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मैं अपने एब्यूसिव पति से बच निकली और अपने जीवन का फिर से निर्माण किया

उसने एक बुरे विवाह की वजह से पूरी संस्था को बुरा नहीं माना। उसने स्वयं को मुक्त कर दिया और एक नया जीवन बनाने निकल पड़ी।
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मैं शुरू से ही जानती थी कि यह कठिन होने वाला है, और यह बस पहला ही कदम था, लेकिन मुझे आगे बढ़ते जाना था। मैं चार वर्षों तक मानसिक, शारीरिक और यौन दुर्व्यव्हार सहन करती आई थी और अब मेरा ही नहीं बल्कि मेरे बेटे का भी जीवन दांव पर लगा था।

मैंने स्कूटर की चाबी और जल्दी में पैक किया गया मेरा बैग उठाया और दरवाज़े से भाग गई। मेरा बेटा पहले ही अपने स्कूल बैग और ज़रूरी सामानों के साथ स्कूटर के पास खड़ा था। हमने मेरे पति के शराब के नशे की हालत के दौरान चुपचाप उन्हें पैक किया था।

मैंने अपने ससुर को डुप्लिकेट चाबी सौंपी, जो बाद में इसे खोलने के लिए इस्तेमाल करेंगे, और मेरी चाबियों के साथ निकल गई। जैसे ही मैंने दरवाज़ा बाहर से बंद किया कहर बरप उठा। उसने पहले दरवाज़ा पीटा और फिर बालकनी से मुझे धमकियां देने लगा। 8 साल का बच्चा डरा हुआ था लेकिन हम भाग निकले…हिंसा, शोषण और उत्पीड़न से स्वतंत्र होने के लिए।

मैंने शोषण सहन किया

पिछले चार सालों से मेरा पति, शराब के दैनिक प्रभाव में, मेरे साथ दुर्व्यवहार (बहुत हल्का शब्द) कर रहा था। उसने ऐसा क्यों किया, यह उसकी मनोवैज्ञानिक समस्या थी, न की मेरी गलती (जो मुझे बहुत बाद में समझ आया)। मैंने सहन किया यह मेरी गलती थी। मैं पीटना, अपमान करना, मेरा आत्मविश्वास तोड़ना और वैवाहिक बलात्कार सहन करती गई। मेरी नौकरी छूट गई और मैंने थोड़ी आज़ादी और विवेक बचाने के लिए घर पर ट्यूशन लेना शुरू कर दिया।

बल्कि, मैंने सोचा कि मेरी किस्मत में यही लिखा है। मैं अपने आप से यह कहती रही कि वह मुझे प्यार करता है और यह कि वह व्यक्तिगत विफलता की वजह से असुरक्षित और परेशान है और यह कि जब वह शराब पीना बंद कर देगा तब यह भी बंद हो जाएगा और इस बार वह अपना वादा निभाएगा। यह सभी कारण क्योंकि मैं डरी हुई थी। छोड़कर जाने से डरती थी। वह उसे उत्तेजित करने के लिए मुझे दोषी ठहराता था और कभी-कभी तो मैं भी यह मान लेती थी कि मेरी ही गलती है।

यह औसत पीड़ित प्रतिक्रिया चक्र है; हैरानी, फिर अस्वीकृति, आत्म दोष और फिर एक आशा की किरण और फिर हनीमून चरण जहां सबकुछ ठीक हो जाता है, वह माफी मांगता है, प्यार करता है, प्यार जताता है और कुछ दिनों के लिए सब कुछ ठीक हो जाता है। और फिर यह वापस शुरू हो जाता है।

मेरे बच्चे का जीवन दांव पर

एक दिन मैं काम से वापस लौटी और देखा कि मेरा बेटा अभी भी स्कूल की यूनिफॉर्म पहने सोफे पर लेटा है और भूखा है। पहले मुझे लगा कि वह बेहोश है और उसे चोट लगी है। शुक्र है कि वह सिर्फ भूख और थकान की वजह से सो गया था। उसका पिता फर्श पर पसरा हुआ था और चारों तरफ बीयर की बोतलें फैली हुई थी। वह अंतिम कड़ी थी।

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मुझे भागना था। मेरे जीवन के लिए भागना था। मेरे बच्चे के जीवन के लिए भागना था। और मैंने ऐसा किया थोड़े से कपड़ों और कुछ पैसों के साथ। सिर्फ मेरे बेटे के स्कूल की किताबों, बैग, और यूनिफॉर्म के साथ। मैं अपने माता-पिता के घर चली गई। कहने की ज़रूरत नहीं कि वे चौंक गए थे। पहले तो मेरा भाई बच्चे की तरह रोया। फिर वह और मेरे पिता मेरे पति से निपटने के लिए जाना चाहते थे। मैंने उन्हें रोक दिया क्योंकि मुझे लगा यह करना व्यर्थ है।

अब मैं अपने जीवन पर ध्यान केंद्रित करना चाहती थी।

मेरे जीवन को फिर से निर्मित करना

मैंने उसके साथ संपर्क तोड़ दिया और काम करना जारी रखा और विकल्पों की तलाश शुरू कर दी। मैं अपना मास्टर्स पूरा कर रही थी और साथी ही नौकरी भी ढूंढ रही थी। एक महीने बाद मुझे अच्छे वेतन वाली नौकरी मिल गई। इसी दौरान मैंने एक प्रणाली तैयार की जिससे वह मेरे बेटे को स्कूल से या लौटने के दौरान उठाने में सक्षम नहीं होगा। मैंने स्पीड डायल पर कुछ नंबर रखे और अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर काम किया। मैंने अपने बढ़े हुए वज़न को कम करने के लिए टहलना शुरू कर दिया। मैंने अपने पुराने दोस्त ढूंढना और नए दोस्त बनाना शुरू कर दिया, अपनी अलमारी तैयार की और बाहर निकलना शुरू कर दिया (यह मैंने बंद कर दिया था क्योंकि मुझे शर्म आती थी)।

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मैंने परिवार और अच्छे दोस्तों की मदद से खुद को फिर से खोज लिया। आज मैं एक आर्मी अफसर के साथ अपनी दूसरी शादी में सुखी हूँ। किसी को कभी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।

ज़ख्म के निशान मौजूद हैं लेकिन मैं एक योद्धा हूँ

मेरा बच्चा फिर से खुश और सुरक्षित है। वह एक बेहतर जीवन देखता है और हमने एक बंधन बना लिया है जो मज़बूत और स्वस्थ है। वह सुरक्षा के साथ बड़ा हुआ है और मुझे किसी पुनर्वास केंद्र की आवश्यकता नहीं पड़ी। मुझे वास्तव में उसपर गर्व है।

मेरे दिमाग और शरीर पर अब भी मानसिक और शारीरिक यातना के निशान हैं, लेकिन मैंने सभी को क्षमा कर दिया है। अपने भले के लिए मैं खुद ज़िम्मेदार हूँ। अगर मैंने लड़ने का फैसला नहीं किया होता तो किसी ने मेरी मदद नहीं की होती। इस मामले में, लड़ाई भागने के बाद शुरू हुई। भागना केवल पहला कदम था। मैं एक गर्वित योद्धा हूँ।

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