माँ बनने के बाद पत्नी ने डिप्रेशन में अपनी जान दे दी

Indira Nityanandam
crying woman with child

(जैसा इंदिरा नित्यानन्दम को बताया गया)

कॉलेज में शुरू हुए प्यार के बाद हम पति पत्नी बन गए

अनाहिता सो रही थी. जब मैंने उसके गालों को प्यार से छुआ, तो वो मासूम अपनी नींद में ही मुस्कुराने लगी. गहना मुझे ये अनमोल तोहफा देकर हमारी ज़िन्दगी से चली गई थी और मैं आज तक कई प्रश्नो के जवाब ढूंढ़ता फिर रहा हूँ.

यादें मगर कहाँ पीछा छोड़ती हैं. उन हसीं पहले कुछ सालों की यादें जब हम नए नए मिले थे और वो रातों को सहमा देने वाली यादें जब वो उसके मेरे साथ आखिरी कुछ दिन थे. कभी कभी लगता है की काश मेरे पास एक डिलीट बटन होता जो मैं जब चाहे दबा देता और इन यादों से मुक्ति मिल जाती. मगर न मैं कंप्यूटर हूँ न यादें कोई डाटा जो डिलीट हो सके. मैं एक हाड़ मांस का इंसान हूँ और शरीर के अलावा मेरे अंदर गम ख़ुशी, उमीदें, डर और हाँ, बहुत सारी यादें हैं जो हमेशा साथ रहेंगी.

मैं हम दोनों की वो पहली मुलाकात कैसे भूल सकता हूँ जब एक कॉमन दोस्त ने यूनिवर्सिटी के गलियारे में हमारा परिचय करवाया था. वो शर्मा कर मुस्कुराई थी. और फिर हम दोनों के बीच दो साल कहाँ गुज़र गए, पता ही नहीं चला. हम परिचित से दोस्त बने और फिर कब दोस्ती गहरे प्यार में बदल गई, हम सचमुच जान ही नहीं पाए. हमारे दोस्त भी अब हमें हमेशा “अमित और जया” ही बुलाते थे. मैं छह फ़ीट का और वो पांच फ़ीट की. हम दोनों एक दुसरे के बिना तो जैसे कभी रहते ही नहीं थे, कहना नहीं होगा की हमारा बहुत मज़ाक भी बनता था मगर हम प्यार में थे और दो प्रेमियों के इन सब बातों से कहाँ फ़र्क़ पड़ता है.

प्यार जब और पनपा तो शादी का ख्याल आया. हम दोनों ने शादी के बाद उस छोटे से घर को ही अपनी पूरी दुनिया बना ली. हमें किसी तीसरे की ज़रुरत नहीं थी और शायद किसी और को भी हमारी ज़रुरत नहीं थी. बाहरी दुनिया में हम दोनों के माता पिता ही थे जिनसे हमारा कोई लेना देना रहता था. और हाँ इसके अलावा हम दोनों शिक्षक थे और हमारी नौकरी काफी थी हमारे चावल और सांभर के लिए.

वो गर्भवती हुई और हमारे बीच सब बदल गया

हमारे बीच सब कुछ कब बदला? क्या मैं वो एक पल, लम्हा, घटना बता सकता हूँ जब मुझे लगा की हमारे बीच सब कुछ बदलने वाला है? गहना गर्भवती थी और मैं एक बहुत ही ज़िम्मेदार पति बनने की भरकस कोशिश कर रहा था. मैं उसके लिए खाना बनाता, सफाई करता, सब कुछ करता ताकि वो खुश रहे. मगर वो मुझे बार बार अपने पास से झटक देती थी. मैं उसके कंधे पर प्यार से हाँथ रखता और वो निर्ममता से उसे हटा देती, उसे बाहों में लेता तो वो बिलकुल जड़ हो जाती. मुझे उसका बदला हुआ व्यव्हार उसकी प्रेगनेंसी के कारण लगा. और फिर हमारे जीवन में सी जान अनहिता आए. मैं तो सातवे आसमान पर था, मगर गहना.. उसे तो जैसे कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ रहा था. डॉक्टर ने मुझे अलग बुला कर कहा की गहना को पोस्ट-पार्टम ब्लूज हो रहे हैं जो कई बार नयी माँ को होता है और वो उसके कारण डिप्रेस हो जाती हैं. मुझे उनकी बातें कुछ समझ नहीं आ रही थी मगर मैं बस यूँ ही हामी में सर हिलाता गया. मैंने उसकी माँ को आग्रह किया की वो कुछ दिन आकर हमारे साथ रहे और वो बहुत ही बेमन से हमारे साथ रहने को तैयार हुईं.

जब हम हॉस्पिटल से घर जाने के लिए तैयारी कर रहे थे तो गहना वाशरूम में चली गई. बहुत देर तक जब वो वाशरूम से नहीं निकली तो मैंने उसे आवाज़ लगाना शुरू किया. रूम के बाहर से लोगों की बहुत आवाज़ें आ रही थीं मगर मैं तो घर जाने की जल्दी में था. मैंने गहना को फिर आवाज़ लगाई, जब अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी तो मैंने बाथरूम के दरवाज़े को धक्का दिया. अंदर गहना नहीं थी मगर इससे पहले की मैं कुछ समझ पता, कई लोग हमारे कमरे में आ गए. गहना ने बाथरूम की खिड़की से छलाँग लगा ली थी. बिना कुछ कहे वो बस चली गई थी. मैं अब भी कुछ नहीं समझ पा रहा था और अनहिता के रोने की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी. मैंने उसे गोद में उठा लिया. अब मुझे उसका माँ और पिता दोनों बनना था.

हम यादों से भरे उस खाली घर में आये

हम घर आ गए. उस चारदीवारी को घर कहना कुछ अजीब लग रहा था. गहना ने ही तो उस ईंट पत्थर की ईमारत को घर बनाया था. इस घर का एक एक इंच उसकी यादों से भीगा था. वो यहाँ खड़ी थी जब उसने मुझे अपनी प्रेगनेंसी की खबर दी थी, इस कुर्सी पर थी जब मैंने उसे पहली बार किस किया था और इस खिड़की से उसने मुझे हाथ हिला कर बाय किया था जब मैं कोचीन अकेले जा रहा था. उस घर का हर हिस्सा हमारे साथ था और हमारी यादों से भीगा था. मुझे हमारे बच्चे के लिए इन उदासियों से निकल कर खुद को संभालना था.

आज इस बात को पांच साल हो गए है. और मुझे गर्व है जैसे मैंने खुद को और अनहिता को इन पांच सालों में संभाला है. मैंने उस मासूम के लिए दोनों माँ बाप बनने की कोशिश की है और हमेशा प्रयास किया है की उसे एक खुश बचपन दे सकूं.

अनहिता को अच्छा जीवन देने की मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ

अनहिता मेरे जीने की वजह बन गई है. वो मुझे वास्तविकता के करीब रखती है और मुझे उसने अपनी प्यारी सी मुस्कान से हर बार हर अवसाद से बाहर निकाला है. वो मेरे लिए दोनों माँ और मेरी बेटी है. मैं गहना को बहुत मिस हूँ. कई बार खुद को धिक्कारा की क्यों नहीं मुझे उसकी स्तिथि की गंभीरता समझ आई और क्यों नहीं मैंने समय रहते उसकी मदद की. मेरी और गहना की माँ मेरा भरपूर साथ देती हैं ताकि मैं अनहिता की परवरिश सही तरीके से कर सकूं.

आज अनहिता पांच साल की हो गयी है. अभी वो सो रही है और उसे देख कर मेरी आँखें बार बार नम हो रही हैं. ये आँसूं उन दिनों के लिए हैं जो हो सकते थे, उन दिनों के लिए जो कभी थे, ये आँसूं की याद में है और ये आंसूं मेरे खुद के अकेलेपन के लिए भी हैं. मगर हमेशा की तरह आज भी मुझे अनहिता के जागने से पहले इन्हे पोछना है. मैंने आँसूं पोछे और अनहिता को कम्बल ठीक से उढ़ाया , लाइट ऑफ की और बिस्तर में लेट गया. कल एक नया दिन है.

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