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कुछ ऐसे इस तमिल-पंजाबी जोड़े ने एक दुसरे को बदला

कैसे दो बिल्कुल भिन्न लोग मिले, प्यार में पड़े, शादी की, और राज्य की सीमाओं के आर-पार प्यार में रहे।
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कल्पना कीजिए की एक ज़ोरदार सामाजिक पंजाबी लड़की को एक विनीत अंतर्मुखी तमिल लड़के से प्यार हो गया है। यह हमारी शादी की कहानी थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह चेतन भगत के ‘टू स्टेट्स’ जितनी नाटकीय नहीं थी। परिवार आसानी से इस बंधन के लिए सहमत हो गए थे और दिल्ली में एक बहुत शानदार विवाह के साथ यह संपन्न हो गया था।

जैसा की कहा जाता है, शादी तो केवल शुरूआत है, वास्तविक यात्रा इसके बाद शुरू होती है। कई सारी भिन्नताएं हैं जो तभी पता चलती हैं जब साथ में रहना शुरू करते हैं। तमिल पति एक व्यस्त सप्ताह के बाद हर सप्ताहांत घर पर ही रहना चाहता था और घर पर बने सीधे साधे भोजन का आनंद लेना चाहता था। दूसरी तरफ पंजाबी पत्नी सज-धज कर एक नए रेस्त्रां जाना चाहती थी। वे एक सप्ताहांत घर पर रहे और पत्नी दुखी हो गई। अगली बार वे पार्टी करने चले गए और सोमवार सुबह काम पर जाने के लिए पति बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था। समय के साथ, उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था कर ली जिसमें दोनों खुश थे – शनिवार घर पर और रविवार बाहर।

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समय पर, समय में और समय के साथ

भिन्न संस्कृतियों में समय और समय के पालन की अवधारणा भिन्न होती हैं। एक दिन रात के साढ़े आठ बजे के लिए एक दोस्त के घर पार्टी का निमंत्रण आया। पंजाबी पत्नी ने दिल्ली के मानक समय का पालन करने और एक घंटे बाद यानी साढ़े नौ बजे जाने पर जोर दिया। यह सुन कर, तमिल पति व्यग्र होकर बहस करने लगा कि साढ़े आठ मतलब साढ़े आठ और उन्हें समय पर पहुंचना चाहिए। चूंकि वे दूर रहते थे, इसलिए वे जल्दी निकल गए और दोस्त के घर 8:20 पर पहुंच गए और कार में 10 मिनट इंतज़ार किया ताकि ‘‘ज़्यादा जल्दी ना लगे”।

उन्होंने घंटी बजाई, लेकिन किसी ने उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कुछ बार और कोशिश की लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और अंत में दोस्त को फोन किया। उसने कहा ‘‘क्या तुम आ भी गए हो! माफ करना मैं बस अभी घर पहुँची हूँ और नहा रही हूँ! क्या तुम प्लीज़ 9 बजे आ सकते हो?’’ इसलिए वे फिर से कार में चले गए और इंतज़ार किया। पंजाबी पत्नी, सही साबित होने पर बहुत खुश हो गई और टकटकी बांध कर देखने लगी वहीं उसका पति हतप्रभ होकर बैठ गया और सोच में पड़ गया कि ‘‘समय पर आने” को क्या हो गया। इसलिए, इसके बाद, पत्नी इस बात की प्रभारी थी कि पार्टी में कब (देर से) जाना है और कब (सबसे अंत में) वापस लौटना है।

गुड़गांव में स्थित होने के कारण, पंजाबी कुड़ी ने समय के साथ तमिल लड़के को सफलतापूर्वक पंजाबी बना दिया। उसके पंजाबी रिश्तेदारों ने एक बहुत लंबे भोजन और स्कॉच के जाम के साथ रही सही कसर पूरी कर दी इस दबाव में कि ‘‘एक पैग तो केवल दुश्मनों के साथ पीया जाता है”। उसकी सास के प्रसिद्ध मीट-चावल, ग्रिल्ड फिश टिक्का और मटन कीमा ने उसके रक्त में बचे हर तमिल अवशेष को चूस लिया। तो चीज़े इस तरह थीं- जिस तरह लड़की चाहती थी- शादी के प्रारंभिक 7 साल।

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स्थान बदलना

अचानक एक दिन, उनका जीवन गुड़गांव से स्थानांतरित हो गया और वे चेन्नई में स्थित हो गए। यह पति के काम के कारण था और पत्नी को इतना बेमेल महसूस हुआ जैसे चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरूख को दीपिका के परिवार के साथ हुआ था।

उसका पहला अनुभव एक हाउस ब्रोकर के साथ बातचीत का था जिसने उन्हें डाइनिंग रूम के बीच में वॉश बेसिन वाले, मंदिर के नज़दीक, और बिना सर्वेंट क्वार्टर वाले घर दिखाए। थकाऊ खोज और बहुत से प्रयास के बाद उन्हें ऐसा कुछ मिला जो उन्हें पसंद आया। समुद्र तट के करीब एक अपार्टमेंट, जो किसी भी दिल्ली वाले के लिए एक बड़ा आकर्षण था!

हालांकि, घर को आकार में लाने के लिए इसके आसपास कई चीज़ें करने की आवश्यकता थी। पति की हिन्दी जैसे लहजे के साथ टूटी-फूटी तमिल (जिसके लिए ऑफिस के सहकर्मियों द्वारा अक्सर उसका मज़ाक उड़ाया जाता था) और पंजाबी पत्नी की स्थानीय भाषा की जानकारी की कमी के साथ, यह वास्तव में चुनौतीपूर्ण था। लेकिन जल्द ही काम पूरा करवाने के लिए पत्नी ने टूटी फूटी अ्रग्रेज़ी के साथ सांकेतिक भाषा में महारत हासिल कर ली। यहां तक की, जब तक उसने ‘तमिल तेरियाडू’ (मैं तमिल नहीं जानती) सीखा, उसे बातचीत करना आसान लगने लगा।

चेन्नई में स्थित होने का अर्थ पति के रिश्तेदारों से घिरा होना भी था। अब तमिल बनने की बारी पंजाबी पत्नी की थी। इन वर्षों में वह कहा करती थी, ‘‘हमें तुम्हारे विस्तरत परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता” और इसलिए अंततः भगवान ने उसे वह दे दिया था जो वह चाहती थी!

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एक बड़ा सुखी परिवार

उन्होंने खुशी से उसका स्वागत किया और उसे बेहद आरामदायक महसूस करवाया। लेकिन जैसे-जैसे उसने जानना शुरू किया, कुछ सांस्कृतिक भिन्नताएं स्पष्ट थीं। जैसे हर बार जब वह किसी के घर जाए तब जूते घर के बाहर उतारना। उसे अपने पसंदीदा शो सेक्स एंड दि सिटी से कैरी ब्रैडशॉ का वाक्य याद आ जाता था, ‘‘मैं अपने जूते नहीं निकाल सकती, वे मेरी पोषाक को पूरा करते हैं! जल्द ही उसने अपने कपड़ों के साथ जूतों को मिलाना बंद कर दिया और परिवार के साथ खुशी-खुशी घुलमिल गई।

जल्द ही उसने अपने कपड़ों के साथ जूतों को मिलाना बंद कर दिया और परिवार के साथ खुशी-खुशी घुलमिल गई।

पहली बार जब पूरा परिवार एक साथ मिला तब वह एक पॉटलक डिनर (एक ऐसा भोज जहां हर कोई एक-एक व्यंजन बना कर लाता है) था। उसने सोचा कि इडली और डोसे के अलावा पांच भिन्न परिवार और क्या बनाएंगे। लेकिन वह कितनी गलत थी? वहां लेमन राइस थे…..और टेमेरिंड राइस थे….और वरीयता जोड़ने के लिए प्रसिद्ध दहीं चावल को कौन भूल सकता है। हॉट चिप्स भोजन का हिस्सा थे और जहां उसकी माँ कहती थी कि उससे दूर रहे क्योंकि वे जंक थे, यहां 8 से लेकर 80 साल तक के सभी लोग उन्हें ठूस रहे थे। समय के साथ उसकी स्वाद ग्रंथियां चावल को पसंद करने लगीं और अब वह उन्हें कई चीज़ों के साथ बनाती है, केवल राजमा और छोले के साथ नहीं।

सुखी हाइब्रिड्स

उनका हिन्दीभाषी बेटा जब स्कूल में बोलता था तब सब उसे घूर कर देखा करते थे। जल्द ही उसने कुछ तमिल शब्द सीख लिए और उन्हें अपने हिन्दी लहजे में बोलने लगा, उसके आसपास के लोगों के मनोरंजन के लिए।

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तमिल पति, पंजाबी पत्नी और हाइब्रिड बेटा दो वर्षों से चेन्नई में सुख से रह रहे हैं। बेटा हर दूसरे दिन इडली डोसा खाता है लेकिन जिस क्षण वह कहता है कि उसका पसंदीदा व्यंजन राजमा-चावल है, उसकी पंजाबी माँ अपने मन में भांगड़ा करती है!

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