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मेरा पति दूसरों के साथ सेक्स्ट करता है, मुझसे या बच्चों से बात नहीं करता है। मैं क्या करूं?

पति कहता है कि वह बच्चों के लिए कमाता है, लेकिन उनके साथ समय नहीं बिताता है। ना ही वह मेरे साथ समय बिताता है।
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प्रिय मैम,

मेरी शादी को 8 साल हो गए हैं और मेरे दो बच्चे हैं। मेरा पति कभी भी मुझमें रूचि नहीं लेता है। मुझे हाल ही में अपने पति की सेक्सटिंग के बारे में पता चला। जब मैंने उससे पूछा तो उसने कहा कि वह ऐसा इसलिए कर रहा था ताकि हमारा रिश्ता सुधर जाए। उसे अपने व्यवहार के लिए कभी अफसोस नहीं हुआ। मैंने इसे बिल्कुल महत्त्व नहीं दिया और चीज़ों को भूलने की कोशिश की और शुरूआत से शुरू करने की कोशिश की लेकिन चीज़ें नहीं सुधरीं। वह अभी भी ऐसा ही है। वह मुझसे बात करने से इन्कार करता है। जब मैं पूछती हूँ कि क्या कोई चीज़ उसे परेशान कर रही है, तो वह मुझे बताता नहीं है। वह बच्चों से प्यार करता है लेकिन उनकी देखभाल करने के लिए कुछ नहीं करता है। वह हमेशा कहता है कि वह उनके लिए कमा रहा है; बाकी का काम मुझे करना होगा। मैं उलझन में हूँ, क्या मुझे इस प्यार रहित विवाह में रहना चाहिए और हर दिन तन्हाई में गुज़ारना चाहिए?

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मल्लिका पाठक कहती हैं:

हैलो!

संचार रहित रिश्ता एक उस रिश्ते की तरह है जो अस्तित्व में ही नहीं है। फिर भी भावनात्मक प्राणियों के रूप में हम अपनी वर्तमान परिस्थितियों के बदलने का इंतज़ार करते रहते हैं; छोटे बदलावों का भी। आपकी स्थिति मुश्किल है, क्योंकि धोखा भी शामिल है। यह बात समझ में नहीं आती कि सेक्सटिंग आपके रिश्ते को सुधारने का प्रयास था। इसके अलावा, उसके द्वारा इसके लिए कोई पछतावा नहीं दिखाना एक और संकेत है कि वह इसे एक समस्या नहीं समझ रहा है।

किसी भी संबंध को दोनों पक्षों से समान प्रयासों की ज़रूरत होती है। आपने अपनी तरफ से प्रयास किया है, लेकिन उसके प्रयास भी उतने ही ज़रूरी हैं। वह कहता है कि बच्चों की देखभाल करना आपकी ज़िम्मेदारी है, लेकिन बच्चे आप दोनों के हैं। पिता और बच्चे के बॉन्ड को भी विकसित होने की ज़रूरत है। एक व्यक्ति ज़िम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हट सकता है।

मैं समझ सकती हूँ कि वह नौकरी करता है और उसकी दिनचर्या व्यस्त है, लेकिन कई कामकाजी जोड़े भी बच्चों की ज़िम्मेदारियां आपस में बांटने में सक्षम होते हैं। यह ना सिर्फ हर साथी को थोड़ा आराम देता है, लेकिन बच्चों का माता और पिता दोनों के साथ एक स्वस्थ संबंध होना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।

मुझे लगता है कि आपको खुद से कुछ आत्मविश्लेषी सवाल पूछने की ज़रूरत है। क्या वह ऐसा साथी है जिसके साथ आप अपना सारा जीवन बिताना चाहती थीं? क्या वह भरोसेमंद है? क्या आप धोखे को नज़रंदाज करने के लिए तैयार हैं। क्या आप वह सम्मान प्राप्त कर रही हैं जिसके आप योग्य हैं? क्या ऐसे तरीके हैं जिनसे आप उसे संबंध में संचार की ज़रूरत के बारे में समझा सकती हैं? आप इस संबंध से क्या प्राप्त कर रही हैं? खुद से ये सवाल पूछें और उत्तर ढूंढने की कोशिश करें। अपने परिवार या उसके परिवार से बात करें अगर वे आपका साथ देते हैं तो। अगर आपके कोई और विचार हैं तो मुझसे संपर्क करने में संकोच ना करें।

शुभेच्छा!
मल्लिका

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