क्या विवाहित भारतीय महिलाओं को उन अविवाहित महिलाओं से असुरक्षा का एहसास हुआ करता है जिनसे उनके पति मिलते हैं?

by Team Bonobology
man with two woman

[vc_row][vc_column][vc_column_text]अक्सर यह कहा जाता है कि महिलाएं छोटी छोटी बातों पर एक दुसरे को हानि पहुंचा सकती हैं और वे एक दुसरे की सबसे बुरी दुश्मन हुआ करती हैं | नारीवाद के प्रति हमनें जो विकास पाया है और जिन सामाजिक आर्थिक समस्याओं का सामना महिलाओं को करना पड़ता है, इस विषय पर आपके क्या विचार हैं? सालों से हमें एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए सामाजिक मानदंडों के आधार पर तैयार किया गया है और जब संबंधों की बात आती है, तो प्रेमपूर्ण एकजुटता से अधिक तीव्रता ईर्ष्या की हो जाया करती है । पुरानी धारणा के अनुसार महिलाएं औपचारिक और अनौपचारिक परिस्थितियों, दोनों, में अविवाहित महिलाओं के साथ सामाजिकरण करने वाले अपने पतियों की प्रतिबंधी हैं | यह धारणा आज भी एक वास्तविकता बनी हुई है। हमने इस सवाल को हमारे फेसबुक ग्रुप ‘इंडियन वोमेन डिसकस‘ पर पुछा और यहां हमारे सदस्यों से हमें कुछ रोचक टिप्पणियां प्राप्त हुईं ।

क्या भारतीय विवाहित महिलाओं, पेशेवर या गृहिणी, को अपने पतियों के आस-पास होने वाली आत्मनिर्भर महिलाओं (अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा) से असुरक्षा का एहसास हुआ करता है?

क्या महिलाएं अपनी सबसे हानिकारक दुश्मन हैं?

[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]amreeta sen[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]ब्लैक विदो सिंड्रोम‘! यह एक परिस्थिति है जब महिलाएं महिलाओं के विरुद्ध कुछ करती हैं! जब कुछ भी नहीं हो रहा होता है, तब भी अविवाहित महिलाओं को दुर्भावनापूर्ण प्रकार से खींचती हैं, परन्तु यह उनकी अपनी ही मौलिक असुरक्षाओं की एक रचना हुआ करती है । यह एक समस्या है जिसे दूर करना कठिन है, क्योंकि आप मूल रूप से अपने आप से ही लड़ रहे होते हैं ।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”अमृता सेन” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Shruti Swaroop[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]मैं उन महिलाओं को जानती हूं जो अन्य विवाहित महिलाओं से भी असुरक्षित हैं! मैं इस असुरक्षा को कभी नहीं समझी । यदि कोई मर्द जाना चाहता है, तो वह चले जाएगा – आप एक आदमी को तब तक नहीं रख सकती हैं जब तक वह खुद ही रहना नहीं चाहता![/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”श्रुति स्वरुप” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Joyeeta Talukdar[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]ब्लैक विडो सिंड्रोमके रूप में जाना जाता है, जहां एक महिला दूसरों के सामने दुखी और असुरक्षित हो जाती है क्योंकि वे वह सब पाने का प्रयास करती हैं जो उनके पास नहीं है, क्योंकि गृहिणी केवल काम करने वाली महिलाओं की आज़ादी को देखने में सक्षम हैं, परन्तु उन्हें इस आज़ादी के पीछे का संघर्ष नहीं दिखता । मुझे लगता है कि गृहिणियों को वास्तव में वह आजादी नहीं मिलती है, जिससे उन्हें पेशेवर महिलाओं से जलन हुआ करती है।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”जयिता तालुकदार” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Dipanjana Gupta[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]मेरा मानना है कि महिलाओं को तब असुरक्षा का एहसास हुआ करता है जब उनके पति उन्हें अपने कार्यों और गतिविधियों के कारण दिया करते हैं । उदाहरण के लिए, महिलाओं के प्रति उनका अधिक अनुकूल व्यवहार।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”दीपांजना गुप्ता” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Jeeta Mohanty[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]यह सच है कि हमें असुरक्षा का एहसास हुआ करता है । क्योंकि हम सदैव हमारी नौकरानी और बच्चों चिल्ला रहे होते हैं या कुछ विक्रेताओं के साथ मोल तोल कर रहे होते हैं । किसी भी तरह से हम इस चिल्लाहट और मोल तोल में मर्यादाहीन हो जाते हैं। फिर एक दिन अनजाने में हम अपनी देख भाल करना बंद कर देते हैं। सब कुछ हमारे लिए दैनिक काम हो जाता है, चाहे वह पति के साथ चाय पीना हो या पति के साथ सोना हो । इस स्थिति में यदि हम देखते हैं कि पति अपने दिन का एक बड़ा भाग एक अच्छी तरह से तैयार, नरमी से बात करने वाली और समझने वाली महिला के साथ बिता रहा है, तो असुरक्षा का एहसास होना स्वाभाविक है। फिर यह, शिक्षा के बावजूद कमाई ना करने जैसी परिस्थिति सहित, पहले से ही उपस्थित असुरक्षा को बढ़ा देता है |[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”जीता मोहांती” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Divya Nair[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]मेरे अनुसार यह आप पर निर्भर करता है । यदि आप एक सुरक्षित महिला हैं जिनके मित्र अविवाहित मर्द हैं और आप अपनी सीमा जानती हैं और विश्वास है कि आपके पति भी ऐसा करने में सक्षम हैं, तो असुरक्षा का कोई कारण नहीं होगा।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”दिव्या नायर” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Upasana Tibrewal[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]असुरक्षा तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक पति / साथी ने उसे कोई कारण नहीं दिया हो! हालांकि, मैंने निश्चित रूप से ऐसे मामले देखे हैं जहां महिलाएं असुरक्षित हैं … कोई भी निष्कलंक नहीं है – कोई महिला नहीं, ना ही कोई पुरुष; फिर भी, महिलाएं असुरक्षा के शिकार होने लगती हैं ! एक बार फिर, यह निर्भरता का परिणाम लगता है और इस प्रकार महिलाओं के लिए अधिक चीज़ें दाँव पर हैं । वर्षों में विकसितहुई पितृसत्ता, बदबूदार है। यह सभी लिंग संबंधी बुराइयों का कारण है! हम सभी महिलाओं की असुरक्षा को देख सकते हैं; हम जो देखने में नाकाम रहे हैं वह यह है कि पितृसत्ता पुरुष असुरक्षाओं से विकसित हुई है, वे शक्ति को महिलाओं के हाथों से बाहर रखने के लिए एकजुट हो रहे हैं ![/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”उपासना टिबरेवाल” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]Jayshree[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]मैं असुरक्षित नहीं कहूंगी, परन्तु भारतीय विवाहित महिलाएं, विशेष रूप से, नई माताएं, खुद की महिलाओं के दूसरे समूह से तुलना करना शुरू कर देती हैं, जिनके पास शायद खुद को तैयार करने का अधिक समय होता है और इसके कारण वे व्याकुल और न्यायिक हो जाती हैं ।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”जयश्री कृष्णंकुट्टी” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]arundhati ghosh[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]आत्म-मूल्य की कमी का संयोजन जो दुनिया के द्वारा बनाया गया है, आपको हर दिन बताता है कि आपका सामाजिक मूल्य आपके पति से आता है, पति को आपके द्वारा बनाई गई दुनिया के केंद्र के रूप में देखकर और यह विचार कि सभी अविवाहित लोग केवल संबंध की खोज में हैं।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”अरुंधति घोष” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]kavita panyam[/vc_column_text][vc_empty_space][/vc_column][vc_column width=”1/2″][vc_empty_space][vc_column_text]निर्भर करता है। परन्तु, आधारभूत यह है कि बहुत कम पुरुष अन्य महिलाओं के लिए अपनी पत्नियों और परिवारों को छोड़ते हैं। तो यह केवल विचलन का एक साधन है। विवाहित महिलाएं, जो होशियार और सक्षम हैं, उन्हें अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।[/vc_column_text][vc_empty_space][vc_text_separator title=”कविता टी. पण्यम” color=”black” style=”shadow”][vc_empty_space][/vc_column][/vc_row][vc_row][vc_column][vc_column_text]

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