कानून कैसे आपको रिवेंज पोर्न से बचाता है?

जब प्यार खतरनाक रूप लेने लगे

बीस साल की स्मिता घोष (नाम बदले गए हैं) २३ वर्षीय अनिमेष बक्शी से प्यार करती थी. अनिमेष एक इंजीनियरिंग छात्र था और दोनों के बीच सब कुछ अच्छा चल रहा था. मगर चीज़ें बिगड़ने लगी जब अनिमेष ने स्मिता को उसके साथ छुट्टिओं में कहीं जाने के लिए दबाव डाला. स्मिता ने मना कर दिया तो उसने फिर से उससे चलने के लिए जिद्द की. वो उससे आग्रह करता रहा और स्मिता उसे ठुकराती रही.

अब बार बार न सुनकर अनिमेष का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. एक दिन वो गुस्से में आगबबूला बैठा था और अचानक स्मिता का फोन उसके हाथ लग गया. चेक करते करते उसे स्मिता की कुछ ऐसी फोटो और वीडियो दिखे जो उसने अपने घर में अकेले में खींचे थे. वो फोटो ऐसे थे की अगर उन्हें किसी तरह फैला दिया जाता तो स्मिता के लिए बहुत विपत्ति आ सकती थी. बार बार रिजेक्ट हुआ अनिमेष वैसे ही स्मिता से बहुत नाराज़ था और उसने आव देखा न तव, उसकी वो प्राइवेट फोटो एक पोर्नोग्राफिक वेबसाइट पर साझा कर दी. बदले की आग में वो इतना पागल हो चूका था की वो इस पर भी नहीं रुका। उसने स्मिता का असली नाम, और उसके पिता का नाम भी पोर्न साइट पर दे दिया.

जब स्मिता के पैरों तले ज़मीन खिसकी

स्मिता सब से बेखबर ब्रेक-अप के बाद अपनी शांत ज़िन्दगी जी रही थी. और फिर एक दिन उसके भाई ने स्मिता को वो सारी फोटो दिखाई जो अनिमेष ने पोर्न साइट पर साझा की थी. स्मिता के पैरों तले जमीन निकल गई और उससे भी ज़्यादा मुश्किल ये थी की स्मिता के घरवाले उसे बेक़सूर मानने को तैयार ही नहीं थे. उन्हें लग रहा था की स्मिता और अनिमेष की नजदीकियां इतनी बढ़ गई थी की उसने खुद अनिमेष से वो अश्लील फोटो खिचवाई थी. स्मिता पूरी तरह टूट चुकी थी मगर थोड़ी बहुत बची कुछ हिम्मत को संजोये वो पुलिस कंप्लेंट करने चल दी. उसने पश्चिम बंगाल की मिदनापुर डिस्ट्रिक्ट के पुलिस कर्मियों के सामने अपनी लिखित शिकायत दर्ज़ की.

जब स्मिता के पैरों तले ज़मीन खिसकी
जब स्मिता के पैरों तले ज़मीन खिसकी

करीब ७ महीनो की निरंतर कोर्ट कार्यवाही के बाद स्मिता को न्याय मिल गया. मार्च ८ को जब पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा था, कोर्ट ने आरोपी को पांच साल की सजा सुनाई. उसका गुनाह था स्मिता के फोटो और वीडियो साइट्स पे साझा करना सिर्फ उसकी बदनामी और जगहसाई करने के लिए.

उसे न्याय मिला

यूँ तो विरोधी पक्ष ने पूरी एड़ी चोटी एक कर दी अनिमेष को बेगुनाह साबित करने में, मगर अदालत काफी संतुष्ट थे सभी प्रमाणों और सबूतों से और अनिमेष को सज़ा दे दी गई. “रिवेंज पोर्न (या बदला लेने के लिए पोस्ट किया गया पोर्न) पूरे विश्व में फैल रहा है, मगर फिर भी बहुत कम ही ऐसे किस्से हैं जो समाज के सामने लाये जाते हैं. ये खासकर इसलिए है क्योंकि अक्सर जो इसका शिकार होती महिलाएं हैं, जो सामाजिक तिरस्कार और बदनामी के डर से कोई शिकायत दर्ज़ नहीं कराती. स्मिता का केस पूरे समाज के लिए एक उदाहरण है और स्मिता जैसी कई पीड़ित महिलाओं को इस फैसले से उम्मीद मिलेगी की वो भी आगे आएं और दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानून का साथ लें. अब समय आ गया है की लड़कियां डरे नहीं, बल्कि अपने हक़ के लिए लड़ें,” सरकारी वकील (पब्लिक प्रासीक्यूटर) बिस्वास चटर्जी कहते हैं. बिस्वास चटर्जी पश्चिम बंगाल के साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक अपराध से हैं.

साइबर अपराध बढ़ रहा है

साइबर अपराध बढ़ रहा है
२०१६ में भारत में एक हज़ार से भी ज़्यादा साइबर अपराध बदला लेने के उद्देश्य से किये गए थे

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हिसाब से साल २०१६ में भारत में एक हज़ार से भी ज़्यादा साइबर अपराध बदला लेने के उद्देश्य से किये गए थे, जिसमे से करीब ६८० घटनाएं महिलाओं के मान और इज़्ज़त को नष्ट करने के उद्देश्य से किये गए थे. करीब ५७० अपराध करने का मुख्य कारण था औरतों का सेक्सुअल या यौन उत्पीड़न। इस डाटा से साफ़ समझ आता है की महिलाओं का अतिक्रमण करने वाले रिवेंज पोर्न और साइबर अपराध, जो शायद बलात्कार जितना ही घृणित अपराध है, अब बढ़ते जा रहे हैं.

बिस्वास चटर्जी कहते हैं: “इस तरह के अपराध से पीड़ित लोगों के ऊपर बहुत गहन मानसिक तनाव रहता है. स्मिता के केस में मैं करीब छह महीने मिदनापुर में रहा, ताकि मैं सारे इलेक्ट्रॉनिक सबूत इक्कट्ठे कर सकूं और उसे निर्दोष साबित कर सकूं. मैंने महसूस किया की वो सिर्फ समाज से नहीं खुद अपने परिवार से भी तिरस्कृत की जा रही थी. मैं बार बार उसका मनोबल बढ़ाने की कोशिश करता था और उसे समझाता था की ये सिर्फ उसकी नहीं, कई और उसके जैसी पीड़ित महिलाओं की लड़ाई है. उसे प्रोत्साहित करने के लिए मैं उसे बार बार बताता था की यह एक ऐतिहासिक केस होने वाला है और अगर इस केस के बाद पुरुष अब दो बार सोचेंगे कोई भी ऐसा अपराध करने से पहले.”

कानून न्याय दिलाने के लिए बने हैं

कानून न्याय दिलाने के लिए बने हैं
साइबर क्राइम का शिकार हों तो उन्हें तुरंत ही पुलिस और क़ानून की मदद लेनी चाहिए

ज़्यादातर साइबर संग्रक्षक ये सलाह देते हैं की जब भी कोई महिला किसी भी तरह के रिवेंज पोर्न अथवा साइबर क्राइम का शिकार हों तो उन्हें तुरंत ही पुलिस और क़ानून की मदद लेनी चाहिए. ” हमारे IT एक्ट में ऐसी कई धाराएं हैं जो बहुत कठोर रवैया अपनाती हैं इस तरह के अपराधियों के खिलाफ. भारतीय कानून रिवेंज पोर्न को एक अपराध मानते हैं,” चटर्जी कहते हैं.

रिवेंज पोर्न या साइबर अपराध से खुद

हमने कई साइबर संगरक्षकों से बातचीत की और उनके ख्याल से अगर महिलएं इन बातों का ध्यान रखें तो खुद को शायद ऐसी मुश्किलों से बचा सकें.

  • अगर आप अपने साथी के साथ अंतरंग हो रहे है, या शारीरिक सम्बन्ध बना रहे हैं तो कभी भी उसे कुछ भी रिकॉर्ड न करने दें.
  • कभी किसी को आपकी आपत्तिजनक अवस्था में कैसी भी फोटो न लेने दें
  • अपनी कोई स्वछंद या यौन उन्मुक्त फोटो अपने साथी के साथ किसी सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सअप पर साझा न करें.
  • आप कितनी भी भावुक हो जाएं या आपका साथी कितना भी भावनात्मक दबाव डाले, आप कभी उससे अपने फ़ोन का पासवर्ड शेयर न करें.
  • अगर अपना स्मार्ट फ़ोन या मेमोरी कार्ड किसी को देना हो, तो पहले ये निश्चित कर लें की उसमे आपकी कोई पब्लिक न होने लायक फोटो या वीडियो तो नहीं

कितना भी गहरा और प्यारा रिश्ता क्यों न हो, इन बातों का हमेशा ध्यान रखें. कई प्रेमी अचानक दुश्मन बन जाते है और कई प्रेम प्रसंगों का अंत बड़ा ही कड़वा होता है. सावधान रहे. सुरक्षित रहे.

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