क्या विवाह सेक्स के आनंद को खत्म कर देता है?

Raksha Bharadia
Night-of-Intimacy

व्हाय इज़ सेक्स फन? के लेखक जेरड डायमंड के अनुसार, हमारी कामुकता, जो हमें सामान्य प्रतीत होती है, अधिकतर प्रजीतियों से तुलना करने पर विचित्र लग सकती है। हम मानव एकांत में सेक्स करते हैं, माह या वर्ष के किसी भी दिन, तब भी जब स्त्री गर्भवती हो, उसके प्रजननीय वर्षों के बाद भी, या फिर उसके उपजाऊ चक्र के दौरान। हम अंतरंगता और बंधन को विकसित करने के लिए सेक्स का इस्तेमाल करते हैं, और सबसे महत्त्वपूर्ण हम मज़े और आनंद के लिए सेक्स करते हैं। हम सृजनात्मक, अविनाशी, निरंतर और अनैतिक रूप से कामुक हैं, और हमारा विचित्र सेक्स जीवन हमारी मानव प्रतिष्ठा के उदय में उतना ही महत्त्वपूर्ण था जितना कि हमारा बड़ा मस्तिष्क।

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प्रचीन भारत से मध्ययुगीन तक, किताबों से गीतों तक, चित्रों से मूर्तियों तक, लोककथाओं से नृत्य तक, घरेलू से पवित्र तक, हमारे मंदिर, हमारे ग्रंथ, लिखित और मौखिक, हमारा संगीत और हमारी प्रदर्शन कलाएं गवाही देती हैं कि सदियों तक कामुकता को कितनी उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त होती रही है। हमने हमेशा मानव शरीर और उसके आनंद देने की क्षमता का उत्सव मनाया है। हम कामसूत्र की भूमि हैं!

लेकिन रास्ते में कहीं ना कहीं, (मुगल आक्रमण, विक्टोरियन नैतिकतावाद) सेक्स गलत हो गया। कामुकता का उत्सव मनाने से लकर हम चुप्पी और प्रतिबंध का समाज बन गए। जो एक समय पर सुंदर और इतना शुभ माना जाता था कि मंदिर की दिवारों पर अंकित किया जा सके, अब ऐसा कुछ बन गया जो छुपाने योग्य है और जिसके बारे में बात नहीं करनी चाहिए। जो कभी एक खुला रूख था वह अज्ञानता और शर्मिंदगी में बदल गया। यह खुशी और अंतरंगता जैसे शब्दों से रहित, कर्तव्य और प्रजनन संबंधी बन गया।

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और फिर रूमानी प्रेम का उदय एक बार फिर प्रेम के यौनकरण की ओर अग्रसर हुआ। वैवाहिक जुनून पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया। विवाह में सेक्स उसकी महान ‘दवा’ बन गया। और अंतरंगता, मनोरंजन और आनंद के अपने नए लक्ष्यों के साथ सेक्स अधिक मांगों से भर गया। अब इसे अच्छा होने के लिए ‘उत्तम’ होना था।

हालांकि सेक्स एक बहुत अधिक निजी कार्य है, इसके मानक विभिन्न माध्यमों के माध्यम से मज़बूती से लगाए जाते हैं। कामुक गतिविधि का कोई आदर्श स्तर नहीं है; यह लोगों, स्थितियों, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रथाओं से फिटनेस स्तर आदि तक वरीयता लिए होता है। फिर भी हम पर निरंतर संख्याओं की बौछार की जाती है, प्रारंभिक वर्षों में कितनी संख्या सामान्य है, बाद में कितनी; हमें बताया जाता है कि क्या सामान्य है, हम मानते हैं कि पुरूष कामेच्छा स्त्रियों की तुलना में अधिक है। यह एक अच्छी तरह से ज्ञात और अनुभवी तथ्य है कि विवाह के परिपक्व होने के साथ इच्छाएं घटती जाती हैं, फिर भी हमें ‘अंतहीन इच्छा’ के विचार की पट्टी पढ़ाई जाती है। बेनेडेटो क्रोस (इतालवी दार्शनिक) ने कहा है कि विवाह ‘उन्मुक्त प्रेम की कब्र है’, फिर भी हम इस स्वाभाविक पतन के लिए अपने साथी या उससे भी बदतर स्वयं को दोष देते हैं। हम विरोधाभास, उलझन एवं असंतोष के जाल में जीते हैं; सर्वेमंकी के माध्यम से हमने जो सर्वेक्षण किया उसने हमें कुछ दिलचस्प आंकड़े प्रस्तुत किए।

क्या आप जानते हैं कि 53 प्रतिशत जोड़ों को लगता है कि उनके साथी उनके सेक्स जीवन से अप्रसन्न हैं, या उससे भी बुरा, वे नहीं जानते कि वे कैसा महसूस करते हैं; लेकिन यह पूछे जाने पर कि अपने सेक्स जीवन में समस्याएं होने पर क्या वे कभी किसी सलाहकार के पास गए हैं, 93 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक उत्तर दिया?

क्या आप जानते हैं कि 43 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि बगैर सेक्स के भी विवाह सुखी हो सकता है केवल प्यार (एक साथी के रूप में) के साथ? लेकिन जब हमने उनसे पूछा कि उनके साथी का वफादार होना कितना महत्त्वपूर्ण है, 86 प्रतिशत लोगों की भारी मात्रा ने कहा ‘महत्त्वपूर्ण है’।

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