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काम और रति की कहानी भारत के भूले बिसरे प्यार के उत्सव को उजागर करती है

काम और रति की दिव्य जोड़ी प्यार और वासना के स्पेक्ट्रम में हर चीज़ को जोड़ती है और उनकी कहानियां सबूत हैं कि एक समय भारत कामुकता को पसंद करता था।
Kama and Rati

ना तो अच्छा हो सकता था और ना ही पूर्ण। किस और कंडोम से शर्माने वाला जो देश हम बन चुके हैं उसके विपरीत, किसी जमाने में भारत को अन्य चीज़ों के साथ कामसूत्र की भूमि के नाम से भी जाना जाता था। हम वह ‘फारवर्ड’ देश भी थे जिसने ना केवल विश्व को आकर्षक सेक्स मैनुअल दिए बल्कि हमारे मंदिर की दिवारों पर कामुक जोड़ों की छवियां भी दी। सेक्स एक वर्जित विषय नहीं था जिससे बचा जाता था या बुरा माना जाता था बल्कि उत्सव मनाने की वस्तु थी। काम, या कामुक आनंद, चार पुरूषार्थों (जीवन के लक्ष्य) में गिने जाते थे, बाकी तीन में धर्म (कर्तव्य), अर्थ (धन) और मोक्ष (मुक्ति) शामिल थे। यह ना सिर्फ एक अधिकार था बल्कि खुद के प्रति एक कर्तव्य भी था जिसके बगैर जीवन

प्यार खेल और कला था। यह एक गंभीर कार्य और उत्सव था। प्यार दिव्य था क्योंकि यह देवताओं द्वारा शासित था।

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आनंद के देवता

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