Hindi

कृष्ण की सत्यभामा एक अनुभवी फेमिनिस्ट हो सकती है

कृष्ण की सभ्य और करूणामय प्रेमिकाओं के विपरीत, सत्यभामा अपने अग्निमय व्यक्तित्व के साथ तवज्जो की मांग करती है। वह उस स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है जो जानती है कि उसे क्या चाहिए और इसे मांगने से डरती नहीं है।
Krishna Satyabama

अगर राधा युवा, विद्रोही प्रेम का प्रतिनिधित्व करती है और रूक्मणी दृढ भक्ति का, तो सत्यभामा एक मांग करने वाली, या यहां तक कि पज़ेसिव साथी का प्रतिनिधित्व करती है। अपनी दूसरी प्रमुख पत्नी के साथ कृष्ण के रिश्ते की प्रकृति को जोशीला वर्णित किया गया है – जैसे हल्के रंगों के बीच में लाल रंग। यह पौराणिक कथाओं में कई एपिसोड में स्पष्ट हो जाता है जिसमें यह दिव्य जोड़ा शामिल है।

सत्यभामा के अस्थिर स्वभाव के लिए इस तथ्य को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है कि वह पृथ्वी की देवी, भूदेवी की अवतार है। चंचल लेकिन विनम्र लक्ष्मी के विपरीत, भूदेवी आदिकालीन और वाइल्ड स्त्री का आदिरूप है। ऐसी स्त्रियां, विवाहित होने के बावजूद, किसी के प्रभुत्व के सामने झुकती नहीं हैं। बल्कि, दक्षिण भारत में, यह अवधारणा ज़्यादा प्रचलित है कि विष्णु की दो पत्नियां हैं – श्रीदेवी (लक्ष्मी) और भूदेवी। यह अवधारणा वराह अवतार के मिथक से आती है। विष्णु ने वराह के अवतार में पृथ्वी की देवी को आदिकालीन समुद्र के नीचे से बचाया था, जहां राक्षस हिरण्याक्ष ने उसे पकड़ रखा था। जहां इस कहानी में भूदेवी अपने रक्षक को अपना पति मान लेती है, उसे सत्यभामा के रूप में उसका अहसान चुकाने का मौका मिलता है।

सच्चाई की चमक

हम सत्यभामा के जन्म के बारे में ज़्यादा नहीं जानते, सिवाय इसके कि वह एक यादव राजा और द्वारका के शाही खजांची सत्रजीत की बेटी है। स्यामंतक मणी को लेकर कृष्ण और सत्रजीत का झगड़ा एक और कहानी है, लेकिन यह कृष्ण के साथ उसकी तीनों बेटियों – वृतिनी, प्रस्पविनी और सत्यभामा के विवाह के साथ खत्म होती है।

Please Register for further access. Takes just 20 seconds :)!


Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also enjoy:

Yes No