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मेरा विवाहेतर संबंध है और इसने मेरी शादी को अधिक सहनशील बना दिया है

आरूषी चौधरी एक ऐसी सहेली की कहानी बयान कर रही है जो कई वर्षों से अपमानजनक विवाह में रह रही है और अब अंततः एक सहकर्मी के साथ संबंध के माध्यम से अपनी परेशानियों से राहत प्राप्त कर रही है।
A-Guy-Proposing

(जैसा आरूषी चौधरी को बताया गया)

मैं 23 साल की लड़की थी, कॉलेज से बस निकली ही थी, और आशाजनक भविष्य के सपनों से उत्साहित थी जब एक विवाह के प्रस्ताव ने मेरे जीवन की दिशा को अपरिवर्तनीय रूप से बदल दिया। वह एक धनी व्यापारी था। उसके मोटे बैंक बेलैंस ने मेरी आकांक्षाएं बढ़ा दीं और उसका मुझसे दस साल बड़ा होना भी महत्त्वहीन हो गया। मेरे माता पिता ने मुझे शादी के लिए सहमत करने और मेरे व्यवसायिक लक्ष्यों को रोकने के लिए वही तर्क इस्तेमाल किया कि ‘इससे अच्छा रिश्ता नहीं मिलेगा’।

90 के दशक में आज जैसी डेटिंग नहीं होती थी। हमने मुश्किल से एक दूसरे से बात की, और शादी से पहले एक दूसरे से बस तीन बार मिले वह भी हमारे परिवारों के साथ। प्रारंभिक कुछ महीनें अच्छे लगे और मैं अपने पति के प्रति अपनत्व भी महसूस करने लगी थी और इस विवाह के विचार को सही मानने लगी थी। विवाह के तीन महीने बाद मैंने पाया कि मैं अपने पहले बच्चे के साथ गर्भवती हूँ क्योंकि असली मर्द कंडोम नहीं पहनते और स्त्री द्वारा गोली लिया जाना निंदापूर्ण है क्योंकि उसके अस्तित्व का एकमात्र उद्देश्य संतान उत्पन्न करना है। जब मैंने कहा कि मैं यह ज़िम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं हूँ और गर्भपात का सुझाव दिया, तो मुझे मुक्का मारा गया, लात मारी गई और फैंका गया जब तक कि मैंने माफी की भीख नहीं मांगी और उसके इशारों पर चलने को तैयार ना हो गई।

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