मैंने अपनी चीनी प्रेमिका को छोड़ दिया लेकिन भारत में कोई भी लड़की मुझसे शादी नहीं कर रही

मैं मज़ाक बन चुका हूँ

(जैसा जोई बोस को बताया गया)

एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी लड़का जो भैंगा पैदा हुआ था उसके पास एक अच्छी लड़की से शादी करने के लिए विदेशी शिक्षा प्राप्त करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। मुझे तीन कारणों से डॉक्टर बनने के लिए चीन भेजा गया थाः

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1. डॉक्टरों को अच्छी लड़कियां मिलती हैं

2. विदेशी शिक्षा के लिए सबसे सस्ता गंतव्य चीन था

3. मुझे भारत में कहीं भी प्रवेश नहीं मिला क्योंकि मैं काफी बुरा विद्यार्थी रहा था।

मुझे भारत में कहीं भी प्रवेश नहीं मिला क्योंकि मैं काफी बुरा विद्यार्थी रहा था।
मुझे भारत में कहीं भी प्रवेश नहीं मिला क्योंकि मैं काफी बुरा विद्यार्थी रहा था।

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शेनयांग के मेडिकल स्कूल में, मैं सूई वांग से मिला। वह भी भैंगी थी। अजीब बात है लेकिन सच है! फिर अपरिहार्य बात हुई। देखिए, हम दोस्त थे और वह मैंडेरियन सीखने में और कक्षा में मेरी मदद करती थी। लेकिन मेरे जैसे मारवाड़ी लड़के को प्यार में पड़ने और शादी करने की अनुमति नहीं है। हमें परंपरा निभाना चाहिए। लेकिन सूई मेरे लिए एकदम उपयुक्त थी। वह मेरी आलोचना नहीं करती थी, वह विनम्र और मददगार थी। लेकिन मैंने उसका दिल तोड़ दिया और सात वर्षों बाद, मैं कलकत्ता के बुर्राबाज़ार की गहरी गलियों में लौट आया। लगभग उसी समय, मुझे विवाह के बाज़ार में उतार दिया गया था। इससे पहले कि मैं भारत में चिकित्सा अभ्यास करने का लाइसेंस प्राप्त कर सकूं।

महत्त्वाकांक्षी दुल्हन

नेहा के पिता मेरे लौटने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, उन्होंने मेरी वापसी का जश्न मनाने के लिए सबसे अच्छी मिठाइयां भेजी थीं और मेरी सुरक्षा के लिए एक पूजा आयोजित की थी क्योंकि मैं प्लेन में चढ़ा था। कहने की ज़रूरत नहीं कि भारत में आने के अगले ही दिन, मेरे पूरा परिवार को उसके घर में आमंत्रित किया गया और अंततः, चूंकि यह अरेंज मैरिज व्यवस्था में प्रथागत है, हमें कुछ समय अकेले में बिताने का कहा गया था।

सूई के विपरीत, नेहा एक पटाखा थी, जैसी आमतौर पर अमीर पिता की बेटियां होती हैं। ‘‘अगर मैंने तुमसे शादी की तो क्या हम चीन में सैटल होंगे?’’ उसने मेरी आंखों में देखते हुए मुझसे ये पहला प्रश्न किया, जो मुझे यकीन है कि दबाव के कारण सामान्य से अधिक असामान्य हो गया था। मैं एक शर्मिला लड़का हूँ। सू की धरती पर एक भारतीय पत्नी के साथ जाने का विचार बहुत अजीब था और इसलिए, मैंने तुरंत कह दिया, ‘‘नहीं”। ‘‘अमेरिका या लंदन में बसने की कोई संभावना?’’ मैंने उत्तर दिया ‘‘नहीं” क्योंकि मुझे अहसास हुआ कि चीन की डिग्री ने मेरे अवसरों को बहुत कम कर दिया था।

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“तुम अपनी आंखों का ऑपरेशन क्यों नहीं करवा लेते ताकि वे ठीक दिखें?’’ उसने दो टूक शब्दों में कहा। मुझसे पहले यह प्रश्न कभी किसी ने नहीं पूछा था। किसी ने मुझसे इस तरह बात नहीं की थीं उसके साथ जीवन बिताने के विचार ने मुझे डरा दिया और इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाता, उसने उसका फैसला सुना दिया। ‘‘देखो, मैं इस तरह तुमसे शादी नहीं कर सकती।” मैं कमरे से बाहर निकल आया और घर से बाहर चल दिया।

मैं मज़ाक बन चुका हूँ…

नेहा द्वारा मुझे अस्वीकार किए जाने के बाद, मेरी विवाह योग्यता पर समाज ने प्रश्नचिन्ह लगा दिया। मुझे एक बदसूरत आदमी के रूप में चित्रित किया गया जिसमें कोई महत्त्वाकांक्षा नहीं थी। लोगों ने मेरे शर्मिले स्वभाव का भी मज़ाक उड़ाया और मेरे यौन सामर्थ्य पर भी प्रश्न उठाया। अगले कुछ महीनों में मुझे असंख्य लड़कियां द्वारा अस्वीकार किया गया। मैं उनकी संख्या भी भूल चुका हूँ। आजकल की लड़कियां शर्मीली नहीं हैं, वे ढीठ और बेशर्म हैं। एक लड़की ने तो मुझे इतना तक कह दिया कि क्या मैं उसे उसी वक्त किस कर सकता हूँ, क्योंकि वह जानना चाहती थी कि मैं एक अच्छा किसर हूँ या नहीं। यह बात मुझे हैरान कर देती थी कि जो लड़कियाँ बड़ों के सामने चुप और शर्मीली होती थीं, वे अकेले में आग का गोला बन जाती थीं।

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मैं मज़ाक बन चुका हूँ
मैं मज़ाक बन चुका हूँ

मैं अक्सर सूई के बारे में सोचता था। मैंने सुना है कि अब उसकी शादी हो गई है। मेरे लौटने को दस साल हो चुके हैं और मैं अब भी अविवाहित हूँ। लड़किया पहली ही पारी में मुझे ठुकरा देती हैं। मैं अपने समुदाय में एक मज़ाक बन कर रह गया हूँ। और ना ही मुझे भारत में चिकित्सकीय अभ्यास करने का लायसेंस मिला है और अब, मैं एक अस्पताल के प्रशासन में काम करता हूँ। इतनी सारी लड़कियों द्वारा ठुकराए जाने के बाद, अब मुझमें किसी लड़की से बात करने की हिम्मत नहीं बची है।

एक दिन, मुझे आशा है कि मैं वापस शेनयांग चला जाउंगा अगर सूई कभी भी मुझे फोन करेगी तो। मुझे उम्मीद है कि एक दिन सूई मुझे फोन करेगी। मैं जानता हूँ कि ऐसे कुछ ऑपरेशन हैं जो मेरे भैंगेपन को ठीक कर देंगे लेकिन मैं वे नहीं करवाना चाहता। शायद मैं जैसा हूँ उसी रूप में कभी कोई मुझसे प्यार करेगा।

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