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क्या भारतीय अपने शरीर और सेक्स को लेकर अनजान हैं?

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ पारस शाह कई उदाहरण देते है ये बताने के लिए कि हमारे देश में सेक्स को लेकर कितनी अवधारणाएं है.
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सेक्स भारत में कोई नया विषय नहीं है. देखा जाए तो सेक्स पूरे ब्रह्माण्ड में किसी के लिए भी कोई नया विषय नहीं है. मगर भारतिय समाज में खासकर सेक्स को एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. हमारे देश में ही वात्स्यान ने कामसूत्र लिखी. कई पुराने राजा महाराजों ने मंदिरों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए उनकी दीवारों पर यौन मुद्राएं अंकित हैं. इन नक्काशियों के पीछे दो कारण थे, एक तो साज सज्जा और दूसरी इस विषय पर ज्ञान. धीरे धीरे जब दूसरे राजाओ का भारत पर हमला हुआ और हमारी संस्कृति में और संस्कृतिओं का मेल हुआ, ऐसे वातावरण में इस स्वछंदता पर रोक लगने लगा और इन मंदिरों को ध्वस्त करा गया. स्त्रियों की सुरक्षा की बात थी और इसलिए धीरे धीरे हमारे समाज में सेक्स की बातें सिमित होती चली गई. और बहुत जल्दी ही ये एक बिलकुल वर्जित विषय हो गया जिसके बारे में न कोई बात होने थी न कोई ज्ञान दिया जाता था. इसका नतीजा है की आज हमारे समाज में कभी किसी भी स्तर पर सेक्स ज्ञान नहीं दिया जाता. इसके फलस्वरूप हमारे समाज को कई कुनीतियों और कुविचारों ने ग्रस्त कर रखा है.

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“मुंबई के एक अच्छे खासे दम्पति शादी के सात साल बाद तक कोई शारीरक सम्बन्ध बनाने में असमर्थ थे. उन्होंने कई डॉक्टरों से भी सलाह ली मगर कुछ भी फायदा होता नहीं दिख रहा था. फिर वो मेरे पास आये. मैंने उनसे पुछा की आप सेक्स के समय कौन सी पोजीशन में रहते हो तो उनका जवाब मुझे स्तब्ध कर गया. उन्होंने बताया की पत्नी अपने पैरों के सीधा रखती है और पति अपने पैरों को खोल कर रखता है. जब मैंने उन्हें सही पोजीशन बताई तो उनकी सारी मुश्किलें आसान हो गई और उसी रात उन्होंने एक पति पत्नी की तरह एक अच्छी रात बिताई।”
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चीफ सेक्सोलॉजिस्ट, गुजरात रिसर्च एंड मेडिकल इंस्टिट्यूट और सानिद्य इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ पारस शाह ये बताते हैं.डॉ शाह कहते हैं की भारत में तक़रीबन ३० प्रतिशत शादियां में नवदम्पति पहले वर्ष में कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना पाते. इसका मुख्य कारण है की तक़रीबन ४० प्रतिशत केस में महिलाएं सेक्स से अनभिज्ञ होती हैं, ४० प्रतिशत केस में पुरुष ज़िम्मेदार होते हैं और करीब २० प्रतिशत केस में दोनों ही ज़िम्मेदार होते हैं. अब इसमें भी आधे दम्पति इसलिए ज़िम्मेदार होते हैं क्योंकि इन्हें सेक्स को लेकर कोई भी सही जानकारी नहीं होती.

“एक बार एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी तीसरी पत्नी के साथ मेरे पास आया. उसके पास उसकी पत्नी की एक पूरी फाइल थी जिसमें उसकी पूरी मेडिकल रिपोर्ट थी. उसने बताया की उसकी पहली दोनों पत्नियों की भी रिपोर्ट बिलकुल नार्मल थी मगर फिर भी उसे पिता बनाने में सक्षम नहीं थीं. मैंने उसके सामने दो सलाह रखी– या तो वो एक बच्चा गोद ले लें या फिर वो कृतिम गर्भधारण के उपाय ढूंढे।

मेरी दोनों ही सलाह उनके परिवार को पसंद नहीं आई. पत्नी की सास ने कहा की ये तो उनकी पारिवारिक परेशानी है और पहले उनके पति को भी ऐसी ही परेशानी थी मगर फिर “धागा डोरा”के उपाय करके उनका इलाज़ हो गया और फिर उनके सात बच्चे हुए. मैंने उन्हें साफ़ साफ़ कह दिया की अगर उन्हें “धागा डोरा” ही करना है तो विज्ञानं उनकी कोई मदद नहीं कर सकता.”

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अज्ञानता और अन्धविश्वास बहुत गहरा है

नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी शादी के ४-५ सालों तक भी पिता बनने में असमर्थ थे. उनके कुछ जाँच हुए थे जिससे पता चला की उनके शुक्राणुओं की संख्या कम होने के कारण उनके लिए मुश्किल आ रही है. शुक्राणु कम होना बहुत गंभीर विषय नहीं है और अक्सर इसका इलाज़ हो जाता है. इन्होने भी कुछ इलाज़ कराये मगर कोई सकारात्मक फल नहीं मिला. आखिरकार उसे किसी ने एक तांत्रिक से मिलने की सलाह दी. तांत्रिक ने उसे कहा की अगर उसकी पत्नी उसके भाई के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाएगी तो वो माँ बन सकती है. तांत्रिक की इस सलाह को ये महाशय मानने को तैयार थे.

मैंने उन्हें समझा दिया की इस समस्या का हल दवाई है मगर दवाई चमत्कार नहीं है, जो खाते ही आपके शुक्राणु बढ़ा देगा. इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ा समय लगेगा मगर उस तांत्रिक के बातें बहुत ही बकवास हैं. मेरे पास वो व्यक्ति दोबारा कभी नहीं आया.

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हमारे समाज की सबसे बड़ी मुश्किल ये है की हमारे पुरुष कभी ये स्वीकार ही नहीं कर पाते की उनमें भी कोई कमी हो सकती है. इसे वो अपने “पुरुषत्व” का अपमान समझते है. उनका मानना है की अगर उनका शिश्र उत्तेजक हो रहा है तो उनमें कोई कमी नहीं हो सकती. और इसलिए उनके ख्याल से अगर कोई भी परेशानी है, तो वो स्त्री की ही होगी.

सेक्स का ज्ञान जीरो है

कई महिलाएं मेरे पास इस शिकायत के साथ आती हैं की सेक्स के बाद शुक्राणु बाहर आ जाता है और इसलिए वो गर्भवती नहीं हो पा रही. उन्हें इसका कोई अंदाज़ा नहीं होता की ये बिलकुल ही सामान्य सी बात है. हमारे देश में सेक्स की बिलकुल बेसिक जानकारी भी नहीं है. हम पंडित, तांत्रिक और धर्म गुरुओं के पास इन मुश्किलों के हल के लिए जाते हैं.

यह बहुत ही अजीब और गलत बात है. अब मैं अगर राजनीति के बारे में सलाह दूंगा, तो क्या वो सही होगा? जो लोग हमेशा ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, वो आपको सेक्स के बारे में क्या सलाह देंगे.
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