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कैसे एक बेटी ने अपने परिवार को शादी के बाद भी संभाला

अक्सर पढ़ी लिखी बेटियां भी शादी के बाद अपने माता पिता के लिए कुछ नहीं कर पाती हैं. मगर ये कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसने शादी के बाद अपने नए रिश्तों को निभाने के लिए पुरानी ज़िम्मेदारियों से मुँह नहीं मोड़ा.
Woman in blue scarf

हम उन्हें बेबी दी बुलाते है और वो मेरी कजिन हैं. बेबी दी अपने सात भाई बहनों में सबसे बड़ी थी और उनके पिता भारतीय सेना में क्लर्क थे. उन दिनों ज़िन्दगी इतनी मुश्किल और महंगी नहीं होती थी क्योंकि तब अक्सर लोग “सदा जीवन उच्च विचार” की भावना के साथ रहते थे. मगर ऐसा भी नहीं था की सब कुछ बिलकुल सहज और सरल था. उस ज़माने की भी चुनौतियाँ और मुश्किलें थी.

उनके लिए पिता का कोई सहारा नहीं था

बेबी दी की माँ घरेलु हिंसा की शिकार थी और उनके पिता अपने बीवी और बच्चों को ज़रूरी चीज़ें की सहूलियत भी नहीं देते थे. बच्चों के पास स्कूल यूनिफार्म के दो जोड़ी भी नहीं होते थे और अक्सर छोटे बच्चे अपने बड़े भाई बहन के फ़टे पुराने यूनिफार्म ही पहन कर अपना काम चलाते थे. बस अच्छी बात ये थी की भारतीय सेना में होने के कारण सभी बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिल गया था.

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बेबी दी ने हिंदी साहित्य में अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी कर के एक केंद्रीय स्कूल में हिंदी शिक्षिका का नौकरी ले ली. इस बात से उनकी माँ और भाई बहनों ने बहुत ही चैन की सांस ली. अब वो आर्थिक तौर पर उनकी मदद कर सकती थी. मगर उसी साल बेबी दी को एक बंगाली लड़के से प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली. चूँकि लड़का दूसरी जाती का था, तो बेबी दी को परिवार में बहुत विरोध सहना पड़ा मगर वो एक दूसरा ही किस्सा है.

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