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खोए हुए प्यार की निशानियों से कैसे निपटें

lady crying badly

(अनुरोध पर नाम बदल दिए गए हैं)

हम सभी ने सुना है कि प्यार जीवन को अर्थ देता है। लेकिन क्या आपने महसूस किया है कि प्यार चीज़ों को अर्थ देता है? मटीरीयल, शारीरिक, मूर्त चीज़ें – प्यार जैसी क्षणिक और अकथनीय चीज़ का प्रतिवाद। फिर भी जीवनभर, हम भावनात्मक मूल्य के लिए चीज़ों को इकट्ठा करते हैं और उन्हें उपहार स्वरूप दे देते हैं। कथित कवि और एक्टिविस्ट माया एंजेलो ने हमें मानव भावना की शक्ति के बारे में कुछ बताया है – ‘‘मैंने जाना है कि आपने जो कहा और किया लोग उसे भूल जाएंगे, लेकिन वे कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस करवाया।” शायद यह चीज़ों के बारे में भी कहा जा सकता है। हम उनका उद्देश्य, उनकी ज़रूरत भूल सकते हैं, लेकिन भावनाओं के साथ उत्कीर्ण, प्यार में दी गई, यादों में बसी चीज़ों को छोड़ना मुश्किल है।

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एक धोखा देने वाले के साथ ब्रेकअप करना

सचिन के पास ऐसी कुछ चीज़ें थी। जब उसने उसकी एक साल की मंगेतर और तीन साल पुरानी गर्लफ्रैंड को धोखा देते हुए पकड़ा और उसने उसे छोड़ दिया, तो ऐसा लगा कि उसके पास सिर्फ उसकी चीज़ें रह गई हैं। उसे याद दिलाती हुई, छेड़ती हुई और उस अतीत के बारे में यातना देती हुई जिसे वह मिटाना चाहता था, और उस भविष्य के बारे में यातना देती हुई जिसके सपने देखना वह बंद करना चाहता था। ‘‘किसी तरह वे मुझे सुकून देती थी – शुरूआत में, अपने घर में मैं उसकी चीज़ें देखता था और सोचता था कि यह दुःस्वप्न खत्म हो जाएगा। मैं जब जागूंगा तो सबकुछ ठीक होगा और वह मेरे साथ होगी।” कपड़े/ किताबें, आभूषणों का रैंडम वर्गीकरण/ मेकअप/ और दूसरा सामान जो वह अपने पीछे लापरवाही से छोड़ गई थी। फिर उपहार, जन्मदिन, सालगिरह, खास अवसरों का सामान या रैंडम उपहार आए जिन्होंने उसका हर दिन इतना खास बना दिया। और बेशक, यादें – सैकड़ों यादें – मैसेज, फोटो, वीडियो में, सबकुछ उसकी हथेली में।

एक अब्यूसिव रिश्ते से बच निकलना

रूचि ने भी खुद को एक ऐसे हिम्स्खलन में धंसा पाया जब उसने अंततः अपने 4 वर्ष के अब्यूसिव संबंध को अलविदा कहा। माफ करना अब यह कभी नहीं होगा से लेकर माफ करना यह फिर से हो गया तक का सफर जिसे उपहारों, कविताओं, मैसेज, फूलों द्वारा व्यक्त किया जाता था, जिनकी सूखी पत्तियों को वह संजोती थी। चीज़ें जो उन वर्षों का सार थी – आशा, दर्द, प्यार। सभी ने उसे कहा कि उन्हे फैंक दे। लेकिन वह यह नहीं कर पा रही थी। ‘‘हाँ, सिर्फ उन्हें देखकर ही मेरी आँखों से आँसू बहने लगते थे। मैं यह तक नहीं जानती थी कि आँसू सबकुछ खत्म होने की वजह से है या इसलिए है क्योंकि मैं अब भी प्यार में थी।”

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किसी प्रियजन की मृत्यु होना

और उस प्रियजन से जुड़ी चीज़ों के बारे में क्या जो कुछ जल्दी ही भगवान को प्यारा हो गया? शादी के 5 साल के भीतर ही आरिफ की पत्नी की कैंसर से मृत्यु हो गई। वैवाहिक सुख के चार साल, एक अस्पताल से दूसरे तक भटकने का एक साल और जीवनभर की क्षति। अपनी पत्नी से संबंधित हर चीज़ को सहेजना उसके दुःख का सामना करने का तरीका बन गया। ‘‘मैं उसकी बहन से लड़ने की सीमा तक पहुंच गया जब वह घर साफ करने में मेरी मदद करने आई। मैंने उसे कुछ भी हटाने नहीं दिया। यह इतना अपमानजनक लग रहा था कि सिर्फ इसलिए की वह मर चुकी है, उसकी चीज़ों का कोई महत्त्व नहीं रह गया।”

क्षति और शोक से निपटना

मनोचिकित्सक गौरव देका मानव अस्तित्व की छह महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं – निश्चितता, विविधता, विकास, महत्त्व, योगदान और कनेक्शन के साथ इस लगाव को समझाते हैं। एक अस्पष्ट और अप्रत्याशित जीवन में, निश्चितता की आवश्यकता, हमें अराजकता में थोड़ी शांति बनाने में मदद करती है। एक रिश्ते का टूटना जो हमारे नियंत्रण में नहीं था, उससे जुड़ी चीज़ों को सहेजना उस आवश्यकता को बचाने में मदद करता है। यह एक कोपिंग मेकेनिज़म है, वह जहां हम भौतिक चीज़ों पर शामिल भावनाओं को प्रोजेक्ट करते हैं। वह खुद से दो सवाल पूछने का सुझाव देते हैं: चीज़ों को सहेजने से आपको कैसा महसूस होता है? यह आपकी किस तरह मदद कर रहा है? ‘‘जब आप इन सवालों का जवाब देना शुरू करेंगे, तो आप उस क्लोज़र के नज़दीक आ जाएंगे जो आप चाहते हैं।”

तो सचिन, रूचि और आरिफ ने इस शारीरिक भार को छोड़ने के लिए क्या किया?

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आगे बढ़ें

सचिन ने बताया, ‘‘मैं बैठ गया और उसका सामान अलग किया, जो भी उसका था वह एक दोस्त द्वारा उसे भेज दिया। उसके बाद उपहारों की बारी आई – मैंने खुद से पूछा कि क्या मैं उन्हें इसलिए रख रहा हूँ क्योंकी वे उसने मुझे दिए थे, या मैं वास्तव में उन्हें पसंद करता हूँ? शुरू में, मैंने कुछ रख लिए और कुछ छोड़ दिए। फिर मुझे अहसास हुआ कि किसी ना किसी तरह यह हमेशा एक रिमाइंडर होगा और वह पहले ही आगे बढ़ चुकी है – इसलिए मुझे भी आगे बढ़ने की ज़रूरत है। फोटो, मैसेज आदि के लिए, मैंने उन्हें एक हार्ड ड्राइव में डाल दिया। यह उस रिश्ते का एकमात्र भौतिक रूप है जो मेरे पास है। मुझे आशा है कि एक दिन मैं उसे भी छोड़ दूंगा।”

उबर जाएं

रूचि के लिए, यह विधिवत नहीं था। ऐसा इसलिए भी था, क्योंकि वह एक दिन उस पुरूष का सामना करने में सक्षम होना चाहती थी और चीज़ें उसके मुंह पर फैंकना चाहती थी। ‘‘क्या यह हर टूटे हुए दिल का सपना नहीं है?’’ उसने मुस्कुराते हुए कहा।

“मुझे अहसास हुआ कि मैंने खुद को एक क्लीशे बनने दिया था। और वह भी उस पुरूष के लिए जो मेरे काबिल ही नहीं था। और वहां पहुंचने में मुझे बहुत लंबा समय लगा – संबंध के खत्म होने के बाद लगभग दो साल। शुरूआत में, मुझमें उन चीज़ों को देखने, उन्हें पकड़ने तक का साहस नहीं था। पहले मैं उससे उबरी। मैंने खुद से कहा- रूचि भले ही दिल खोल कर रो लो, लेकिन इससे बाहर निकल जाओ। और मैंने किया। और एक दिन मैंने अपनी अलमारी के उस शेल्फ का सामान एक बड़े झोले में खाली कर दिया। मैंने पहले ही उसे मैसेज करके एक मीटिंग फिक्स कर दी थी। उसने सोचा शायद मैं उसकी बांहों में सिमट कर रोने के लिए आ रही हूँ! उसकी बजाए मैंने उसके सामने एक बैग रख दिया – ये तुम्हारे हैं, शायद तुम्हारी नई गर्लफ्रैंड ये पढ़े। वह हक्का-बक्का रह गया था और उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि मेरा शांत चेहरा कौनसा तूफान छुपा रहा था। यह कह कर, मैं चली गई।”

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

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जाने दें

आरिफ की पत्नी के गुज़र जाने के एक साल बाद तक वह तनाव से जूझा। एक अर्थहीन जीवन में, सिर्फ उसकी पत्नी के पुराने सामानों ने उसे सुकून प्रदान किया। ‘‘मैं बस उन्हें पकड़कर रोता रहता था – उसके कपड़े, तौलिए, हर वो चीज़ जिसमें उसका सार था। फिर समय बीतने के बाद यह मेरे सामने स्पष्ट हो गया – मैं उसके व्यक्तित्व के लिए उससे प्यार करता था या उसके सामान के लिए?’’

“वह उसके सामान से कहीं ज़्यादा थी और उसके जीवन के मूल्य को उसके सामान तक सीमित कर देना एक वास्तविक अपमान था। पहला कदम सबसे ज़्यादा मुश्किल था। मुझे याद है कि सर्दियों का समय था और मेरे घर के पास एक क्रॉसिंग पर वह बूढ़ी औरत फुटपाथ पर बैठी थी। अगले दिन, मैंने उसे रोशन के पुराने स्वेटर में से एक दे दिया। मैं घर आया और एक बच्चे की तरह रोया -और उसे वापस लेने से मुझे खुद को रोकना पड़ा था। तब से, मैंने उसकी अधिकांश चीज़ें दे दी हैं। मैंने अब भी कुछ चीज़ें संजो रखी है – लेकिन वे इतनी खास हैं कि किसी और को नहीं दी जा सकती।”

अगर भावनाएं प्यार का निवेश हैं, तो चीज़ें शायद उसकी मुद्रा हैं। जब मुद्रा आसपास हो तब निवेश पर से नज़र हटाना आसान है।

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