मैंने मैसेज किया ‘‘चलो मिलते हैं” और उसने दोस्ती समाप्त करना पसंद किया

by Saurabh Dalal
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वे हाल ही में रहने आए थे। एकल बच्चे वाला एक सामान्य शहरी जोड़ा। पति एक निर्यात अधिकारी है। वह एक पूर्णकालिक गृहणी है।

पहली बार हम लिफ्ट की प्रतीक्षा करते समय मिले। वह किराने की खरीदारी करके लौटी ही थी। मैंने तिरछी नज़र से एक झलक देखी और उसकी सुंदर आंखों को देखकर धड़कनों का बढ़ना महसूस किया। जब मैं भारी बैगों को लिफ्ट में रखने में मदद कर रहा था तब उसने एक त्वरित औपचारिक मुस्कुराहट दी। यह ऐसा था कि लाखों बल्ब जल उठे हों। मैं मंत्रमुग्ध हो गया था। उसने फ्लोर का बटन दबाया। और भी बड़ा चमत्कार, वह उसी मंज़िल पर रहती थी जिसमें मैं रहता था। ‘‘ओह, तुम ज़रूर 12 डी में रहने आई होगी,’’ हमारे फ्लैट के तिरछी रूप से सामने वाले फ्लैट को संदर्भित करते हुए मैंने कहा। वह हंसी। वह ऐसा था जैसे हज़ारों क्रिस्टल गेंदे झनझना उठी हों। ‘‘क्यों, हां! तुम्हें कैसे पता?’’ पहली बार मैंने सीधे उसे देखा और उन अद्भुत डिंपल्स में खो गया। वह छोटे कद की थी, लगभग 5 फुट दो इंर्च। वह एक लाल टॉप और स्किन कलर की स्कर्ट पहने हुए थी, कोई यह तक नहीं पहचान पाता कि वह शादीशुदा थी, 5 वर्ष के बच्चे की मां तो दूर की बात है। ‘‘ओह” मैं हकलाया, ‘‘मैंने देखा कि तुमने 12 दबाया और मैं 12 बी में रहता हूँ।” ‘‘इसका मतलब हम पड़ोसी हैं!’’ उसने कहा। मैंने हां में सर हिलाया। मैंने जीवन में कभी इतना अवाक् महसूस नहीं किया था। एक मैं था, जो उस पर अच्छी छाप छोड़ने का प्रयास कर रहा था और मेरी बुद्धि, हास्य और मन की उपस्थिति ने मेरा साथ छोड़ दिया था।

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अगले छह महीने तक, मैंने उसे लिफ्ट में आते जाते या हमारी बिल्डिंग के जॉगिंग ट्रैक पर देखा। हम मुस्कुराते थे और कभी-कभी बात करते थे। मैं उसके पति से भी मिला।

मैं उसके व्यक्तित्व से मोहित हो चुका था। शायद उसके युवा आचरण ने मेरे मध्य आयू वाले दिल को आकर्षित कर लिया था।

एक दिन, मुझे काम पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। वह मेरा बेटा था। नौकरानी घर पर नहीं पहुंची थी और दरवाज़ा बंद था। उसने मुझे बताने के लिए पारूल से फोन मांगा था (हां, यही उसका नाम था)। मैंने तुरंत पारूल का नंबर मेरे फोन में सेव कर लिया।
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दो दिन बाद, मैंने उसे इस बहाने से फोन किया कि मेरे बच्चे फोन का उत्तर नहीं दे रहे थे। मेरे लिए यह सुखद आश्चर्य था कि जब उसने फोन उठाया तब मेरा नाम नहीं पूछा। यह एक बहुत बड़ी अभिप्रेरणा थी। मैंने उसे वॉट्स एैप पर नियमित मैसेज और चुटकुले भेजना शुरू कर दिया। दो-तीन मैसेज के बाद, प्रत्युत्तर में उसने एक थम्स-अप या स्माइली भेजना शुरू कर दिया। उसके साथ मैंने अपने रूमी और अन्य आध्यात्मिक लेखों और कविताओं का संग्रह भी साझा करना शुरू कर दिया। उसने भी काफी अच्छी पुस्तकें पढ़ रखी थी और इस पर हमारी पसंद काफी अच्छे से मिल गई। जब भी हम मिलते थे हमारी मुस्कान अधिक बारंबार और चौड़ी होने लगी। मैंने उसे उसके परिवार सहित हमारे घर कॉफी पर आने का निमंत्रण दिया और उसने भी ऐसा किया।

मैं उसके साथ हर मुलाकात के बाद प्रफुल्लित महसूस करता था। फिर भी मैं जानता था कि वह एक पत्नी और एक मां थी और कुछ रेखाएं थी जो हम पार नहीं कर सकते थे।

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लेकिन मेरा दिल इन छोटी चर्चाओं से प्राप्त छोटे से आनंद के लिए इच्छुक था। यह एक हानिरहित लेकिन रोमांचक अनुभव था। ऐसा कुछ जिसकी मैं प्रतीक्षा करता था।

एक दिन, मैंने अपनी डीपी में अपनी मां की तस्वीर लगाई। बहुत कम उम्र में उनका निधन हो गया था और उस दिन मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी। देर रात के भोजन के बाद, मेरा मोबाइल बज उठा। यह वह थी। ‘‘डीपी में बहुत सुंदर चेहरा है। कौन है यह?’’ ‘‘यह मेरी मां है। अब वह इस दुनिया में नहीं है,’’ मैंने उत्तर दिया। ‘‘ओह, मुझे खेद है।” ‘‘कोई बात नहीं। आज मुझे उनकी याद आ रही थी इसलिए उनका चेहरा डीपी में लगा लिया। पत्नी भी सो रही है, इसलिए थोड़ा अकेला और दुखी महसूस कर रहा हूँ।” ‘‘तुम्हारी मां को क्या हुआ?’’ ‘‘वह ऑपरेशन के बाद ठीक नहीं हो सकी।” ‘‘यह दुखद है।” ‘‘हां, है।” उसके बाद उसने फिर मैसेज नहीं किया। मैंने इंतज़ार किया और फिर मैसेज किया।

“क्या यह अजीब नहीं है कि हम एक ही मंज़िल पर रहते हैं लेकिन हमें वॉट्स एैप पर बात करनी पड़ती है?’’ वह वापस ऑनलाइन आ गई। ‘‘हां, यह है।” ‘‘हम सब को कभी मिलना चाहिए” मैंने लिखा। ‘‘बिल्कुल! मिहिर अभी भारत से बाहर है लेकिन उसके आने के बाद मिलते हैं।” मैं स्वयं को नियंत्रित नहीं कर सका। मैंने लिखा, ‘‘हम अभी भी मिल सकते हैं, अगर तुम बुरा ना मानो तो,’’ मैंने एक स्माइली के साथ लिखा। वह अचानक ऑफलाइन हो गई। मुझे अहसास हुआ कि मैंने रेखा पार कर दी है, भले ही मज़े के लिए। मैंने बहुत सोचा और फिर उसे एक और मैसेज भेजा, ‘‘अगर मेरे पिछले मैसेज से तुम्हें बुरा लगा हो तो माफ करना।” उसने उत्तर नहीं दिया।

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इसके बाद, उसने मेरे प्रेरक मैसेज और चुटकुलों का उत्तर देना भी बंद कर दिया। जब भी हम अचानक मिलते हैं, वह मेरी ओर देखने से बचती है। जो एक सुंदर मित्रता हो सकती थी वह एक अपरिपक्व संदेश की वजह से समय से पहले समाप्त हो गई। सबसे बड़ी बात जो मुझे परेशान करती है वह यह कि वह मुझे एक अधेड़ उम्र का एैयाश और घटिया आदमी समझती है। मुझे बिल्कुल नहीं पता कि चीज़ों को कैसे स्पष्ट करूं।

शायद मेरे साथ यही होना चाहिए। मैंने चादर से ज़्यादा पांव फैलाने की कोशिश की और इस प्रक्रिया में दोस्ती के फूल को कली में ही दबा दिया।
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