क्यों बॉलीवुड फिल्मों को ‘दी एंड’ की बजाय ‘दी बिगनिंग’ पर खत्म होना चाहिए?

Roopal Kewalya
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बॉलीवुड के ईस्टमेनकलर दिन याद हैं? हिंदी फिल्म की समाप्ति सूर्यास्त में प्रवेश करने जैसी थी -हीरो और हिरोईन की शादी हो जाएगी और वे अज्ञात भविष्य की ओर चल देंगे जिसके बारे में हमें कभी कुछ पता नहीं होगा सिवाय समाप्ति क्रेडिट के जिसमें लिखा होता था ‘दी बिगनिंग’ जिसने भी फिल्म को ‘दी एंड’ की जगह ‘दी बिगनिंग’ पर खत्म करने के बारे में सोचा होगा उसका सेन्स ऑफ ह्यूमर कमाल का रहा होगा। ज़ाहिर सी बात है कि ये शब्द अमंगलसूचक हैं। लगभग उस सनकी अंकलजी की तरह जो आपकी शादी में आपके पीठ पीछे हँसते हैं और पती-पत्नी वाले चुटकुले सुनाते हैं जैसे की ‘‘अब तुमको पता चलेगा।”

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शब्दों की विडंबना को देखें – ‘दी बिगनिंग’। इसे आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली शहनाई की आवाज़ की जगह एक डरावनी हँसी की बेकग्राउंड आवाज़ के साथ आना चाहिए था। और फिर उसका एक सिक्वल आना चाहिए था बच्चों के साथ। जिसका समापन क्रेडिट होना चाहिए था – ‘‘आपने सोचा था कि वह शुरूआत थी?’’

शादी का लड्डू

शादी के लड्डू की कहावत सबसे उपयुक्त है। ना तो आप इसे निगल सकते हैं और ना ही उगल सकते हैं। इसकी कगार पर खड़े लोगों की बहुत सूक्ष्म रेखा है। वे जो दूर रहते हैं कभी नहीं जान पाएँगे कि यह क्या है और जो पार कर जाएंगे वे अंततः उस पागल लाफ्टर क्लब में भेज दिए जाएँगे जिनका प्रतिनिधित्व वॉट्सऐप के शादी पर आधारित चुटकुले करते हैं।

मुझे समझ नहीं आता कि क्यों पीढ़ी दर पीढ़ी मौत में मुँह में जाती है और इस प्रथा को आगे बढ़ाती है। संतान को जन्म देने के अलावा भी इसमें कुछ होता होगा…..शायद अपनी ज़िंदगी किसी के साथ बाँटना। और अगर अंततः यह केवल बाँटने के विषय में है, तो क्यों इतने सारे लेख आपको बता रहे होते हैं कि आपके रिश्ते को कैसे सशक्त करें, अपने विवाह को जीवित और सक्रिय कैसे रखें? आपके मन के लिए स्वस्थ बैक्टीरीया की तरह।

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बेडरूम में स्टेमिना और उसके बाहर दीर्घायू होने के लिए एक बाबा द्वारा दी गई जड़ीबूटी युक्त प्रोबायोटिक्स सहित एक जैविक विवाह।

वह विशेष बंधन

मज़ाक को अलग रखते हुए, मैं मानती हूँ कि एक स्वस्थ विवाह या साझेदारी लंबे समय में आराम प्रदान करती है। यह आपको अपने साथी पर एक प्रभुत्व का अहसास देती है। इसलिए अजनबियों से भरे कमरे में जब आप वह एक विशेष आवाज़ सुनते हैं…उस हाथ को हल्के से स्पर्श कर देते हैं….कमरे में एक दूसरे को देखते हैं, वह आपके मस्तिष्क में ऑक्सीटोसीन छोड़ता है जो आपकी हृदयगति को स्थिर करता है और आपको सर्दियों के सूर्य की तरह गर्मजोशी से भर देता है।

जिस अत्यंत व्यक्तिपरक दुनिया में हम रहते हैं उसमें, विवाह, यदि वर्तमान समय के लिए उसकी पुनः व्याख्या की जाए, तो आपके घायल, सोशल मीडिया के भीड़ भरे शोर में तन्हा मन के लिए एक बेंडेज बन सकता है।

मुश्किल यह है कि एक विवाह को लंबे समय तक कैसे जीवित रखा जाए?

आपकी शादी को कैसे कायम रखा जाए?

मुझे लगता है कि शादी एक कला है। और हर श्रेष्ठ कलाकृति आसान दिखती है। लेकिन हर कलाकार सहमत होगा कि उसे कलाकृति के उस सर्वश्रेष्ठ संस्करण – जिसे वह दुनिया को दिखाता है, तक पहुँचने के लिए कई घंटों का परिश्रम करना पड़ा है।

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बिल्कुल शादी की तरह। आप हर दिन हर समय उस पर काम करते रहते हैं, ना केवल एक दैनिक कार्य को खत्म करने के समान बल्कि एक पैशन को हासिल करने की तरह। हाँ, हताशा भरे वे दिन भी आते हैं जब आप लगभग हार मान लेते हैं लेकिन अत्यंत इच्छित खुशी का अंतिम परिणाम आपको बाँधे रखता है।

किसी भी सफल लेखक से पूछने पर वह पहली टिप आपको यही बताएगा की केवल लिखने की टेबल तक पहुँच जाएँ। चाहे आप पेपर पर एक भी शब्द ना लिखें, आप आ गए केवल इतना ही पर्याप्त है। डटे रहना। वह गुण जो कई ‘लगभग-सफल’ कलाकारों की पकड़ में नहीं आता।
एक शादी में भी, आपको बने रहना होगा। हर दिन। हर रात। एकमात्र अंतर यह है कि यहाँ दो कलाकार हैं जो समान परिकल्पना का अनुसरण करते हैं। जिस दिन आपकी परिकल्पना बदल जाती है, फिर विवाह काम नहीं करता। भले ही वह परिकल्पना मोनोगेमी हो या ओपन रिलेशनशिप….एक दूसरे के सपनों का समर्थन करना….सास-ससुर के साथ रहना है या नहीं….बच्चों को पालने में बराबरी की भागीदारी…जहाँ तक परिकल्पना स्पष्ट है और उसका अनुसरण सच्चाई से किया जा रहा है, विवाह काम करता है।

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यह उतना ज़्यादा मुश्किल भी नहीं है। सिद्धांत और व्यवहार में, यह केवल साथ चलना, हाथ थामना और शायद समय-समय पर एक दूसरे के रास्ते से पत्थर और काँटे हटाना, पार करने में एक दूसरे की मदद करना, रास्ते में गुलाबों की खुशबू सूंघना, उस स्वीकृत सूर्यास्त की ओर जाना है। जिसे हम ‘दी बिगनिंग’ कहते हैं।

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