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क्या मैं अपने पति को बता दूँ कि मैंने उन्हें धोखा दिया?

उसका संबंध अपने पति के चचेरे भाई से था, वह गर्भवति हो गई और उसने बच्चा खो दिया। क्या उसे स्वीकार कर लेना चाहिए?
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(जैसा जोई बोस को बताया गया)

(पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

मैं कई बार आइने के सामने बैठकर वाक्यों का अभ्यास करती हूँ। मैं उन्हें यह बताती हुई कैसी दिखुंगी? फिर मैं नज़रे फेर लेती हूँ। मैं अनुमान नहीं लगा सकती कि उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी। क्या वह मुझे मारेंगे? क्या वह चिल्ला-चिल्ला कर सबको बता देंगे? क्या वह मुझे मेरे पिता के घर छोड़ देंगे? या फिर वह बस मुझे घर से बाहर निकाल देंगे? लेकिन मेरे भीतर की आवाज़ मुझसे कहती है कि मुझे उन्हें बताना ही होगा। वह कहती है, ‘‘मेघा तुम मानव से इतनी बड़ी बात नहीं छुपा सकती।” और फिर मैं उसे कहती हूँ, ‘‘मैं क्या बताऊं? क्या मैं कहूँ, ‘मानव तुम्हारे चचेरे भाई के साथ मेरा प्रेम संबंध रहा है’? या मुझे बस सरलता से कह देना चाहिए, ‘मानव, मैंने तुम्हें धोखा दिया है….’’’ स्थितियां काफी अजीब थीं और उनके लिए इन्हें संभालना शायद बहुत मुश्किल होगा।

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यह आरव के विवाह के दौरान हुआ। आरव मेरे पति मानव का चचेरा भाई है, जो उनसे कुछ साल बड़ा है और अमेरिका में एक शोध वैज्ञानिक है। वह 42 वर्ष का था लेकिन इससे पहले उसे शादी करने की फुर्सत ही नहीं मिली थी। यहां तक कि, पिछली बार जब वह भारत आया था तो मेरी शादी के लिए आया था और वह भी कुछ ही दिनों के लिए। अब जैसे ही उसने डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की, परिवार ने उसपर दबाव डाला और उसने भी पालन किया। हम सभी को लगा था कि शायद उसकी कोई फिरंगी प्रेमिका है और उसके पिता ने जासूसी एजेंसी को भी यह पता लगाने का कार्य सौंपा था, लेकिन पता चला कि वह सिर्फ काम में मशगूल था।

परिपक्व, एकल पुरूष

हमारे परिवारों के काफी आधुनिक होने के बावजूद, हम उससे ही शादी करते हैं जिसे हमारे परिवार चुनते है। प्रेम विवाह हमारे समुदाय में एक मिथक है। समुदाय में परिवार काफी करीब हैं और हम सब उसके नियमों का पालन करते हैं। अब, जैसे ही आरव ने स्वीकृति व्यक्त की, हम सभी संभावित वधु की तलाश में लग गए। हम एक संयुक्त परिवार में रहते हैं और आरव के माता-पिता और उसके बड़े भाइयों का परिवार भी हमारे ही साथ रहता है। हमारी रसोई में प्रतिदिन 18 व्यक्तियों का भोजन बनता है!

आरव के लिए लड़की ढूंढना मुश्किल था। उसकी उम्र की कोई भी लड़की हमारे समुदाय में अविवाहित नहीं थी। और ना ही कोई तलाकशुदा थी क्योंकि हमारे समुदाय में तलाक स्वीकार नहीं किए जाते हैं। साथ ही, कई लड़कियां अमेरिका में नहीं रहना चाहती थी या एक शोध वैज्ञानिक से शादी नहीं करना चाहती थीं, क्योंकि वे इतना धन नहीं कमा पाते हैं। अंत में हमें एक 35 वर्षीय अविवाहित लड़की मिली जो आरव के साथ शादी करने और घर बसाने को तैयार थी, लेकिन एकमात्र समस्या यह थी कि वह काली थी। जब उसकी तस्वीर आरव को भेजी गई, उसे कोई समस्या नहीं थी और शादी तय हो गई थी और आरव एक साल के लिए भारत आ गया।

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एक सहानुभूति वाला पुरूष

आरव मानव के विपरीत था। वह हमेशा स्त्रियों के साथ रसोई में रहता था और मज़ाक करता रहता था। उसने हमें अपने सहकर्मियों, उनके घरों और वह अपने दोस्तों के साथ क्या करता था उसके बारे में कहानियां सुनाई। लगभग ऐसा लगता था जैसे अमेरिका में एक शोध वैज्ञानिक के रूप में मैं रह रही थी। हम जो भी बनाते थे वह बिना किसी नखरे के खा लेता था जिसकी वजह से वह मुझे काफी पसंद आने लगा।

आरव के विपरीत, मानव को पराठे घी की बजाए मक्खन के साथ खाना पसंद था और अगर मैं कभी गड़बड़ कर दूं तो बहुत बड़ी बात बन जाती थी। और चूंकि बाकी पूरा परिवार घी वाले पराठे खाता था, मैं अक्सर गड़बड़ कर बैठती थी। इसलिए जब एक दिन मैंने मानव को मक्खन के पराठे की जगह घी का पराठा दे दिया, वह मुझ पर चिल्ला पड़ा। मेरी सास, ननद और चाची सास भी मुझ पर बरस पड़ी। ‘‘इतने साल हो गए हैं मेघा और फिर भी तुम भूल गई?’’ मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई और चूंकि यह आरव के सामने हुआ जो मेरे लिए नया था, मैं रोते- रोते बोल पड़ी ‘‘यह इतनी बड़ी बात नहीं है, अगर आरव मक्खन के पराठे नहीं खाएगा तो वह मर नहीं जाएगा!’’ मुझे बोला गया कि आरव की शादी से पहले कोई तमाशा ना करूं और अगर मुझे विराम चाहिए, तो मैं खुशी-खुशी अपने पिता के घर जा सकती हूँ।

मुझे तुम्हारी स्पष्टता बहुत पसंद है

उस रात मैं सो नहीं सकी। मानव मुझसे बात नहीं कर रहा था। वास्तव में, कोई भी मुझसे ठीक से बात नहीं कर रहा था। रात में लगभग एक बजे मैं अपने लिए पानी लेने गई। आरव वहां पर टीवी देख रहा था और जैसे ही उसने मुझे देखा, उसने कहा, ‘‘मेघा माफ करना। तुम सही थी! सुबह जो भी हुआ वह वास्तव में बेवकूफाना था।” मैं चुप थी। पता नहीं क्यों लेकिन मुझे उम्मीद थी कि वह मेरे पक्ष में बोलेगा। मैंने उसकी ओर नहीं देखा।

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वह उठ गया और पास आकर बोला, ‘‘मेघा, तुम जानती हो, तुम पटाखा हो! हमारे परिवार में लड़कियां कभी इस तरह नहीं बोलतीं और वह भी सबके सामने और जब तुमने ऐसा किया, मैं काफी विस्मित हो गया था। उम्मीद है कि मेरी पत्नी भी ऐसी होगी। मुझे दब्बू लड़कियां पसंद नहीं हैं….’’

उसकी ओर देखकर मैं तपाक से बोल पड़ी, ‘‘यही तो समस्या है। हम सब श्रेष्ठ स्कूलों में जाते हैं और नवीनतम टीवी शो और फिल्में देखते हैं, हम आधुनिक लोगों को देखते हैं और हमारे पुरूष आधुनिक स्त्रियों की सराहना करते हैं। लेकिन घर पर, हर एक को दब्बू नौकरानी चाहिए! और मैं कुछ कर भी नहीं सकती, क्योंकि मेरे पिता के घर में भी चीज़ें ऐसी ही हैं। काश मैं यहां पैदा ही नहीं होती!’’ आरव ने ऐसे उत्तर की अपेक्षा नहीं की होगी। वह मेरी तरफ मुड़ा और मेरे चेहरे को थाम कर मेरे होंठों को चूम लिया। जब वह मुझे उसके कमरे में ले जा रहा था तब मैंने उसे रोका नहीं। मैंने उसे तब भी नहीं रोका जब वह धीरे-धीरे मेरे कान चूमने लगा और उसके हाथ मेरे कपड़ों के भीतर सरकने लगे।

हमने उसकी शादी के बाद भी यह जारी रखा

जो उस रात शुरू हुआ, वह हर बार हमें अवसर मिलने तक जारी रहा। मैं बेशर्मी से आरव से प्यार करती थी। लेकिन फिर, आरव की शादी हो गई और उसकी पत्नी भी हमारे साथ रहने आ गई। वह अच्छी थी और अपनी परेशानियां मेरे साथ बांटती थी। लेकिन उसकी वजह से मैंने आरव के साथ होना बंद नहीं कर दिया। मुझे आरव का स्पर्श और उसके कृत्य और हमारी बातें बहुत पसंद थीं…उसने मुझे बताया कि उसकी पत्नी बिस्तर पर बहुत ठंडी थी। उसने मुझे बताया वह कितनी मूर्ख थी। हम नहीं जानते थे कि हम कहां जा रहे थे। नया होने के बावजूद उनका विवाह उतना ही बेस्वाद था जितना मेरा और मानव का, लेकिन वास्तविक जीवन में विवाह ऐसे ही होते हैं।

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नया होने के बावजूद उनका विवाह उतना ही बेस्वाद था जितना मेरा और मानव का, लेकिन वास्तविक जीवन में विवाह ऐसे ही होते हैं।

छह महीने पहले मैं गर्भवती हो गई। मैं नहीं जानती थी कि यह किसका बच्चा है। इसलिए मैं चुप रही। मैं भयभीत थी। बात करने के लिए कोई नहीं था। मैंने कई बार सोचा कि क्या मैं आरव को बता दूँ…और फिर मैंने उसे बता ही दिया। वह पूरी तरह जड़वत् हो गया। वह एक भी शब्द कहे बिना मुझसे दूर चला गया। तब मुझे अपराधी जैसा महसूस हुआ और जीवन, या कर्म या भगवान, आप जो भी नाम दें, उसने प्रतिशोध लिया। मेरे साथ एक दुर्घटना हो गई। शायद मेरा ध्यान नहीं था। मैं सड़क पार कर रही थी जब एक कार ने मुझे टक्कर मारी दी। आंख खुली तो मैं अस्पताल में थी। मेरे पैर, गरदन और पीछ की हड्डी टूट गई थी। और मैंने अपना बच्चा खो दिया। आरव कभी अस्पताल नहीं आया। उसकी पत्नी आई। और मानव आया।

मेरा जीवन अब वापस उसी मोड़ पर आ गया है जहां यह था। लगभग। सिवाए इसके कि मैं सोचती हूँ। हर एक पल। क्या जो भी हुआ वो मुझे अपने पति को बता देना चाहिए?

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