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शादी के बाद भी मेरी माँ मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं

मेरी माँ मेरे लिए मेरे लिए बहुत महत्त्व रखती है. इतनी की मैं उनके लिए अपनी पत्नी से भी अलग हो सकता हूँ.
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(जैसा की देबाशीष मजूमदार को बताया गया)

मेरे लिए बचपन से ही मेरे माँ बाप बहुत मायने रखते हैं, ख़ास कर मेरी माँ. उन्होंने मेरे लिए मेरे दोस्त चुने, मेरे खानपान की रूचि तय की और यह भी तय किया की मुझे किस तरह के खेल और एक्टिविटीज में हिस्सा लेना चाहिए. मेरे लिए सब बहुत सहज हो जाता था, इसलिए मैंने भी कभी उनके फैसलों का विरोध नहीं किया.

जब मैं अपनी भावी ज़िन्दगी के फैसले ले रहा था और सोच रहा था की मैं आगे क्या करूँ, मेरी माँ ने मुझे सलाह दी कि मैं डॉक्टर बनूँ. इस तरह मैं आगे जाकर अपने बुज़ुर्ग माँ बाप के किसी काम तो आ पाऊँगा. उनकी सलाह मान कर मैं आँखों का डाक्टर बन गया.जब बात जीवनसाथी चुनने की आयी, तो मेरी माँ मेरे साथ लड़की के घर गई. लड़की बहुत ही शिक्षित थी, बच्चों की डॉक्टर थी. मुझे यकीन था की अगर मैंने इससे शादी की तो वो यक़ीनन मेरे भावी बच्चों के लिए बहुत ही बेहतरीन माँ साबित होगी. माँ को लड़की पसंद आयी और हमारा रिश्ता तय हो गया.

माँ हमारे साथ हनीमून पर गई

हमारी शादी के बाद जब हम हनीमून की प्लानिंग कर रहे थे तो माँ ने कहा कि वो भी हमारे साथ जाना चाहेंगी. मैं माँ को दुखी नहीं करना चाहता था इसलिए अपनी पत्नी को समझने लगा. मैंने जब उसे कहा की शायद माँ का जाना हमारे लिए काफी अच्छा होगा, वो बहुत परेशां हो गयी. मगर उसने ज़्यादा कुछ कहा नहीं, और न हमारे इस फैसले का कोई विरोध किया.

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जब आपका जीवनसाथी आपका परम मित्र ना हो

मेरे सास -ससुर शय्याग्रस्त (बिस्तर पर) हैं और मैं अपना काम, परिवार और उनकी देखभाल संभाल नहीं पा रही हूँ। मैं अपने पति से उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के बारे में बात भी कैसे करूँ?

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