मैं समझता था कि मेरी पत्नी एक दूसरे पुरूष से प्यार करती थी

Debashish Majumdar
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हमारा जोड़ा एक स्वर्ग में बनाया गया आर्दश जोड़ा था। हमने हमारे माता-पिता की इच्छा के विरूद्ध विवाह कर लिया। मेरी पत्नी ना केवल सुंदरता का प्रतीक थी, बल्कि मेरे लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी थी। उसका एक सकारात्मक रूख था और हम अपना जीवन बिना किसी पारीवारिक मदद के गुज़ारने को तैयार थे। मेरे ससुर ने मेरी पत्नी से बार बार आग्रह किया था कि मुझसे शादी ना करे – आखिर मैं एक विज्ञापन एजेंसी में केवल एक कॉपीराईटर था। पत्नी ने उसे आश्वस्त किया कि वह जल्द ही खुद को स्थापित कर लेगी और सब ठीक हो जाएगा।

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मेरी पत्नी के स्कूल में एक ट्यूटर था और मेरे ससुर उसे बहुत पसंद करते थे। वह जानकारी का चलता फिरता एनसाइक्लोपीडिया था और मेरी पत्नी को भी उस पर गर्व था। मेरे ससुर हमेशा मेरी पत्नी की शादी उस व्यक्ति से करवाना चाहते थे क्योंकि उसके पास एक ऊँची सरकारी नौकरी थी। शादी के बाद, मेरी पत्नी और मुझे घर छोड़ना पड़ा क्योंकि मेरे माता-पिता हमारी शादी से नाराज़ थे। इसलिए मजबूरन हमें एक छोटे से किराए के मकान में जाना पड़ा। मैं केवल एक उभरता कॉपीराइटर था और मेरा वेतन बहुत कम था। मेरी पत्नी हिम्मत से, बिना किसी शिकायत के, मेरी सीमित आय में घर चला रही थी।

वह हमेशा हँसमुख रहती थी और उसकी मुस्कान उसके चेहरे को चमका देती थी। उसने मुझे आश्वस्त किया कि जब मैं अपने काम पर ध्यान केंद्रित करूंगा तब वह प्रवीणता से घर संभालेगी। वह मेरी शक्ति का स्तंभ थी; वह मेरे लिए सबकुछ थी।

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एक दिन, हम फिल्म देखने गए, वहाँ वह लंबे समय बाद अपने पुराने ट्यूटर से मिली और हमारे जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उसने हमारे घर आना शुरू कर दिया – शुरूआत में कभी-कभी और बाद में नियमित रूप से। मुझे यह रत्ती भर भी पसंद नहीं आया। जैसा किस्मत में लिखा था, कुछ महीनों बाद, मेरी फर्म बंद हो गई। मैं बेराज़गार हो गया था। अब हमारा एक बेटा भी था जो एक ज़िम्मेदारी था। मैं हिल गया था। मैं पागलों की तरह नौकरी ढूँढने लगा। मैं अपनी पत्नी को मानसिक सहयोग नहीं दे पा रहा था। मेरे पास उसे आश्वस्त करने के लिए मानसिक शक्ति भी नहीं थी कि ‘‘मुझे बहुत जल्द नौकरी मिल जाएगी और फिर हम तीनों का जीवन बेहतर हो जाएगा” उस व्यक्ति का आना जारी रहा। मुझे लगा कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं। मैं उससे नफरत करता था!

मेरे ससुर हमारे घर आए। उन्होंने मेरे सामने मेरी पत्नी से कहा कि उनकी इच्छा के खिलाफ मेरे साथ शादी करने के लिए वह ऐसी भयंकर दुर्दशा के ही लायक है। उसके साथ ठीक ही हुआ है।

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उसके भले के लिए, उन्होंने सुझाव दिया कि उसे तत्काल मुझसे तलाक लेकर उस व्यक्ति से शादी कर लेनी चाहिए जो अब भी कुँवारा था। वह मुझे और मेरे बेटे को सुरक्षा प्रदान करेगा जो मैं कभी नहीं दे सकता।

उन्होंने मुझे कहा कि मैं पूरी तरह असफल था। मैं तनाव में चला गया। मैं पूरी तरह टूटने वाला था। मेरी पत्नी के पिता ने मुझसे बदले की भावना में बात की थी। एक व्यंगात्मक तरीके से उन्होंने मुझसे कहा कि आत्महत्या ही एकमात्र तरीका है जिससे मैं इस स्थिति से भाग सकता हूँ। मैं बुरी तरह रोया। मैं अपने आपको मारने से बहुत डरता था, शायद इसलिए क्योंकि मैं अपनी पत्नी और बच्चे से बहुत गहरा प्यार करता था। मैंने अपने माता-पिता से आर्थिक मदद माँगी, यह कहते हुए कि मैं लौटा दूँगा। उन्होंने पूरी तरह मुँह फेर लिया।

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वक्त गुज़र गया। वह एक गर्मियों की दोपहर थी। मुझे नौकरी मिल गई थी! जब मैं घर आया, मैं खुशी से चिल्ला उठा और मैंने भगवान का शुक्रिया अदा किया। मैंने अपनी पत्नी को यह खुशी की खबर सुनाई। वह मुस्कुराई। उसने मुझसे कहा कि जीवन एक रोलरकोस्टर है और हमें मानसिक तौर पर मज़बूत होना चाहिए। बाद में उसने मुझे बताया कि उसके पिता ने मुझसे शादी करने के कारण उठानी पड़ रही तकलीफ के कारण उसकी कितनी बेइज़्ज़ती की थी। उसने मुझसे तलाक लेने के खिलाफ अपने पिता से झगड़ा किया। और उस पुरूष ने भी मेरी पत्नी और हमारे बेटे की देखभाल के लिए उसे 6 महीनों तक आर्थिक सहायता दी क्योंकि और कोई नहीं था जिससे हम मदद माँग सकते थे। धीरे धीरे मैंने उसके पैसे चुका दिए।

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इस पूरे समय के दौरान, उस व्यक्ति ने यह सब सहने के लिए मेरी पत्नी को मानसिक शक्ति दी थी। उसने मेरी पत्नी को आश्वस्त किया कि नौकरी ना होने जैसी अस्थायी बात के लिए उसे उस व्यक्ति को छोड़ने की ज़रूरत नहीं है जिससे वह इतना प्यार करती है (वह मैं हूँ) मुझे पछतावा हुआ कि मैंने उस व्यक्ति को गलत समझा और अब हम पक्के दोस्त हैं। मेरी पत्नी ने यह कहते हुए अपने आँसू मुश्किल से रोके की वह मेरे अच्छे बुरे समय में मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेगी।

कई सालों बाद, हमारा परिवार अब भी स्नेही और प्यार भरा है।

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