४० लाख का क़र्ज़, डूबता बिज़नेस और दो बड़ी बेटियां- जब ज़िन्दगी में वो सब खो रहे थे

man and woman sitting holding hands

मुश्किल वक़्त, इंसान सख्त

मैंने हमेशा माना है की मुश्किल पलों में रिश्ते और गहरे हो जाते हैं. हाँ रिश्ते में धोखा एक ऐसा तूफ़ान है जिससे निकलना मुश्किल होता है क्योंकि इस तूफ़ान में प्यार और विश्वास सब तहस नहस हो जाता है. सब कुछ फिर से जुड़ने में वक़्त लगता है. उससे भी बुरा है शराब की लत और घरेलु हिंसा. अगर मानसिक अस्थिरता का मुद्दा है तो चीज़ें और मुश्किल हो जाती है. ऐसे मामलों में कई बार तो तलाक ही अकेला हल बच जाता है. मगर मैं जब भी सुनती हूँ की कोई शादीशुदा दम्पति आर्थिक तंगी के कारण अलग हुआ तो मुझे बहुत तकलीफ होती है. अजीब बात है की रिश्ता इसलिए टूट गया क्योंकि उन्हें मिल कर अपनी जीवनशैली कमतर करनी थी.

क्या एक रिश्ता इतना कमज़ोर होता है की धन या उसकी कमी की वजह से टूट जाए? कहते हैं न की पैसे तो हाथ का मैल है. कभी रहा है, कभी नहीं. जापान में तो ये माना जाता है की पैसे की एक समस्या ये है की इसकी कोई समस्या ही नहीं.

जापान में तो ये माना जाता है की पैसे की एक समस्या ये है की इसकी कोई समस्या ही नहीं.

कल्पना कीजिए कि क्या यह स्वास्थ्य या प्यार या आध्यात्मिक दुविधा के थे ? क्या वे बदतर नहीं होंगे?

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जब उसकी नौकरी छूटी मगर उसका साथ नहीं

कणमणि और कुरूप की शादी काफी कम उम्र में ही हो गई थी. वो बस २० वर्ष की थी और वो उससे कुछ बड़ा था, मगर वो एक पारम्परिक विवाह था और उन दोनों बच्चों की एक अच्छी और सशक्त ज़िन्दगी निश्चित थी, कुरूप एक प्राइवेट कंपनी में एक औसत कर्मचारी था और उनकी नैया ठीक ही चल रही थी मगर फिर एक दिन वो कंपनी बंद हो गई. कंपनी की तरफ से जो भुगतान मिला और एक बड़े से बैंक लोन के बाद कुरूप ने अपना एक कंप्यूटर लर्निंग सेंटर खोल लिया. उन्हें लगा था की वो जल्दी ही शुरुवाती दिनों की मुश्किलों से निकल जाएंगे मगर जल्दी ही उन्हें समझ आने लगा की कुरूप की मेहनत और लगन ही काफी नहीं होगा उनकी सफलता के लिए.

Man helping kids on computer
जब उसकी नौकरी छूटी मगर उसका साथ नहीं

कणमणि ने अपने सारे सोने के गहने गिरवी रख दिए और कुरूप ने लोकल बाजार के कुछ दलालों से उधार ले लिए. मगर फिर भी जल्दी ही उन्हें अपना बिज़नेस बंद करना पड़ा और अपनी पुश्तैनी ज़मीन को गिरवी रखने की सोचने लगे. उधार दीमक की तरह होते हैं. सूद और ब्याज धीरे धीरे आपका खून चूसने लगता है और जिस तरह कर्ज़दार आपको हर समय घेर कर खड़े होते हैं, आप आराम से सांस लेना भी भूल जाते हो. कणमणि और कुरूप की लड़कियां अब भी पढ़ रही थी और इस नुक्सान से उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके पिता उनके और उनकी माँ के सामने हार गए हैं. कणमणि को मगर फिर भी पूरा विश्वास था की सब कुछ ठीक हो जायेगा और वो इस दलदल से ज़रूर बाहर निकलेंगे.

कुछ मददगार हाँथ

ब्रह्माण्ड का एक अजीब नियम है. जब भी कोई अथाह दुःख में होता है, कहीं से कोई मददगार हाँथ ज़रूर उसके पास आ जाता है. किसी को नहीं पता होता की वो मदद कहाँ से आएगी मगर वो आती है. कणमणि के छोटे भाई को नासा में एक बहुत ही अच्छी नौकरी मिल गई और साथ ही एक बहुत अच्छी तनख्वाह भी. जल्दी ही वो अपने परिवार के साथ न्यू यॉर्क चला गया और अपनी बहन की थोड़ी बहुत आर्थिक मदद करने लगा. जल्दी ही कुरूप की बड़ी बेटी की शादी का भी समय आ गया था. उनके घर की आर्थिक स्तिथि अब भी ठीक नहीं थी और अगर उनकी मदद नहीं होती, तो वो अब भी नहीं जानते थे की उनके अगले पहर का खाना कहाँ से आएगा.

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अब तक उनका क़र्ज़ चालीस लाख का हो गया था और एक दिन हांथों में तलवार और बन्दूक लिए गुंडों का एक समूह उनके दरवाज़े पर आ कर खड़ा हो गया. जब उन्होंने कणमणि से क़र्ज़ के बारे में पुछा तो उसने अपनी अनभिज्ञता बताई. इस पर बहुत ही बेहूदगी से उस समूह के लीडर ने कहा की उन्हें अगर रूपये के बदले कुछ और भी मिल जाये तो वो संतुष्ट हो जायेंगे. उस दिन पहली बार कणमणि बहुत रोइ. कुरूप ने तुरंत ही मामले की गंभीरता को समझा और पचास साल का होने के बाद भी उसने दुबई के एक कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरवाइजर का काम ले लिया. उन दिनों दुबई में रियल एस्टेट का काम काफी ज़ोर शोर से चल रहा था. कुरूप ने जल्दी ही पैसे कमाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे कर्ज़ा भी उतरने लगा. छह साल बाद जब कुरूप भारत वापस आया तो वो सूरज में जला हुआ और उम्र से थका हुआ था मगर उसने कणमणि से अपना किया वायदा पूरा किया था.

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अब वो सुरक्षित हैं

अब उसकी बेटियां अच्छी नौकरी करती हैं और अच्छी तनख्वाह कमेटी है. उनके पति भी अच्छे पदों पर है. अब उनका परिवार एक सशक्त परिवार हो गया है. उनके नाती नतनी उन्हें वो सारी खुशियां देते हैं जो उन्होंने कई सालों तक महसूस नहीं की थी. जो हादसा उनकी ज़िन्दगी को पूरी तरह से तहस नहस कर सकता था, उसने उन्हें फिर से खड़ा होने की ताकत दी. उन्होंने मुश्किल वक़्त में हिम्मत नहीं हारी और निरंतर अपनी लगन से काम करते रहे. एक दुसरे के लिए उनका प्यार कभी कम नहीं हुआ और न ही उनकी उम्मीद ही कभी टूटी.

मुझे लगता है की सच्चा प्यार बहुत ताकतवर होता है और आपको बड़ी से बड़ी मुश्किल से झूझने की ताकत देता है. चमत्कार तो होते हैं, बस आपको अपना सकारात्मक विचार, उम्मीद और हिम्मत को एकजुट रखना ज़रूरी है.

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