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जब मेरे माँ बाप ने मुझे शोषित होने पर चुप रहने को कहा

जब एक आठ साल की बच्ची का यौन शोषण करीबी रिश्तेदार ने किया और घरवाले चुप सब दबाते रहे. सालों बाद क्या वो अपने पति पर विश्वास कर पाएगी?
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जब एक बड़े ने एक बच्चे का विश्वास तोडा

उसने मुझे पहली बार तब दबोचा था जब मैं ८ या ९ साल की थी. वो मेरी माँ के कजिन, और मेरे फूफाजी भी थे. हमारा छोटा सा घर था, और घर पर मेरे माँ पिता और मेरा भाई भी थे. मगर फिर भी उस राक्षस ने मौका देख कर मुझे शोषित किया. वो मुझे मेरे माँ पिता की बैडरूम में ले गया और मुझे ज़ोर से पकड़ लिया. फिर उसने अपने हाथ मेरी फ्रॉक के अंदर डाले और मेरे होंठ काट डाले.

मेरी मम्मी उस समय किचन में थी और मैं उनके पास ऐसे भागी जैसे कोई मेमना शेर के कब्ज़े से निकल कर भागता है. मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मगर वो अनुभव इतना घिनोना था की मैंने माँ को सब कुछ बता दिया. मगर परिवार की खोखली इज़्ज़त के सामने एक आठ साल की बच्ची की क्या बिसात हो सकती थी. मेरे पिता में इतनी हिम्मत नहीं थी की वो अपनी बहन के पति से कुछ भी पूछते. मैं बिलकुल सकते में थी. अजीब था क्योंकि मुझे पूरी उम्मीद थी की माँ तो कुछ ज़रूर करेंगी. मगर वो भी शांत रहीं.

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फिर वो दोबारा हुआ

मानती हूँ की वो कुछ नहीं कर पा रहे थे मगर क्या वो थोड़ा सतर्क भी नहीं हो सकते थे?

अगर उन्होंने थोड़ी सी सावधानी बरती होती, तो मैं और प्रताड़ना से बच पाती. उस घटना को कुछ साल हो गए थे. हम सब को बुआ के घर रक्षा बंधन पर निमंत्रण था. बुआ का घर मेरे नानाजी के घर के बिलकुल पास था. वो इंसान वहां आया मेरी माँ से राखी बंधवाने के लिए. क्या आपके पैरों के नीचे से भी ज़मीन निकल गई ये जान कर की मेरी माँ अब भी उसे राखी बांधती थी. खैर, वापसी के समय उसने सलाह दी की वो मुझे और मेरे भाई को घर ले जाये, जब तक माँ पिताजी अपना यहाँ का काम निबटा लेंगे. मेरे माँ पिता को इस बात से कोई आपत्ति नहीं हुई और उन्होंने मुझे उनके साथ बेहिचक जाने दिया. मैंने बार बार इसका विरोध किया मगर उन “समझदार” बड़े लोगों के बीच मेरी आवाज़ और मेरी घबराई धड़कन कोई नहीं सुन रहा था.

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