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मैं एक वेश्या के पास क्यों गया

उनका संबंध टूट चुका था लेकिन वह उससे उबर नहीं पाया था
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हमारे संबंध को टूटे कुछ महीने हो चुके थे लेकिन यह देखते हुए कि पूरे संबंध के दौरान वह मेरी पूरी दुनिया थी, मुझे लगा जैसे हमारे अलग होने के बाद मैं एक अनिश्चय की स्थिति में था। हर बार जब मैं उसे देखता था, मैं उसे वापस बुलाना चाहता था। मैंने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि मैं उसके मना करने की संभावना का सामना नहीं करना चाहता था।

हम साथ में रह रहे थे और जब हमारा संबंध समाप्त हुआ, वो हमारे पालतू कुत्तों को अपने साथ उसके नए घर ले गई। मैं उसके रखरखाव का खर्च उठाया करता था और वो उनकी देखभाल किया करती थी। उसने कहा कि इसके सिवा अब वो मेरे साथ ज़िंदगी की कोई भी चीज़ बांटने के लिए तैयार नहीं थी।

दिन हफ्तों में बदले और हफ्ते महीनों में। वह इससे बाहर निकल चुकी थी और जिंदगी का सामना अच्छे से कर रही थी लेकिन मैं भावनात्मक अशांति के भंवर में घूमता रहा। मैं उस समय को याद करने की कोशिश करता था जब उसने मुझे दुःख पहुंचाया था, मेरा अपमान किया था, और स्वयं के बारे में बुरा सोचने पर विवश किया था, लेकिन मेरा दिल उससे ज़्यादा जिद्दी था जितना मैं समझता था और उसने नरम पड़ने से मना कर दिया।

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‘वह अब और कुछ नहीं बांटना चाहती थी’ Image Source

एक दिन हम कुत्तों को सैर कराने साथ में ले गए। उसके घर वापस आते समय, मुझे वॉशरूम इस्तेमाल करने की ज़रूरत पड़ी। मैंने खुद पर पानी छींटा और टीशू पेपर से उसे पोंछ दिया। जब मैंने टीशू फेंकने के लिए डस्टबिन खोला, उसमें एक उपयोग किया हुआ कंडोम पड़ा था। एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। ऐसा लगा जैसे एक हथौड़े ने मेरी पसलियां कुचल दी हैं। हाँ, मैं जानता हूँ कि हम अलग हो चुके थे और वह किसी और के साथ सो रही थी इससे मुझे कोई मतलब नहीं होना चाहिए लेकिन प्यार हमेशा तहज़ीब या सिद्धांतों का पालन नहीं करता, है ना? इसलिए मैंने उससे पूछा। उसने उत्तर देने से इनकार कर दिया। आखिर मैं बस एक पूर्व प्रेमी था। उसने यह भी संकेत दिया कि उसके दोस्त आए थे लेकिन तब तक, अपने दिमाग में मैंने बहुत सी कहानियां बना ली थीं। बहुत सारे परिदृश्य। बुरे परिदृश्य। मैं घर से बाहर चला आया, कुत्तों को अलविदा कहते हुए और हांफते हुए। उसके किसी और के साथ अंतरंग होने के विचार मात्र ने ही, मुझे भीतर से चीर डाला।

और सबसे बुरी बात यह नहीं थी कि उसके किसी और के साथ सेक्स करने की संभावना थी, बल्कि यह तथ्य था कि वह ऐसी व्यक्ति नहीं है जो ऐसे ही किसी के भी साथ संबंध बना ले जब तक कि उसे भावनात्मक रूप से किसी के साथ सहज ना महसूस हो। और उस भावनात्मक निकटता की संभावना ही मुझे परेशान कर रही थी।

मैं एक अवचेतन अवस्था में घर चला आया।

घर लौटने पर, मैं चहलकदमी करने से खुद को रोक नहीं पा रहा था। चाहे मैं कुछ भी कर लूँ, वह सताने वाला विचार मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा था। दिल का दर्द बढ़ने लगा। तब एक मित्र ने फोन किया। मैंने उसे बताया कि मैं अपनी पूर्वप्रेमिका को कितना याद करता था और कैसे वह देख नहीं पा रही थी। हालांकि कंडोम और उससे संबंधित भाग मेरे मन तक ही सीमित रहा। धैर्य के साथ मुझे सुनने के बाद, वह इस बात पर चर्चा करने लगा कि किस तरह उसके ब्रेकअप के बाद, वह नए संबंधों में सुकून प्राप्त करता था। उसने मुझे सलाह दी कि मैं एक वैश्या के पास जाऊं और दिल हल्का करूं। क्रोध और दर्द से छुटकारा प्राप्त करूं।

उस पल तक पैसे देकर सेक्स करने का औचित्य मुझे समझ नहीं आया था क्योंकि पुरूष और स्त्री दोनों को उससे आनंद प्राप्त करना चाहिए। इसके अलावा, मैं उसके साथ इतना जुड़ा हुआ था कि और किसी के साथ सेक्स नहीं कर सकता था।

फिर भी उसने मुझे उसकी संपर्क सूची से कुछ संपर्क दे दिए।

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एक घंटे तक खदबदाने और घबराने के बाद, उसके द्वारा भेजे गए एक नंबर पर मैंने फोन कर दिया। इससे पहले कि मुझे पता चलता, मैं एक मसाज पार्लर के कांच के दरवाज़े के बाहर खड़ा था। मुझसे अपनी ‘मालिश करने वाली’ का चयन करने और भुगतान करने को कहा गया। हमें बिस्तर और बिस्तर के पास वाली टेबल पर कुछ कंडोम के साथ मंद रोशनी वाला एक कमरा दिया गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है। बगैर एक भी शब्द कहे, लड़की ने स्वयं के कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गई और मुझसे कहा कि जैसा वह कहे मैं करता जाऊं। मैंने किया। उसने चीज़ें आगे बढ़ाईं और कुछ मिनट बाद मुझे ऐसा करने का कहा। मैंने जान बूझकर उस इस्तेमाल किए हुए कंडोम, और मेरे जानने पर उसकी प्रतिक्रिया के बारे में सोचने की कोशिश की। मेरे भीतर भड़कते हुए क्रोध के साथ, मैं उस स्त्री के लिए इस अनुभव को इतना आनंददायक बनाना चाहता था, जितना मैंने अपनी पूर्व प्रेमिका के लिए भी नहीं किया था, भले ही वह एक पेशेवर थी। लेकिन उसे कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह केवल काम खत्म करना और अपने पैसे प्राप्त करना चाहती थी।

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इसलिए, मैंने वह किया जो मुझे करना था। और शायद, एक पल के लिए, उसने एक आंह भरी क्योंकि उसके अलावा, उसका चेहरा बिल्कुल भावहीन था। इसके अंत में, हमने अपना गुडबाय कहा और मैं बाहर निकल गया। लेकिन हैरानी की बात है, प्रवेश करते समय मैं जितना खाली महसूस कर रहा था, बाहर निकलते समय मैंने उससे भी अधिक खालीपन महसूस किया। और इस्तेमाल किए गए कंडोम के बारे में जानने के बावजूद, मैंने स्वयं को दोषी महसूस किया।

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क्या मुझे दोषी महसूस करना चाहिए? क्या मुझे नहीं करना चाहिए? मैं नहीं जानता। जो मैं जानता हूँ वह यह है कि, आज मुझे हमेशा से ज़्यादा यकीन हो गया है कि हमारा संबंध केवल सेक्स के बारे में नहीं था, वह हमारे बारे में था। यह उसकी हंसी के बारे में था। उसकी शरारत, उन सपनो के बारे में था जो हमने देखे। इतना सबकुछ की मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

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1 Comment

  1. Patni ki jagah koi nahi le sakti kyunki vo Jeevan sathi har sukh dukh me saath deti hai or character ke mamle me bhi purush se achchhi hoti hai. Haa aaj hamari education me moral education nahi di jaati hai ush vajah se relationship ki value khatm ho rahi hai

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