मैंने उसे फिर अपनाया क्योंकि मैं दुखी होने से डरती हूँ

I am ready to get hurt again

देर रात मेरी आँख खुली तो किसी का ईमेल आया हुआ था. जिसका ईमेल था, उसे मैं दो साल पहले छोड़ चुकी थी. उसका नाम पढ़ते ही मन में उन सारी पुरानी यादों का सैलाब सा उमड़ आया. मैंने उसे इसलिए छोड़ा था क्योंकि वो एक उन्मुखत रिश्ता चाहता था जिसमे हम दोस्त से तो ज़्यादा हों मगर किसी बंधन में न बंधे हों.

मैं करीब तीन साल उसकी बात मान उसके साथ यूँ ही रही मगर बहुत कोशिश के बाद भी मैं उसके लिए वो “ख़ास” नहीं बन पाई. फिर एक दिन मुझे ये एहसास हुआ की मैं कितनी भी कोशिश कर लूँ, वो मुझे वो प्यार कभी नहीं देगा जिसकी मेरी तम्मना थी. तो बस मैंने फैसला कर लिया की मैं आगे बढ़ जाऊँगी. मैंने उस मेरे फ़ोन, व्हाट्सप्प और फसबूक से ब्लॉक कर दिया. उसने भी मुझे कभी फ़ोन या किसी और तरह से संपर्क करने की कोशिश नहीं की. मुझे लगा की शायद वो भी खुश था की मैं उसकी ज़िन्दगी से निकल गई थी.

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मगर मेरे लिए आगे बढ़ना उतना आसान भी नहीं था. मैं कल्पना करती थी की वो मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश कर रहा है और बीच रात को अचानक उठ कर अपना फ़ोन चेक करने लगती थी. मैं उसके पुराने मैसेज पढ़ती, फोटो देखती और फिर उन्ही यादों में लिपटी सो जाती थी.

सच कहूँ तो मुझे उसे इस तरह स्टॉक करने में मज़ा आता था. मैं थोड़ी देर के लिए उसे अनब्लॉक करती, सोशल मीडिया पर उसकी फोटो आदि देखती और फिर से ब्लॉक कर देती थी.

कुछ ही दिनों में मैं डिप्रेशन का शिकार हो गई.

मेरा इलाज़ करीब पांच महीने चला. धीरे धीरे मैं अब सँभालने लगी थी. मुझे शाम को पार्क में जाना अच्छा लगने लगा. मेरे डॉक्टर और माता पिता ने राहत की सांस ली. मेरे दोस्तों को मेरी स्तिथि के बारे में कुछ नहीं पता था. मैं अपने इस सफर में अकेले ही थी. मेरे माता पिता मेरी स्तिथि ज़्यादा अच्छे से नहीं समझते थे मगर मेरे कॉउंसलर ने मेरी बहुत मदद की.

वो मेरा जन्मदिन था जब मुझे उसका मैसेज आया. उसने मुझे जन्मदिन की बधाइयाँ दी थी. उसका नाम पढ़ते ही मन में एक बहुत तीखा सा दर्द हुआ. मैंने तय किया की मैं उसके मैसेज का कोई जवाब नहीं दूँगी. उसके बाद महीने में एक दो मैसेज आने लगे और वो मुझसे बात करने की गुहार करने लगा. मगर मैं अपने कौंसलर की सलाह मानी और उससे कोई संपर्क नहीं किया.

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उस रात जब उसका ईमेल आया, शायद वो ज़िन्दगी की सबसे काली रात थी क्योंकि उस रात मैं कमज़ोर पड़ गई और मैं उससे बात करने को राज़ी हो गई. आखिर वो दो साल से मुझसे बात करने की कोशिश कर रहा था. हमने बाते की. मैंने उसे बताया की हमारे अलग होने के पीछे मेरा कितना दर्द छुपा था. उसने मुझसे माफ़ी मांगी क्योंकि उसने मुझे मानसिक और भावनात्मक चोटें पहुंचाई थी.

उसके साथ फिर से हो कर मुझे अच्छा लगने लगा. पहले छह महीने तो लगा की वो बहुत बदल गया है. अब वो मेरा ध्यान रखने लगा था, फ़ोन करता रहता था, मुझे छेड़ता था और हर थोड़ी देर में मुझे मैसेज करता था. वो बिलकुल वैसे बन गया था जिसकी मैंने कल्पना की थी. मैं फिर से खुश थी और लगता था की मैं एक आज़ाद पंक्षी हूँ जो खुले आसमान में उड़ रही थी. अब मैं जागे ही सपने देखने लगती थी, वो सपने जिन्हे मैं भूल गई थी.
वो एक अलग सा दिन था जब मैंने तय किया की उससे मिलने मैं वलसाद जाऊँगी जहाँ वो काम करता था. मैंने फ्रीलांसिंग से कमाई अपनी सारी पूँजी उस फ्लाइट के टिकट में लगा दी और उसके पास पहुंच गई.

वो एक अच्छा समय था. मुझे तो अब यकीन हो चला था की वही मेरा जीवनसाथी होने के काबिल है. वो जिस तरह मेरा ध्यान रखता, मेरे लिए अपनी भावनाओं को संयम में रखता, मैं खुद को उससे प्रेम करने से रोक नहीं पा रही थी. जैसे वो धीरे धीरे मेरे अधरों को अपने अधरों में लेता, उनसे खिलवाड़ करता, मैं पूरी तरह उसके हांथो की कठपुतली बनती जा रही थी. वो मुझसे कहीं बेहतर खाना बनाता था और मैं तो सपने देखने लगी की जब हमारी शादी होगी, तो हम साथ खाना बनाया करेंगे. वो मेरे लिए सबसे ख़ूबसूरत पल थे और फिर मैं वापस आ गई.

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मैंने उससे पुछा, “क्या तुम मुझे प्यार करते हो.” मुझे यकीन था की इसका जवाब तो हाँ ही होगा मगर ऐसा नहीं था. उसने इतना घुमाफिरा के जवाब दिया की मैं कुछ समझ ही नहीं पाई.

मगर मैं एक बात तो बिलकुल साफ़ साफ़ समझ गई थी. वो अब भी अपनी ज़िन्दगी में मुझे बस “दोस्त से ज़्यादा” की जगह ही देना चाहता था. कुछ लोग कभी नहीं बदलते और ये बात मैंने बहुत ठोकर खा कर सीखी. वो एक अच्छा लड़का है मगर मैंने अब समझा की हर अच्छा लड़का आपके लिए अच्छा हो, ऐसा ज़रूरी नहीं होता है.

मुझे बहुत साफ तौर पर पता है की मुझे ज़िन्दगी से क्या चाहिए. मगर दूसरी तरफ वो हर बात में कंफ्यूज है. उसे अपने करियर, रिश्ते, शादी और अपनी ज़रूरतों की कोई सही तस्वीर नहीं दिखती.

आपको शायद सुन कर आश्चर्य हो मगर मैं अब भी उसके साथ “दोस्तों से ज़्यादा” के रिश्ते में बंधी हूँ. मुझे डर है की अगर मैंने उसे छोड़ दिया तो फिर मेरी हालत पहले जैसी ही हो जाएगी. मैं उस तड़प से कहीं बेहतर ये झूठी ज़िन्दगी मानती हूँ. कम से कम मैं दोबारा जी तो रही हूँ तब तक जब तक दोबारा न बिखरुं.

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Readers Comments On “मैंने उसे फिर अपनाया क्योंकि मैं दुखी होने से डरती हूँ”

  1. i m facing the same but the difference between us is he is my husband nd i can’t leave him bcoz of my 8 months old daughter he is cheating on me again and again and again but i can’t do anything and bcoz of it i m dying day by day

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