मैंने एक वृद्ध पुरूष और उसकी पत्नी से प्यार के बारे में क्या सीखा

cute old couple

मुझे आउटडोर में किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। खासकर के पतझड़ की सुबहों में जब ऐसा लगता है जैसे विश्व सर्दियों की छुट्टियों की तैयारी कर रहा है। सूरज थोड़ा कोमल लगने लगता है और पेड़ रंगों के एक विस्फोट की तरह दिखने लगते हैं। मुझे शरद ऋतु इसलिए ज़्यादा पसंद है क्योंकि यह विदाई को बहुत सुंदर और रंगीन बना देती है। जैसे की धूंआ बनने से ठीक पहले लौ सबसे ज़्यादा चमकीली बन जाती है, वैसे ही शरद ऋतु तब सबसे सुंदर होती है जब वह ग्रे सर्दियों का स्वागत करती है और एक और साल को अलविदा कह देती है।

शरद ऋतु की ऐसी ही एक सुबह में मैं बैंच पर बैठी किताब पढ़ रही थी। एक हल्की सी हवा ने मेरे उपन्यास के पृष्ठ पलट दिए। मीठे फूलों की खुश्बू, हल्की ठंड और हवा द्वारा गुदगुदी करने पर पत्तों की आवाज़ मेरे साथ थी।

“क्या मैं तुम्हारे बगल में बैठ सकता हूँ?” जब मैं पढ़ रही थी तो एक वृद्ध पुरूष की सशक्त आवाज़ सुनाई दी।

मैंने किताब से नज़रे उठाईं और देखा कि वह उन वृद्ध लोगों में से एक थे जिनसे मैं हर सुबह पार्क में टकराती थी। हम हमेशा परिचित अजनबियों की तरह नज़रों का आदान-प्रदान करते थे लेकिन हमें कभी भी बात करने का अवसर नहीं मिला।

“बिल्कुल” मैंने उनके लिए जगह बनाते हुए कहा।

एक क्लासिक किताब पर नोट्स

कोलेरा  के समय में प्यार की किताब पढ़ रही हो, हम्म?” उन्होंने मेरे हाथ की किताब की ओर इशारा करते हुए पूछा।

“हाँ, मैं पहली बार मार्केज़ की किताब पढ़ रही हूँ,” मैंने जवाब दिया।

हम पात्रों के बारे में बातें करने लगे और फिर उन्होंने कहा,

प्लॉट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “बहुत सा प्यार वाला समय नष्ट कर दिया गया है,” फिर उन्होंने आगे कहा –

“चाहे जो भी हो, अंत में यही मायने रखता है कि आपने कितनी उदारता के साथ प्यार किया। मैं पिछले 30 वर्ष से विवाहित हूँ। मुझे लगता है कि शादी के बारे में मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता।”

जिन चीज़ों के बारे में हमने बहस की

“हर विवाह की तरह, हमारी शादी में भी झगड़े, संघर्ष और दूरी थी। मैं और मेरी पत्नी हमेशा छोटी से छोटी चीज़ों के लिए झगड़ते रहते थे। उदाहरण के लिए – शॉवर के बाद मैं बिस्तर पर तौलिया छोड़ देता था या मेरी प्लेट में भोजन झूठा छोड़ देता था। वह इन छोटी चीज़ों से बहुत गुस्सा हो जाती थी। जबकि वो मुझे हमेशा कुछ ज़्यादा ही गर्म चाय दे देती थी। वह मानती थी कि चाय को फूंक-फूंक कर पीने से ही चाय का असली मज़ा आता है,” उन्होंने कहा और हंसे। “मैं हमेशा ऐसे छोटे-छोटे कारणों से उससे नाराज़ हो जाया करता था।”

Small fights
जिन चीज़ों के बारे में हमने बहस की

“ये छोटे झगड़े अहंकार के युद्ध में बदल गए और फिर एक दिन मेरी पत्नी ने घर छोड़ने का फैसला किया। उसके अनुसार हमारे तीनों बच्चों के सैटल हो जाने के बाद उसका घर में रहने का कोई कारण नहीं था, और ऐसा कह कर वह अपने मायके चली गई।”

“उसके जाने के एक सप्ताह तक मैं ठीक था। मैंने अपनी आज़ादी का मज़ा भी उठाया। लेकिन एक दिन जब मैं घर पर चाय पी रहा था, तब मुझे अहसास हुआ कि वह ठंडी हो चुकी है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था जो चाय का मज़ा लेने के लिए फूंक देने पर ज़ोर डाले। तुम्हें शायद यह एक नगण्य चीज़ लग सकती है, लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण था। मैंने हमारे द्वारा साथ में बिताए गए जीवन के बारे में सोचा और मुझे अहसास हुआ कि हमारा जीवन उन छोटी-छोटी चीज़ों की वजह से ही सुंदर था।समस्या बस यह थी कि हम इन तुच्छ चीज़ों को ही सबसे ज़्यादा महत्त्व देते थे और बाकी चीज़ों पर फोकस नहीं करते थे। काश की मुझे यह पहले ही पता लग जाता। हम काफी सारा समय बचा सकते थे जो हमने अहंकार के युद्ध में ज़ाया किया। इसकी वजह से हमने बहुत सारी रातें, बहुत सारे अवसर और प्यार करने के बहुत सारे मौके गंवा दिए।”

उसे गीले तौलियों की याद आती है, उसने कहा

“मेरी पत्नी अगले हफ्ते वापस आ गई। उसने कारण यह बताया कि उसे गीले तौलिये उठाने की याद आती है,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि उसे भी अहसास हो गया होगा कि गुस्से में रहकर समय बर्बाद करना कितना व्यर्थ है।”

“अब हम अपने 60 के दशक में हैं। हम अपने रिश्ते की शरद ऋतु तक पहुंच गए हैं। लेकिन हम इसे हमारे जीवन की सबसे सुंदर शरद ऋतु बनाने का इरादा रखते हैं। हाँ, रिश्ते के मूल्य को पहले नहीं समझने का अफसोस रहेगा। लेकिन अब भी हमारे पास साथ में एक सुंदर वृद्धावस्था बिताने का मौका है।”

मैं उन्हें तन्मय होकर सुनती रही।

मेरी ओर देखकर उन्होंने कहा, “यह पतझड़ का पत्ता लो और याद रखो, रिश्तें में यही बात मायने रखती है कि तुमने कितनी उदारता के साथ प्यार किया। बाकी चीज़ें तुच्छ हैं। जब भी मैं इस उपन्यास के बारे में पढ़ता हूँ मैं हमेशा खोए हुए समय के बारे में सोचता हूँ, कि क्या होता अगर…”

हमने थोड़ी और बात की, और फिर वे कुछ दोस्तों से मिलने चले गए जिन्होंने उन्हें चाय वाले के पास चाय पीने के लिए बुलाया था जो कम्यूनिटी पार्क के किनारे पर बैठता था।

जब वे जा रहे थे तो मैंने उन्हें देखा। मैं नहीं जानती कि वे यहां क्यों आए थे। लेकिन मुझे खुशी है कि उन्होंने ऐसा किया। जब मैंने वापस पढ़ना शुरू किया, मैंने अपनी किताब में उस पतझड़ के पत्ते को इस वादे के साथ रखा कि उसमें छिपी हुई सीख को हमेशा याद रखूंगी।

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