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मैं 28 वर्ष की विधवा और सिंगल मदर थी जब जीवन ने मुझे दूसरा मौका दिया

इस युवा विधवा और उसके बेटे के लिए एक सपोर्टिव दोस्ती किस तरह हैप्पी एंडिंग में बदल गई
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भारत में एक सिंगल मदर होने की सच्चाई

विधवा…..शब्द ही सब कुछ कह देता है। 28 वर्ष की उम्र में विधवा और एक सिंगल मदर होना, दैनिक संघर्ष का जीवन है। भारत में अधिकांश सिंगल माँओं के लिए सम्मानजनक अस्तित्व की लड़ाई कठिन है और हर माँ के लिए अलग है। ‘‘पिता/पति कहां है?’’ स्कूल प्रवेश से लेकर सुपरमार्केट जैसे स्थानों में बेहद आम सवाल है। सच जानने पर, लोग अपना दृष्टिकोण बदल देते हैं।

जब मैं स्कूल में अपने बेटे के प्रवेश के लिए गई, तो फॉर्म भरने के बाद तुरंत मुझसे प्रश्न पूछा गया कि मैं एक सिंगल मदर होने के नाते फीस का भुगतान कैसे करूंगी और क्या मैं अकेले अपनी नौकरी और उसकी पढ़ाई संभाल पाउंगी।

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