क्रोध में ये १० चीज़ें कभी न बोलें

Prachi Vaish
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क्रोध एक ऐसा भाव है जिसमे एक रिश्ते को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने की क्षमता होती. क्योंकि जब हम गुस्से में होते हैं, हमारे दिमाग को जो हिस्सा सोचने समझने का काम करता है, उस तक खून की सप्लाई बंद हो जाती है और हम बिना कुछ भी सोचे बोलने लगते हैं. कई बार जब तक हमें अपनी गलती का एहसास होता है, बहुत देर हो चुकी होती है. ऐसा खासकर प्रेमियों के बीच होता है क्योकि ये रिश्ते सबसे कोमल होते हैं. ऐसा लगता है मानो ये हमेशा किसी टाइम बम के साथ लिपटे होते हैं. तो यहाँ हम आपको वो दस बातें बता रहे हैं जो आपको कभी भी गुस्से में अपने प्रेमी को नहीं बोलने चाहिए.

1. काश हम कभी नहीं मिले होते.

ये एक वाक्य आपके साथी के साथ बिताये आपके सारे मधुर पलों को फीकी कर देती है. आप जैसे ही ऐसा कुछ बोलते हैं, आपके साथी तुरंत सोचने पर मज़बूर हो जाते हैं की क्या आप दोनों के साथ बिताये वो पल सब बेमानी और झूठे थे. सच मानिये जब कोई साथी ऐसी बातें सोचे तो ये आपके रिश्ते के लिए सेहतमंद नहीं है.

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2. मुझे तुमसे नफरत है.

नफरत एक बहुत ही सख्त शब्द है और जब आप किसी से प्यार करते हैं तो आप उनसे नफरत नहीं कर सकते.

हाँ, हो सकता है की आप उनपर क्रोधित हो, उनसे निराश हों, उनकी किसी हरकत को नापसंद करते हो मगर आप उनसे नफरत नहीं कर सकते। तो अगली बार जब आपको साथी पर गुस्सा आये और कुछ बोलना ज़रूरी लगे तो ये कहियेगा, “मुझे नफरत है तुम्हारी इस हरकत से”.

3. मेरा भरोसा अब टूट गया है.

आपके साथी के लिए आप सब कुछ हैं क्योंकि उन्हें पता है की आप को उनपर भरोसा है और जब आप गुस्से में कहते है की अब आपका भरोसा टूट गया है, सच मानिये कहीं उनका दिल बहुत ज़ोर से टूट जाता है और रिश्ते के धागे भी हिल जाते हैं.

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4. काश मुझे तुम्हारा नहीं, उसका साथ मिल पाता.

ऐसी टिपण्णी साथी को सोचने पर मज़बूर कर सकती है वो शायद आपके लिए समझौता भर हैं. किसी और के साथ होने की ख्वाहिश जताना, चाहे वो क्रोध में ही हो, साथी को बहुत अपर्याप्त और अपमानित महसूस करा सकता है. ऐसी भावनाएं अक्सर रिश्तों में बहुत गहरी कड़वाहट भर देती हैं.

5. तुमने मुझे कभी खुश नहीं रखा.

तो इसका मतलब ये हुआ की वो आप उनकी छोटी छोटी हरकतों पर मुस्कुराये थे या उनके चुटकुलों पर हँसे थे, वो सब कुछ फरेब था? क्या आपने जवाब नहीं दिया? तो इसलिए कभी भी कितने भी क्रोधित हों, अपने साथी पर उन्हें आपको कभी न खुश करने का इलज़ाम न लगाएं.

6. तुम्हारा छूना मुझसे बर्दाश्त नहीं होता!

अगर किसी एक लड़ाई में आपने यह गलती से भी कह दिया तो इसकी कड़वाहट आपको आने वाले हर चुम्बन, हर स्पर्श में मिलेगी. आप उन्हें लाख समझा लें इस कटु बात की परछाई अक्सर रिश्तों में अंधकार ला ही देती है.

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7. मेरे लिए तुम्हे देखना भी नागवार है!

ऐसा कह कर आप अपने साथी को अत्यधिक तकलीफ पंहुचा रहे हैं. आपकी इस टिपण्णी से तो लगता है की उनके चेहरे को देखते ही आपको सारी बुरी घटनाएं याद आ जाती हैं. आगे जब आप उन्हें देख कर मुस्कुरायेंगे, वो ज़रूर सोचेंगे की ये सच या फरेब!

8. मैंने तुमसे झूठ कहा था

यह बहुत ही स्वाभाविक है की जब हम क्रोधित होते हैं तो वो बातें कहना चाहते है जिससे हम अपने सामने वाले को ज़्यादा से ज़्यादा आहत कर सकें. उस समय हम खुद इतने आहात होते हैं की भरकस प्रयास करते हैं की उन्हें भी भरपूर तकलीफ पहुंचे. तो कभी कभी आप बीती बातें निकाल लाते हैं और बता देते हैं की हमने उन्हें कब क्या झूठ बोले थे.

याद कहियेगा की एक बार आपने उन्हें आहत करने के लिए अगर ये सच कबूल कर लिया, तो क्रोध तो शांत हो जायेगा मगर वो सच कभी नहीं भूल पाएंगे.

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9. अभद्र भाषा या व्यवहार.

अपशब्द बोलने से कुछ भी हासिल नहीं होता मगर हाँ, आपका स्तर ही गिरता नज़र आता है और साथी बहुत बुरी तरह आहत हो जाते हैं. अगली बार यूँ अपशब्द बोलने का मन करे तो किसी तकिये पर अपना गुस्सा निकालने की कोशिश करिये.!

10. शारीरिक टिप्पणियां करना.

हर किसी के शरीर की कुछ ऐसी खामियां होती हैं जिसे लेकर लोग बहुत संवेदनशील होते हैं. और क्योंकि आप दोनों एक दुसरे के साथ इतने जुड़े हैं, आपको यक़ीनन उनकी इस कमज़ोरी की खबर होती है. मगर क्रोध में इस जानकारी को हथियार बना कर साथी को नीचे दिखाना या आहत करना बहुत ही निंदनीय है. ऐसी बातें ज़िन्दगी भर के किसी के मन में घर कर सकती हैं. ऐसी चोटें सालों साल नहीं भर पाती हैं और न ही आपके साथी उन्हें भूल पाते हैं.

याद रखिये की आप जब गुस्से में होते है, तब आप नहीं आपका गुस्सा आप पर अपना काबू कर लेता है. बाद में आप चाहे कितना भी अपनी सफाई देना चाहें, कुछ गहरे निशाँ रह ही जाते हैं. तो इसलिए अच्छा यही होता है की आप गुस्से में कुछ बोलने से बेहतर शांत हो जाए और तभी बोले जब मन कुछ शांत हो.

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