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महाभारत के भीम ने शायद दुनिया की सबसे आधुनिक स्त्री से शादी की थी। जानते हैं वह कौन थी!

राक्षस राजकुमारी हिडिम्बी और सबसे साहसी पांडव भीम की प्रेम कहानी को ज़्यादा तवज्जो नहीं मिलती है, लेकिन यह आश्चर्यजनक रूप से आधुनिक है
Bheem married Hidimbi

महाभारत संबंधों, मूल्यों, षडयंत्र, निष्ठा, साहस, और हर संभव उत्तरदायी मानव भावना और लक्षणों का एक व्यापक खाता है। यह परिवार और शत्रुओं, भगवान और प्राणियों और मानव जीवन में संघर्ष और जीत के बारे में है। यह अमर प्रेम कहानियों के बारे में भी है, जो समय के साथ धुंधली नहीं पड़ी हैं और अभी भी समकालीन समाज में प्रासंगिकता प्राप्त कर रही हैं। ऐसी एक कहानी जिसे कभी भी हाइलाइट नहीं किया जाता है वह है हिडिम्बी (राक्षस हिडिम्बा की बहन) और भीम की प्रेम कहानी।

कुंती का दूसरा पुत्र, ताकत का प्रतीक, पांडव जो एक भयानक भक्षक (विक्रोदरा) भी था, भीम तब गर्भ में आया था जब कुंती ने पवन के भगवान वायु को प्रसन्न किया था कि वे उसे ऋषि दुर्वासा द्वारा दिए गए वरदान के अनुसार पुत्र प्रदान करें।

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भीम शक्तिशाली और मजबूत था, और शारीरिक युद्ध, और अन्य सैन्य कलाओं में बहुत अच्छी तरह प्रशिक्षित था। वह अपने परिवार से प्यार करता था और अपने कुटुंब के प्रति वफादार था। वह एक शाही राजकुमार था, लेकिन अपनी माँ और भाइयों के साथ कई कठिनाइयों से गुज़रा था। लेकिन उसने कभी भी उनका साथ नहीं छोड़ा।

दूसरी तरफ हिडिम्बा एक राक्षस थी, और अपने भाई के साथ जंगल में रहती थी। उसका भाई गांव वालों को उत्पीड़ित करता था और भोजन के लिए लोगों को मार डालता था। लेकिन हिडिम्बी एक अच्छी इंसान थी और लोगों को अपने भाई के क्रोध से बचाना चाहती थी।

एक असामान्य प्रेम कहानी

जंगल में एक लंबे निर्वासन के दौरान, पांडवों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। उनमें से एक बाधा हिडिम्बा के साथ भीम की मुटभेड़ और उसका वध थी, जिसने एक सुंदर प्रेम कहानी को भी जन्म दिया। हिडिम्बी को भीम से प्यार हो गया और उसने कुंती को मना लिया कि वे उन दोनों को शादी करने दें। उन्होंने जंगल में ही विवाह संपन्न किया और उनके बेटे घटोत्कच का जन्म हुआ।\

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Hidimba and bhim
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बाद में, भीम ने हिडिम्बी और उनके बेटे को जंगल में छोड़ दिया और अपने परिवार के साथ अपना जीवन जारी रखा। द्रौपदी से पहले, हिडिम्बी एक पांडव भाई की पहली पत्नी थी और शाही साम्राज्य की पहली बहू थी। लेकिन उसे इतिहास में वह सम्मान और स्थान नहीं मिला जिसकी वह हकदार थी।

यह बलिदान, विश्वास और पारस्परिक समझ की एक प्रेम कहानी है जिसे हम आसानी से अपने आधुनिक समाज में भी जोड़ सकते हैं।

किसी को भी प्यार हो सकता है

अपने धर्म या जाति से बाहर या निचली जाती के किसी व्यक्ति के साथ प्यार करने को आज भी हमारे समाज में वर्जित माना जाता है। लेकिन भीम और हिडिम्बी की कहानी हमें यही बताती है कि प्यार कहीं भी पनप सकता है। एक शाही राजकुमार और एक राक्षस के बीच एक शाश्वत बंधन हमें दिखाता है कि मानव भावनाएं जाति, धर्म और पंथ द्वारा घिरा हुआ है।

हिडिम्बी तुम बिल्कुल सही हो

हमारे पितृसत्तात्मक समाज में, हम हमेशा सोचते हैं कि हमेशा लड़के को ही प्रपोज़ करना चाहिए या फिर पहला कदम बढ़ाना चाहिए। हालांकि हिडिम्बी वह व्यक्ति थी जिसने भीम से अपने प्यार का इज़हार किया और कुंती के सामने विवाह का प्रस्ताव भी उसने ही रखा।

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अपने पति के लिए एक महिला का बलिदान

हम सभी जानते हैं कि 14 वर्ष के वनवास के बाद पांडवों को अपने राज्य वापस लौटना था। इसलिए, भीम हिडिम्बी को जंगल में उसके कुटुम्ब के साथ छोड़कर चला गया। वह इस फैसले से सहमत हुई और उसका समर्थन किया। हालांकि हम इस बात पर सहमत नहीं हो सकते कि क्या भीम सही था, लेकिन हम निश्चित रूप से हिडिम्बी के समर्पण, निष्ठा और बलिदान की तुलना आज की लड़कियों के साथ कर सकते हैं जो अपने पतियों को देश की सेवा करने के लिए जाने देती हैं। सशस्त्र बलों की पत्नियाँ बहुत बलिदान देती हैं जब उनके पति उन्हें किसी बड़े काम के लिए छोड़ देते हैं।

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बच्चे को अकेले पालना

जब भीम ने हिडिम्बी को छोड़ दिया, तब पहले से ही उनका घटोत्कच नाम का बेटा था। उसने अपने पति से किसी भी मदद के बिना अकेले ही अपने बच्चे को पाला पोसा। आज, अकेली महिलाएं, विधवाएं और अन्य औरतें किसी पुरूष से मदद के बिना ही अपने बच्चों को पालती हैं। ये मजबूत इच्छाशक्ति वाली और आत्मनिर्भर महिलाएं हैं, जो औरों के लिए भी प्रेरणा हैं।
हिडिम्बी महाभारत की भुला दी गई रानी हो सकती है, लेकिन वह हमेशा महाकाव्य का अभिन्न अंग रहेगी जो हमारे मूल्यों का मार्गदर्शन करती है और हमारे आज के समाज को आकार देती है। उनकी प्रेम कहानी वास्तविकता के बहुत करीब है और मानवीय भावनाओं से भरी हुई है।

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