अपना मन बना लिया कि वह इचआईवी जैसी छोटी सी चीज़ की वजह से अजय को नहीं छोड़ेगी। आज वे विवाहित हैं और एक खुशहाल जीवन जी रहे हैं। हालांकि वे जटिलताओं के कारण अपना जैविक बच्चा पैदा नहीं करना चाहते हैं, वे एक बच्ची को गोद लेने की योजना बना रहे हैं। एक डॉक्टर ने वीणा से कहा, ‘‘तुमने उसके साथ रहने का फैसला किया है, तुम अद्भुत हो। तुम जानती हो एक बार पॉज़िटिव होने के बाद आप नेगेटिव नहीं हो सकते हो? और फिर भी तुम….’’ उसने डॉक्टर की बात काटकर कहा, अगर उसे अजय को उसकी अपूर्णताओं के लिए छोड़ना भी पड़ता तब भी वह इचआईवी पॉज़िटिव होने की वजह से ऐसा बिल्कुल नहीं करती।

3. ललिता लकवाग्रस्त है और अशोक 20 साल से उसकी देखभाल कर रहा है

ललिता को अपने 40 के दशक की शुरूआत में गंभीर लकवे का दौरा पड़ा जिससे उसके शरीर का बायां भाग पूरी तरह से गैर-कार्यात्मक हो गया। उस समय उसके बच्चे सिर्फ 13 और 10 साल के थे और उसका पति पुणे में एक बड़ी मल्टीनेशनल सॉफ्टवेयर कंपनी में एवीपी के रूप में काम कर रहा था। उसके पति अशोक ने शादी की हर शपथ निभाई और हर चीज़ का ध्यान रखा। नौकरी, घर, बच्चों का स्कूल, ललिता की सेहत, उसने हर चीज़ की। आज उनके दोनों बच्चे विवाहित हैं और अमेरिका में रहते हैं और अशोक और ललिता, जो अब भी लकवाग्रस्त है, पुणे में अपनी हवेली में रहते हैं। एक दिन, हमारे घर में पूजा थी और हमने उन्हें आमंत्रित किया था। मैं यह देख कर दंग रह गया कि अशोक ने ललिता के लिए सबकुछ किया था। उसे कार से निकालने से लेकर, हमारे घर के दरवाज़े पर लाने तक, उसके जूते निकालने से लेकर उसके लिए खाना लाने और उसे खिलाने तक, अशोक ने सबकुछ किया। मुझे अहसास हुआ कि वह पिछले 20 वर्षों से यह कर रहा था। घर पर अशोक उसे नहाने, कपड़े पहनने, बाल बनाने में मदद करता है और वह यह सब बिना किसी शिकायत के करता है।

मैंने हमेशा अशोक के चेहरे पर बड़ी मुस्कान और ललिता की आँखों में गर्व और अथाह प्यार की भावना देखी है। ललिता वास्तव में भाग्यशाली है कि उसे एक ऐसा जीवनसाथी मिला है जो हर अच्छे बुरे समय में उसका साथ देना जारी रखता है।

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4. मानसी की दुर्घटना और गुंजन की इच्छाशक्ति

दिल्ली में मानसी के साथ एक दुर्घटना हो गई जिसने उसका दाहिना भाग पूरी तरह से अलग कर दिया। एक साल की अवधि में वह 26 सर्जरी से गुज़री। उसका चेहरा, हाथ, पैर और गर्दन सबकुछ विकृत हो गया था। कुछ डॉक्टरों ने तो हार भी मान ली। वह एक साल तक अस्पताल में रही जिसमें से 5 महीने आईसीयू में गुज़रे थे। उसका पति गुंजन, हमेशा उसके आसपास होता था। यह गुंजन की इच्छाशक्ति और सहारा ही था जिसने मानसी को दुर्घटना के कारण शारीरिक यातना से उबरने की ताकत दी। गुंजन ने मानसी को देश के सबसे अच्छे डॉक्टरों को दिखाया ताकि वे ठीक होने में उसकी मदद कर सके।

man taking care of a woman
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“सिर्फ गुंजन की वजह से ही मैं अवसाद में नहीं गई,’’ वह कहती है। उनके 10 और 8 साल की उम्र के दो बेटे भी हैं। आज, दुर्घटना के 3 साल और उसके बाद की सर्जरी के बाद, गुंजन मानसी को पहले से भी कहीं ज़्यादा प्यार करता है। उसने मानसी को एक ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन कार भी दे दी है ताकि वह शहर भर में ड्राइव कर सके।

प्यार कई बार हो सकता है, लेकिन सच्चा प्यार सिर्फ एक बार ही हो सकता है। यह सिर्फ सच्चा और बिना शर्त का प्यार ही है जो जीवन में ऐसी कठोर परिस्थितियों से निपटने के लिए जोड़े को साहस और ताकत देता है।

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