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मेरी माँ बेवजह भाभी की शिकायतें करती हैं

कैसे एक सास ने भरकस कोशिश की अपनी बहु की ज़िन्दगी दूभर करने की मगर उसकी ही ननद ने भाभी को सहारा और हौसला दिया
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मेरी माँ भाभी की बबुराइयाँ करती थी

जब मेरी शादी हुई, मैं अपने पति के साथ एक बहुत ही खुश विवाहित जीवन जीने लगी. बहुत किस्मतवाली थी. सास ससुर के साथ भी मेरे रिश्ते बहुत अच्छा थे. आज भी हम सब उसी तरह ख़ुशी से एक दुसरे के साथ रहते हैं. मगर दूसरी तरफ जब मेरे भाई की शादी हुई तो मैंने अपनी माँ के मुँह से अपनी भाभी के लिए सिर्फ अपशब्द ही सुने. मैंने माँ को बहुत समझने की कोशिश करी की अभी वो नयी नयी है, उसे थोड़ा सा नए माहौल में ढलने के लिए वक़्त दो. मगर माँ तो मेरी किसी बात को सुनने के लिए तैयार ही नहीं थी. उनकी शिकायत थी की भाभी घर साफ़ सुथरा नहीं रखती है. खाना स्वादिष्ट नहीं बनाती है और बहुत खाना बर्बाद करती है. वो बहुत फ़िज़ूलख़र्ची करती है… ये सब मेरी माँ की शिकायतें थी. मेरा भाई माँ की इज़्ज़त और बीवी के प्यार में घिरा कुछ समझ नहीं पा रहा था और उसने फैसला किया की दोनों में से किसी भी पक्ष से कुछ नहीं कहेगा. उसके इस रवैये से हालात सुधरने के बदले और बिगड़ते चले गए. मैं माँ की ऐसी बातें सुनना पसंद नहीं करती थी. तो माँ ने मेरी भाभी के घरवालों को उनकी शिकायतें करना शुरू कर दिया. मुझे बुरा लगता था घर की निजी बातें अब इतने लोगों के साथ डिसकस हो रही थीं.

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इतनी शिकायतें क्यों?

मैं माँ को अक्सर समझाती थी की उन्हें तो खुश होना चाहिए की उनके बेटे और बहु उनका इतना ध्यान रखते हैं. मगर वो कुछ भी सुनने को तैयार ही नहीं थी. हर समय की शिकायतों के फलस्वरूप मेरे भैया और भाभी के रिश्ते में दरार दिखनी शुरू हो गई थी.

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