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क्या सिखाते हैं देवी-देवता हमें दांपत्य जीवन के बारे में

दांपत्य जीवन में परस्पर प्रेम से भी ज़रूरी है, परस्पर आदर. और ये समझने के लिए हमें आज के समाज में देखने की ज़रुरत नहीं, अगर अपने देवी देवताओं की कथा सुने तो काफी कुछ समझ जायेंगे...
Shiv-and-Shakti

अभी कुछ दिन पहले राजस्थान उच्च न्यायलय के एक जज ने जब ये कहा था की मोर ब्रह्मचर्य का पालन करता है और मोरनी तो उसके आंसुओं से ही गर्भवती हो जाती है, मेरे कई दोस्त बहुत अचंभित हो गए. मेरे विचार थोड़े अलग हैं. मैं ज़्यादा चौंका नहीं ये सुनकर. आखिर कुछ दिन पहले ही तो मैंने इससे भी अजीब एक कहानी सुनी थी. कहानी थी हमारी सरस्वती देवी की और कैसे उनका जन्म ब्रह्मा के शुक्राणु से हुआ था और न की किसी स्त्री के गर्भ से. अब यह थी मेरे लिए कुछ चौंकाने वाली बात.

मैं इस को कथा सुनकर खुद को रोक नहीं पाया और अपनी पत्नी को ये पूरी कहानी बताई. पत्नी थोड़ी ज़्यादा ही समझदार है और मेरे इस तर्क को की कभी पुरुष ने बिना स्त्री की मदद के जीवन दिया दिया, को वही धराशाई कर दिया. उसने मुझे कहानी फिर से सुनाई. ब्रह्मा को उर्वशी नामक एक अप्सरा से प्रेम हो गया था. मगर उर्वशी को प्रभु में कोई दिलचस्पी नहीं थी. तो ब्रह्मा दूर से ही उर्वशी को देख उत्तेजित हो जाते थे, और उन्हें अपने शुक्राणु एक पात्र में इखट्टा कर लिए, ठीक वैसे ही जैसे आजकल IVF क्लिनिक करते हैं. बस अन्तर इतना था की आज कल की तरह उस समय ये विधि उतनी महंगी नहीं थी और न आजकल की तरह किसी स्त्री के गर्भ में उसे रखने की ज़रुरत ही पड़ी. पत्नी ने कहानी तो सुनाई और साथ साथ ये ताना भी दिया की हम सब मर्द एक से ही हैं, जो स्त्रिओं को मात्र भोग विलास की वस्तु समझते हैं, उनसे प्रेम नहीं करते.

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