मैंने अपने बचपन के दोस्त के साथ मेरी पत्नी के सेक्स्ट पढ़े और फिर उसे उसी तरह से प्यार किया

man texting on phone

जैसा सहेली मित्रा को बताया गया

मुझे अपनी शादी की रात को ही यह पता था कि मैं हर पल अपनी पत्नी के साथ नहीं रहूंगा। क्योंकि यह विचार ही असंभव था। मैं मानता था कि मुझे अपनी पत्नी को वह स्पेस और स्वतंत्रता देनी चाहिए जिसके वह योग्य है। लेकिन मुझे कभी अहसास नहीं हुआ कि शादी के दो साल बाद ही कोई दूसरा पुरूष उसे चुरा ले जाएगा, और वह भी मेरा ही बचपन का दोस्त। मेरे लिए, विवाह के बाद, प्रतिबद्धता और यौन विशिष्टता सर्वोच्च थी। मैं एक वर्कोहोलिक था और ना तो मुझे अपनी किसी महिला सहकर्मी के साथ संबंध बनाने का मौका मिला और ना ही मेरी ऐसी कोई इच्छा थी।

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मुझे अब भी नहीं पता कि सुहानी क्यों लड़खड़ा गई। क्या यह कमज़ोरी या वासना का एक पल था? मेरे व्यस्त कामकाजी शेड्यूल के बावजूद, मैंने कभी हमारे संबंध को अनदेखा नहीं किया। मैंने सुहानी को शादी के बाद काम करने के लिए प्रोत्साहित किया, हालांकि वह अनिच्छुक थी और गृहणी बनने के लिए उसने काम छोड़ दिया। वह घर पर अकेली बोर हो जाती होगी। अन्यथा वह किसी और पुरूष को हमारे बेडरूम में क्यों लाती, भले ही आभासी दुनिया के माध्यम से?

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फोन बजता रहा था

मुझे यह बाय चांस पता चला, जब एक रविवार की सुबह उसका फोन वॉट्स एैप मैसेजों द्वारा बार-बार बज रहा था, जब वह नीचे हमारे बगीचे में व्यस्त थी। मैंने फोन को स्विच ऑफ करने की कोशिश की क्योंकि वह मेरी नींद में बाधा डाल रहा था और तभी मेरे सामने स्पष्ट सैक्सुअल मैसेज आए जो सुहानी और मेरे बचपन का दोस्त एक दूसरे को भेज रहे थे, मैंने पिछले साल ही उनका परिचय करवाया था। मैं अपना सम्मान बचाने के लिए खुद को बोलता रहा कि यह फोन सेक्स या साइबर सेक्स है या जो भी नाम उसे दिया जा सकता था। उसे मेरे दोस्त के साथ बिस्तर पर भौतिक रूप से होने की कल्पना करना मेरे लिए हार का क्षण था, वह एक बेसुधी का पल था!

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मेरी तत्काल प्रतिक्रिया उसे त्यागने की, उसके साथ यौन रूप से दुबारा कभी संलग्न नहीं होने की या किसी भी रूप से अंतरंग नहीं होने की थी। एक अपनत्व भरा स्पर्श भी नहीं।

मैं यह जानने के लिए बेताब था कि सुहानी ने उस पुरूष के साथ आखिर किया क्या था, क्या उन्होंने वास्तव में संभोग किया या फिर वे बस सेक्स्टिंग का आनंद ले रहे थे? आखिरकार वह एक अलग शहर में रहता था और नियमित रूप से मिलना या यौन मिलन उनके लिए असंभव था। लेकिन फिर ईर्ष्या रूपी राक्षस बीच में आ गया। मुझे शक्ति को फिर से बहाल करने की ज़रूरत थी। मुझे बस इस स्त्री को अपने पास रखना था जिसे मैं शादी के बाद प्यार करने लगा था। मुझे यह कहने की ज़रूरत थीः ‘‘तुम मेरी हो, उसकी नहीं।” मैं उसका बलात्कार करने को तैयार था, अगर वह मेरा साथ देने से इनकार करे तो। मैं निश्चित रूप से अपना कॉमन सेंस खो चुका था।

Man worried over wife's infedility
मैं यह जानने के लिए बेताब था कि सुहानी ने उस पुरूष के साथ आखिर किया क्या था

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परछाई से लड़ना

लेकिन उस रात हमारा बेडरूम भावनात्मक रूप से चार्ज किए गए दृश्यों के लिए एक मंच में बदल गया, क्योंकि सुहानी ने साथ दिया और बिल्कुल नहीं शर्माई। यह मेरे लिए परछाई से लड़ने जैसा था, उस पुरूष की जिसने मेरी पत्नी को अंतरंग दृश्यों का वर्णन किया था। बिस्तर में संघर्ष के परिणामस्परूप मैं आक्रामक हो गया और सुहानी निष्क्रिय हो गई, जो की काफी अजीब था क्योंकि हर बार इसका उल्टा होता था। और इसका अंत आसूंओं में हुआ। वह खुशी में रो रही थी, मैं दर्द में रो रहा था। वह मेरे पास आ गई और उसने मुझसे कहा कि उसे उसका आज तक का सबसे अच्छा ऑर्गेज़्म प्राप्त हुआ। मैं उसके करीब आ गया यह बताने के लिए कि यह सब उसके दोस्त द्वारा भेजे गए सेक्स्ट के अनुसार किया था। वह भौंचक्की रह गई और जड़वत् हो गई!
रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

हमारी परामर्शदाता, मनोचिकित्सक डॉ अवनी कहती हैं:

इस कहानी में उत्तरों की तुलना में प्रश्न अधिक हैं। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हमारे पास सिर्फ एक संस्करण है। हमें कोई अंदाज़ा नहीं है कि सुहानी के मन के क्या चल रहा था।

क्या इसमें संचार की कमी को दोष दिया जा सकता है? क्या वह अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए सेक्स्ट करती थी जो वह अपने पति को नहीं बता सकती थी? क्या वह आमने-सामने के मिलन से ज़्यादा सहज आभासी दुनिया में थी? क्या वह इंटरनेट के पर्दे के माध्यम से अपनी यौन इच्छाएं ज़्यादा खुल कर बता पाती थी? क्या लांग डिस्टेंस रिलेशन एक ज़्यादा सुरक्षित विकल्प था? क्या वह दोस्त सुहानी की बात मान रहा था या वे वे दोनों शारीरिक रूप से बेहतर सुसंगत थे?

क्या सुवांकर अपने दोस्त के निर्देशों का पालन कर रहा था या फिर उसकी पत्नी के ईशारों का? क्या यह सुहानी के सपने का साकार होना था या बस भावनात्मक बेवफाई का अपराधबोध था? सुवांकर ने ऐसी स्थिति में सेक्स के बारे में क्यों सोचा जिसमें पहले बातचीत की आवश्यकता थी? वे भावनात्मक रूप से कितने करीब थे और वह अपने संबंध की वास्तविकता के कितना करीब था?

और अंत में, संबंध के भावनात्मक और शारीरिक पहलू कितने करीब से जुड़े हुए हैं?

जहां उत्तर हर व्यक्ति के लिए भिन्न हैं, वे सही या गलत नहीं हैं। यह आपका और आपके संबंधों का एक भाग रहेंगे।

अपनी पत्नी को धोखा देने के बाद मेरा जीवन नर्क बन गया

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