काश मैं जान पाता कि मेरी पत्नी ने दूसरे विवाहित पुरूष के लिए मुझे क्यों छोड़ दिया

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(जैसा दिपान्निता घोष बिस्वास को बताया गया)

पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदल दिए गए हैं

मैंने दूसरी बार नहीं सोचा – मैं जानता था कि मैं अनिका से शादी करना चाहता था और मैंने अपने परिवार को मनाया। हालांकि उसने अपने परिवार को मनाने में थोड़ा समय लिया, क्योंकि वे कुछ ज़्यादा ही रूढ़िवादी थे। मैं कहूंगा कि दूरी भी मदद नहीं कर रही थी – हम सिडनी में थे और हमारे परिवार कोलकाता में थे। वे जानते थे कि हम सहकर्मी थे लेकिन वे इस तथ्य से वाकिफ नहीं थे कि हम एक साल से ज़्यादा समय से साथ में रह रहे थे। हमारे सतत प्रयास रंग लाए और कुछ ही महीनों में हम कानूनी और सामाजिक तौर पर पति पत्नी बन चुके थे।

शादी बहुत बड़ा समारोह था लेकिन मेरे पास सिर्फ एक महीने की ही छुट्टी थी। अनिका का सिडनी वाला प्रोजेक्ट बहुत पहले खत्म हो चुका था – हमारी शादी से भी पहले -जिसका अर्थ था कि उसे कोलकाता में रहना होगा। हालांकि यह निपटने के लिए मुश्किल बाधा साबित हो रही थी लेकिन फिर, क्या हमारे पास दूसरा कोई रास्ता था? अभी तक तो नहीं। मुझे ऐयरपोर्ट वाला दृश्य याद है, जैसे ही मैं सिडनी के लिए निकला – यह बहुत फिल्मी था, आंसू और मौजूदा गतिरोध से बाहर निकलने के वादों के साथ।

Couple hugging at airport

मुझे क्या पता था कि हम पर क्या बीतने वाली थी, या शायद विशेष रूप से मुझ पर।

वास्तविक जीवन पर लौटना

कुछ ही दिनों में, हम अपनी दैनिक दिनचर्या की उथल-पुथल पर लौट आए। समय क्षेत्र के अंतर ने संचार की गुणवत्ता को प्रभावित किया लेकिन, मैं हमेशा स्काइप कॉल या त्वरित वॉइस चैट के लिए रास्ता निकाल लेता था। मुझे लगता था कि यह व्यस्त दिनचर्या और थकावट है जो उसकी आवाज़ को चौकस और अलगाव भरी बनाते थे। जब भी मैं उसे सिडनी में मेरे पास आने को कहता, वह दूर हो जाती थी और टालमटोल करती थी। मैं उसपर ज़्यादा ज़ोर नहीं देता था और वह कभी भी विषय नहीं उठाती थी। शुरू में अनिका बारी बारी से उसके और मेरे घर पर रहती थी। जल्द ही उसने मेरे परिवार से शायद पखवाड़े में एक बार मिलना शुरू कर दिया। मैंने सोचा उसके लिए खुद के घर पर रहना ज़्यादा सुविधाजनक था जो उसके ऑफिस से कुछ ही मिनटों की दूरी पर था।

जब मैंने उसे मेरे जन्मदिन के लिए सिडनी आने को कहा, तो वह इतनी निष्क्रिय प्रतीत हुई जैसे मैं उससे एक अहसान मांग रहा हूँ जो वह करना नहीं चाहती। मैंने अपने दिमाग में नोट बनाया कि जब मैं उसके साथ आमने सामने मिलूंगा तो मैं उससे एक स्वतंत्र चर्चा करूंगा। वह आई और उसका छोटा सा प्रवास घटनारहित था लेकिन मुझे लग रहा था कि कुछ गड़बड़ है।

हम चहलकदमी करने और ड्राइव के लिए बाहर गए, हमने साथ में खाना पकाया, खाना मंगवाया और वे सारी छोटी छोटी चीज़ें की जिसकी मुझे कमी महसूस होती थी, बल्कि एक जोड़े के तौर पर दोनों को कमी महसूस होती थी।

Frustated woman

कोई और है

जब मैंने अनिका से यहां पर रहने आने के बारे में बात की, तो उसने बिजली गिरा दी। ‘‘मुझे यहां रहने का कोई कारण नज़र नहीं आता – मैं कोलकाता में रहना चाहती हूँ,’’उसने उत्तर दिया। जब मैंने पूछा कि हमारा क्या, तो उसने लापरवाही से उत्तर दिया ‘‘कोई और है”। मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। मैं उससे ज़्यादा जानना चाहता था। पिछले कुछ महीनों में क्या हुआ? मैंने उसे बैठने को कहा और वह मुझे हमारे एक अन्य सहकर्मी ‘उस दूसरे पुरूष’ के बारे में बताने लगी। उसने अपनी टिकट और जल्दी की बुक कर ली और कोलकाता लौट गई।

हमने फिर बात की, मेरे और उसके माता-पिता ने भी उससे बात की, लेकिन वह निश्चित थी कि ना तो मेरे साथ रहने आएगी और ना ही इस ‘दूसरे पुरूष’ के साथ कुछ करेगी। वह विवाहित है, और अनिका भी -लेकिन एक दूसरे के साथ नहीं -और अब हम ऐसी स्थिति में हैं जिससे कैसे निपटें हम नहीं जानते। मैंने सोचा कि शायद झूठ बोलना और मामले का ठंडा होना मदद करेगा। जब मैंने उसे फोन किया, कोई बदलाव नहीं था। क्या हम आगे बढ़े?’’ और उसने केवल मुझे यह कहा ‘‘जल्दी क्या है?’’

मुझे जवाब चाहिए

सच में? कोई जल्दी नहीं है? मेरे पास कई सवाल हैं जिनके जवाब बहुत कम हैं। मैं खुद से पूछता हूँ कि अब आगे क्या? मुझे कोई अंदाज़ा नहीं कि जब उसने मुझसे पूछा कि मुझे जल्दी है क्या, तो उसका मतलब क्या था। मैं नहीं जानता कि जल्दी है क्या, लेकिन बहुत सारा दर्द ज़रूर है। मानो या ना मानो, लेकिन यह एक मिथक है कि हमेशा पुरूष ही अपराधी होते हैं जबकि स्त्रियां चुपचाप सहन करती जाती हैं। हालांकि पैमाना लगभग हमेशा ही स्त्रियों की और झुकता है, अगर आप आसपास नज़र दौड़ाएंगे तो देखेंगे कि पुरूष, लिंग पक्षपाती कानून की पीड़ा भुगत रहे हैं, एक ऐसे समाज में जहां स्त्रियों के अधिकार की चर्चा सार्वजनिक रूप से की जाती है लेकिन पुरूषों के अधिकार सामने आने के लिए संघर्ष करते हैं। आज मैं विवाहित होकर भी अकेला हूँ। जिस तनाव और दर्द से मैं गुज़र रहा हूँ वह दर्द देता है, लेकिन, सुनता कौन है! काश मैं जान पाता कि उसने मुझे क्यों छोड़ दिया।

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