मेरा पति स्वयं को बहुत लिबरेटेड दर्शाता था लेकिन उसने मेरे जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करने की कोशिश की

by Ram Kumar Ramaswamy
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(जैसा राम कुमार रामास्वामी को बताया गया)

मैं पाँच साल पहले चेन्नई के एक सुंदर सीशोर बंगले पर उससे मिली। मौसम सुहाना था, और हम दोस्तों का एक छोटा सा समूह था जिसे मेरी स्कूल की बेस्ट फ्रेंड ने अपनी सगाई की खुशी मनाने के लिए आमंत्रित किया था। वह एक पत्रकार था। जब हम कॉफी के अनगिनत कप और फ्रायम्स के साथ कैरम खेल रहे थे वह मेरे सामने बैठा था। मैंने उसे सामाजिक मुद्दों, युद्धग्रस्त पश्चिम एशियायी देशों में पीड़ित महिलाओं के बारे में बात करते सुना….उसने हमें मलाला युसुफज़ाई के जीवन का एक गहन परिचय भी दिया। मैं प्रभावित हुई्र थी।

कितना अद्भुद व्यक्ति!

हमने एक दूसरे के नंबर लिए और अगले पाँच हफ्तों तक एक दूसरे के साथ चैट करना जारी रखा। या यूँ कहा जाए कि हम विश्व के किसी भी मुद्दे खासतौर पर महिलाओं के हर मुद्दे पर ज़ोरदार बहस करते थे। वह परम सुख था। उसके साथ बातचीत एक लत जैसी थी, और मुझे यह बात अच्छी लगती थी कि वह ध्यान रखता था कि हमारी आपसी प्रशंसा कभी हमारी बहस के बीच ना आ जाए। मैं मानती थी कि यह ऐसा पुरूष है जो वास्तव में स्त्री का सम्मान करता है।
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हम पूरी तरह प्यार में डूब गए। विवाह करने का फैसला लेने से पहले हमने तीन महीनां तक एक दूसरे के साथ डेटिंग की। उसके मुँह से मेरे गुणों और मेरी बुद्धिमत्ता की तारीफ, और यह भी की एक स्त्री होते हुए भी मैं उससे बेहतर हूँ सुनकर मैं शर्म से लाल हो जाती थी। शब्दों पर उसकी बहुत अच्छी पकड़ थी और वह खुद को ‘वीकर सेक्स’ कहता था।

सारी सही बातें कहना

उसने मुझे कहा कि मुझे एन्टोमोलॉजी पढ़ने के अपने पैशन को पूरा करना चाहिए और मुझे दुनिया की परवाह नहीं करनी चाहिए जो कहती है कि मुझे मैरिज मटीरियल बनने के लिए तैयार रहना चाहिए। ‘‘शादी बकवास है, प्यार अस्थायी और कुछ ही समय के लिए है, अनन्त नहीं। हमें इस समय विश्व में आत्मनिर्भर महिलाओं की आवश्यकता है जो उस भूमिका में बँधने से इनकार कर दे जिसमें समाज उन्हें बाँधना चाहता है। जाओ! अपने सपनों को पूरा करो! वह सब करो जो तुम्हें लगता है कि तुम्हें करना चाहिए। पति तुम्हारा मैनेजर नहीं होता। तुम्हें खुद अपना बॉस बनना चाहिए। अब जब हम प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं, मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूँ। एक विवाहित साथी के रूप में मैं तुम्हें केवल सुझाव दे सकता हूँ कि तुम्हें जीवन में क्या करना चाहिए जैसे की कोई शुभचिंतक देगा। निर्णय लेना? वह तुम्हारा काम है बेबी!’’ ये उसके शब्द थे।

मैं ये शब्द अपनी स्मृति से दोहरा रही हूँ। मेरे पास उसकी कोई चैट सेव्ड नहीं है, क्योंकि हमें तलाक लिए एक साल हो गया है और मैंने अपने भले के लिए उसकी हर डिजिटल स्मृति को डीलीट कर दिया है।

कितना बड़ा ढोंगी!

यादों की बाढ़ आती गई। अब मैं इतनी भावना रहित हो चुकी हूँ कि भावनात्मक नहीं हो सकती और ना ही ऐसा करने का कोई औचित्य है। अब जब मैं हॉलिवुड निर्माता विनस्टेन और उसके ट्रान्सग्रेशन की रिपोर्ट पढ़ कर हँसती हूँ, मैं सोचती हूँ मुझे उससे असली समस्या क्या थी जिसकी वजह से हमें तलाक लेना पड़ा। उसकी दोगली बातें! वह जिसे मैं गर्वीला, सामाजिक रूप से अवगत, जागरूक व्यक्ति समझती थी जो अपने मन में लगभग विश्व की हर समस्या का हल निकाल चुका था। लेकिन उसके मन में भीतर भद्दा, वन्य, जंगली पित्रसत्तात्मक व्यक्ति था जो मौका मिलते ही बाहर निकलता था।

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शादी के शुरूआती सप्ताहों में उसकी दोगली बातों को सुनना बहुत मुश्किल था कई बार भयंकर। हमारे हनीमून स्वीट में उसने पीछे से मुझे गले लगाकर कहा, ‘‘डार्लिंग, अब जब हमारी शादी हो चुकी है, तुम पूरे समय के कार्य की जगह फ्रीलांस नौकरियाँ ढूँढ सकती हो। जब बच्चा आएगा, तुम उसे बेहतरीन देखभाल देने के लिए तनाव रहित रहोगी।” मैं कुछ नहीं कहती थी। मैं केवल अपनी आँखे घुमाती थी यह जानते हुए कि वह एक गृहणी बनने का सुझाव दे रहा है।

मुझ पर नियंत्रण रखना

कुछ सप्ताह बीत गए। ‘‘डार्लिंग, तुम इनमें सुंदर दिखोगी,’’ और उसने मुझे एक के बाद एक ऐसे कपड़े गिफ्ट करना शुरू कर दिया जो उसके अनुसार मुझपर फबते थे। मैंने विरोध किया, लेकिन उसके नाराज़ होने पर मैं जल्द ही झुक गई। मैं उसके द्वारा लाए गए ढँके हुए कपड़े पहनने के लिए तैयार हो गई और अपने शॉर्टस् और स्कर्ट को छुपा दिया। जैसे ही प्यार का सुख धुंधला हुआ, चौथे महीने के बाद से उसका बुरा पक्ष ज्यादा बार दिखने लगा था। उसका गुस्सा बहुत ज़्यादा बुरा था, और वह जिसके साथ हमारी डेटिंग के दौरान मैं कविताएँ गा पड़ती थी, उसने मुझे ऐसे नामों से बुलाना शुरू कर दिया कि मेरा मन झुलस गया।

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ड्राइविंग के दौरान सामान्य सी गलती, और वह मुझे इडियट बोल देता था और हर औरत पर ‘बैड ड्राइवर’ होने का ठप्पा लगा देता था। अपने भीतर के पित्रसत्तात्मक को बाहर निकाल देने की अपनी गलती का अहसास होते ही वह तुरंत, अपने दावे को साबित करने के लिए ‘वैज्ञानिक बैकिंग’’ ढूँढने की कोशिश करने लगता था और एक भावात्मक चेहरे के साथ अपने स्मार्ट फोन पर ऐसा ‘रीसर्च आर्टिकल’ ढूँढने लगता था जो उसकी बात से सहमत होगा। एमसीपी। वह यही था और यह जानकर बहुत बुरा लगता था। ‘मेल। चॉविनिस्ट। पिग।’ वह बैठा-बैठा फेसबुक पर संवेदनशील, ‘फेमिनिस्ट’ राय पोस्ट करता रहता था और मुझे उन्हें लाईक करने का और साथ ही उसके लिए कॉफी लाने, उसके कपड़े धोने, और वह जो भी चाहता वह करने का ‘आदेश’ देता था।

एक दिन मैंने गलती से उसकी फेवरेट शर्ट पर सूप गिरा दिया, और उसने ना सिर्फ मुझे सेन्सलेस बिच कहा बल्कि थप्पड़ भी मार दिया। उसके बाद वह एक कोने में जाकर सिसकने लगा और मेरे सामने झुक कर माफी माँगने लगा। उस दिन मेरे दिल में कोई छोटी सी चीज़ टूट गई जो फिर कभी नहीं जुड़ी। मैंने जैसे-तैसे उस शाम को भुला दिया और उसे एक और मौका देते हुए आगे बढ़ गई।

प्यार की कहानियां जो आपका मैं मोह ले

अंतिम अब्यूज़

एक और दिन, उसने मुझ पर बैंक डीटेल्स और ईमेल पासवर्ड और मेरे फोन का अनलॉक पैटर्न देने का दबाव बनाया। ‘‘यह हमारे अच्छे के लिए ही है बेबी! मैं ‘हमारे’ फाइनेंस प्लान कर रहा हूँ।” और मेरी सहमति का क्या? मैंने फिर भी उसे डीटेल्स दे दी। एक हफ्ता बीत गया, और मैं हैरान रह गई जब मुझे पता चला कि मेरी ड्रीम कंपनी से एक अच्छी नौकरी का ऑफर आया था। मुझे वह ट्रैश फोल्डर में मिला और मैंने देखा की डेडलाइन जा चुकी है। मैंने उसे बताया। उसने सब अनुचित कारण बताए, और जब मैंने विरोध किया, वह पागल हो गया और फिर से मुझे चेहरे पर मारा। इस बार वह रोया नहीं। वह बाहर से ताला लगाकर चला गया। खुशकिस्मति से मेरे पास दूसरी चाबी रखी थी और मैंने अपने बैग में कुछ कपड़े, फोन, लैपटॉप और मेरी सर्टिफिकेट फाइल्स रखीं और अपने मम्मी-पापा के घर चली गई। यह अच्छा ही हुआ।

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एक साल बाद, हमारा तलाक हो गया क्योंकि उसके परिवार वालों की तरफ से पैच-अप के सारे प्रयास विफल हुए थे। मेरे मम्मी-पापा ने पूरी तरह मेरा साथ दिया।

अब मैं मुक्त हूँ।

कल मैंने फेसबुक पर उसकी झूठी ‘समर्थ-महिला’ पोस्ट पढ़ी जो मेरी सहेली ने मुझे दिखाई थी। हम दोनों बहुत हँसे। उस रात हमने पार्टी भी की। अब मेरा जीवन उसके बिना ‘वास्तव’ में सुखी है। मैं अब केवल एक ही बात कहना चाहती हूँ। अगर वह मर्द जो आपको चाहता है, ज़्यादा ही सही और नम्र बर्ताव करे जो विश्वास के परे हो, वह शायद केवल वही है! नाटक! मैं यह उसके परदे के कारण नहीं देख पायी। उम्मीद करती हूँ कि मेरी तरह और कोई लड़की इन दरिंदो के जाल में नहीं फँसेगी जो केवल एक गिरगिट हैं जो अपने शिकार को फँसाने के लिए अपने कौशल का इस्तेमाल करते हैं। ध्यान रहे!
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अपने विवाह में परास्त की गई

मेरे पति मुझे महत्त्वहीन महसूस करवाते हैं

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